अंतर केवल एक बात का है — धन या वस्तु के नकद मूल्य का लेन-देन हुआ या नहीं। शेष सब इसी से निकलता है।
गैर-आर्थिक गतिविधियाँ “वे हैं जिनमें आय अथवा संपत्ति अर्जित नहीं होती है, बल्कि इन्हें कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभूतियों के साथ किया जाता है।” (पृष्ठ 186)
| अंतर का आधार | आर्थिक गतिविधियाँ | गैर-आर्थिक गतिविधियाँ |
|---|---|---|
| 1. धन | धन या वस्तु के नकद मूल्य का लेन-देन होता है | धन का कोई लेन-देन नहीं |
| 2. उद्देश्य | अर्थोपार्जन; दूसरों के लिए वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करना | कृतज्ञता, स्नेह, सेवा, आदर, कुछ लौटाने का भाव |
| 3. आय या संपत्ति | करने वाले को आय और संपत्ति मिलती है | कोई आय नहीं होती |
| 4. भुगतान का रूप | वेतन, मजदूरी, शुल्क, वस्तु के रूप में भुगतान — अथवा व्यवसाय में लाभ | कोई भुगतान नहीं; प्रतिफल है संतुष्टि और कृतज्ञता |
| 5. सामान्यत: किसके लिए | ग्राहक, नियोक्ता, पक्षकार — प्राय: परिवार से बाहर के लोग | परिवार, पड़ोस, समुदाय, राष्ट्र |
| 6. मूल्य संवर्धन | हर चरण पर मूल्य जोड़ती हैं — ₹600 की लकड़ी ₹1000 की कुर्सी बनती है | जीवन में मूल्य जोड़ती हैं, किंतु ऐसा मूल्य नहीं जो रुपये में आँका जाए |
| 7. उदाहरण | स्कूल बैग बेचता व्यापारी; उपज बेचता किसान; शुल्क लेती वकील; ट्रक चालक; कार कारखाने के श्रमिक; विमान चालक गीता मौसी; डाकघर में काव्या की चाची; श्रमिक साहिल | परिवार के लिए भोजन बनाते अभिभावक; बच्चों को गृहकार्य में सहायता; बुजुर्गों की सेवा करते युवा; मिलकर घर का नवीनीकरण; दादा जी की नि:शुल्क कक्षाएँ; सिलाई समूह; सेवा और लंगर; स्वच्छ भारत अभियान; वन महोत्सव |