प्र1.
सुंदरवन के लोग किस प्रकार मैंग्रोव वनों पर निर्भर रहते हैं?
उत्तर
यह वन उनका भोजन है, उनका काम है और समुद्र के विरुद्ध उनकी दीवार है। यहाँ के परिवार पीढ़ियों से इसके पास रहते आए हैं और प्रतिदिन की आवश्यकता इसी से लेते हैं।
| लोगों को क्या मिलता है | कैसे मिलता है |
|---|---|
| मछली और झींगे | धाराओं में जाल डालकर मछली पकड़ते हैं और उथले जल से झींगे के बच्चे बटोरते हैं। मछली उनका मुख्य भोजन और मुख्य आय है। |
| केकड़े | जड़ों के बीच से कीचड़ के केकड़े इकट्ठे करके बाज़ार में बेचते हैं। |
| शहद और मोम | मौसम में शहद एकत्र करने वाले वन में जाकर जंगली मधुमक्खियों के छत्ते काटते हैं। बाघ के कारण यह सबसे खतरनाक काम है। |
| ईंधन और इमारती लकड़ी | चूल्हे के लिए सूखी शाखाएँ, घर के ढाँचे और नाव के लिए बल्लियाँ। |
| पत्ते और छप्पर | वन के किनारे से ताड़ के पत्ते और घास, छत और चटाई के लिए। |
| तूफ़ान से सुरक्षा | वृक्षों की मोटी पट्टी चक्रवात की हवा और लहरों का वेग तोड़ देती है, इससे पहले कि वे पीछे बसे गाँवों तक पहुँचें। |
| टिकी रहने वाली भूमि | मैंग्रोव की जड़ें कीचड़ को बाँधे रखती हैं, इसलिए नदी द्वीपों को बहा नहीं ले जाती। |
| मछलियों का पालना | मछलियाँ और झींगे जड़ों के बीच अंडे देते हैं। मैंग्रोव न रहें तो जल्द ही पकड़ने को मछली भी नहीं बचेगी। |
| पर्यटक | कुछ लोग वन देखने आने वालों के लिए नाविक और मार्गदर्शक का काम करते हैं। |
इसे सामंजस्य क्यों कहते हैं: वे शहद लेते हैं पर छत्ते को फिर बनने के लिए छोड़ देते हैं। वे मछली पकड़ते हैं पर प्रजनन के मौसम में उन धाराओं को छोड़ देते हैं। वे शाखाएँ काटते हैं, पूरा वृक्ष नहीं। वे जानते हैं कि वन गया तो उनकी आजीविका भी गई — इसलिए उसकी रक्षा करना और उसका उपयोग करना उनके लिए एक ही काम है।
सिर के पीछे मुखौटा: बाघ पीछे से झपटता है। इसलिए शहद एकत्र करने वाले और लकड़हारे कभी-कभी मुखौटा उल्टा, सिर के पीछे बाँध लेते हैं, ताकि बाघ जिधर से भी देखे उसे एक चेहरा देखता हुआ लगे। इससे बाघ रुक सकता है। यह पूरी तरह सुरक्षित उपाय नहीं है, पर यह दिखाता है कि इन लोगों ने अपने साथी वनवासी जंतु को कितने ध्यान से समझा है।