अन्वेषण अध्याय 13 प्रश्न, गतिविधियाँ और परियोजनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आर्थिक गतिविधियाँ किस प्रकार गैर-आर्थिक गतिविधियों से भिन्न होती हैं?
उत्तर

अंतर केवल एक बात का है — धन या वस्तु के नकद मूल्य का लेन-देन हुआ या नहीं। शेष सब इसी से निकलता है।

आर्थिक गतिविधियाँ “वे हैं जिनमें अर्थ (द्रव्य, मुद्रा) सम्मिलित होता है अथवा जिन्हें अर्थोपार्जन के लिए किया जाता है अथवा जो सम्मिलित पक्षों के लिए वस्तु के नकद मूल्य से संबंधित होती हैं।” (पृष्ठ 185)
गैर-आर्थिक गतिविधियाँ “वे हैं जिनमें आय अथवा संपत्ति अर्जित नहीं होती है, बल्कि इन्हें कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभूतियों के साथ किया जाता है।” (पृष्ठ 186)
अंतर का आधारआर्थिक गतिविधियाँगैर-आर्थिक गतिविधियाँ
1. धनधन या वस्तु के नकद मूल्य का लेन-देन होता हैधन का कोई लेन-देन नहीं
2. उद्देश्यअर्थोपार्जन; दूसरों के लिए वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करनाकृतज्ञता, स्नेह, सेवा, आदर, कुछ लौटाने का भाव
3. आय या संपत्तिकरने वाले को आय और संपत्ति मिलती हैकोई आय नहीं होती
4. भुगतान का रूपवेतन, मजदूरी, शुल्क, वस्तु के रूप में भुगतान — अथवा व्यवसाय में लाभकोई भुगतान नहीं; प्रतिफल है संतुष्टि और कृतज्ञता
5. सामान्यत: किसके लिएग्राहक, नियोक्ता, पक्षकार — प्राय: परिवार से बाहर के लोगपरिवार, पड़ोस, समुदाय, राष्ट्र
6. मूल्य संवर्धनहर चरण पर मूल्य जोड़ती हैं — ₹600 की लकड़ी ₹1000 की कुर्सी बनती हैजीवन में मूल्य जोड़ती हैं, किंतु ऐसा मूल्य नहीं जो रुपये में आँका जाए
7. उदाहरणस्कूल बैग बेचता व्यापारी; उपज बेचता किसान; शुल्क लेती वकील; ट्रक चालक; कार कारखाने के श्रमिक; विमान चालक गीता मौसी; डाकघर में काव्या की चाची; श्रमिक साहिलपरिवार के लिए भोजन बनाते अभिभावक; बच्चों को गृहकार्य में सहायता; बुजुर्गों की सेवा करते युवा; मिलकर घर का नवीनीकरण; दादा जी की नि:शुल्क कक्षाएँ; सिलाई समूह; सेवा और लंगर; स्वच्छ भारत अभियान; वन महोत्सव
जो अंतर नहीं है: महत्व का। दोनों प्रकार के कार्य आवश्यक हैं और दोनों समान सम्मान के अधिकारी हैं। एक ही गतिविधि केवल व्यवस्था बदलने से एक स्तंभ से दूसरे में चली जाती है — घर में भोजन बनाना गैर-आर्थिक है; वही भोजन होटल में बनाना आर्थिक है। यदि अंतर कार्य के महत्व का होता तो यह अदला-बदली संभव ही न होती।
परीक्षा-सुझाव: इस प्रश्न का उत्तर 4–6 आधारों वाली तालिका में लिखिए और अंत में एक वाक्य अवश्य जोड़िए कि अंतर भुगतान का है, कार्य की गरिमा का नहीं। यही अंतिम वाक्य पूरे अंक दिलाता है।
प्र2.
लोग किस प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर

लोग मुख्यत: चार प्रकार से जीविका अर्जित करते हैं, और यह अध्याय हर प्रकार के लिए एक वास्तविक पात्र देता है।

आर्थिक गतिविधि का प्रकारव्यक्ति क्या करता हैअध्याय से उदाहरणभुगतान का रूप
1. प्रकृति से उपज लेनाभूमि से भोजन और कच्चा माल उत्पन्न करता हैबाजार में उपज बेचता किसान; ट्रैक्टर से खेत जोतता श्रमिक साहिल; आम का बगीचाफसल की बिक्री; दैनिक मजदूरी, कुछ नकद और कुछ वस्तु के रूप में भुगतान
2. वस्तुएँ बनानाकच्चे माल को उपयोगी बनी हुई वस्तु में बदलता है — यहीं मूल्य संवर्धन सबसे स्पष्ट दिखता है₹600 की लकड़ी से कुर्सी बनाते बढ़ई राजेश; कार बनाने वाले कारखाने के श्रमिकप्रत्येक वस्तु की बिक्री पर लाभ; कारखाने के श्रमिकों को वेतन या मजदूरी
3. क्रय-विक्रय (व्यापार)वस्तुओं को वहाँ से लाता है जहाँ वे बनती हैं और वहाँ पहुँचाता है जहाँ उनकी आवश्यकता हैस्कूल बैग बेचने वाला व्यापारी; अनु के माता-पिता की दुकान, जहाँ वेशभूषा और सिले हुए वस्त्र बिकते हैंलाभ — माल, दुकान और कर्मचारियों का व्यय निकालने के बाद बची धनराशि
4. सेवाएँ देनाकोई वस्तु नहीं, अपना कौशल, देखभाल, सुरक्षा या सुविधा देता हैविमान चालक गीता मौसी; बहस करती वकील; ट्रक चालक; सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोहन; बुलडोजर तकनीशियन काव्या के चाचा; डाकघर तथा ऑनलाइन कक्षाओं वाली काव्या की चाची; चिकित्सक, शिक्षक, बैंक कर्मीकर्मचारियों को वेतन; व्यावसायिक व्यक्ति को प्रत्येक सेवा का शुल्क

एक ही परिवार चारों में से तीन प्रकार पूरे कर देता है। काव्या की चाची गाँव के डाकघर से वेतन पाती हैं और ऑनलाइन कक्षाओं का साप्ताहिक शुल्क लेती हैं; काव्या के चाचा निर्माण तकनीशियन के रूप में वेतन पाते हैं; काव्या के पिता राजेश फर्नीचर बनाकर बेचते हैं। एक घर, तीन प्रकार की आर्थिक गतिविधि, भुगतान के तीन रूप।

क्या आप जानते हैं? इस अध्याय से आगे अर्थशास्त्री इन चारों समूहों को औपचारिक नाम देते हैं। प्रकृति से उपज लेना प्राथमिक क्षेत्र है; वस्तुएँ बनाना द्वितीयक क्षेत्र; और व्यापार तथा सेवाएँ मिलकर तृतीयक क्षेत्र बनाते हैं। ये शब्द आप ऊपर की कक्षा में पढ़ेंगे — विचार तो इसी अध्याय में मौजूद है, केवल नाम नहीं दिए गए हैं।
चारों में से हर एक क्यों आवश्यक है: किसान की कपास तब तक व्यर्थ है जब तक उसे कातने वाली मिल, सिलने वाला दर्जी, ढोने वाला ट्रक और बेचने वाली दुकान न हो। शृंखला की कोई एक कड़ी काट दीजिए, शेष सब रुक जाएगा। कोई भी आर्थिक गतिविधि दूसरी से बड़ी नहीं है — हर एक इसीलिए है कि दूसरों को उसकी आवश्यकता है।
प्र3.
सामुदायिक सेवा गतिविधियों में लगे लोग अत्यधिक सम्माननीय हैं। इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर

यह कथन सही है, और अध्याय ठीक-ठीक बताता है क्यों। सामुदायिक सेवा में लगे लोगों को कुछ भी नहीं मिलता, अत: पृष्ठ 186 की परिभाषा के अनुसार उनका कार्य गैर-आर्थिक है। फिर भी पृष्ठ 191 इसी खंड का आरंभ उसी वाक्य से करता है जो इस प्रश्न का उत्तर है — “गैर-आर्थिक गतिविधियों में धनराशि सम्मिलित नहीं होती है, फिर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन में महत्व रखते हैं।”

ऐसे लोग अत्यधिक सम्माननीय क्यों हैं — पाँच कारण

  • वे बदले में कुछ नहीं चाहते। पृष्ठ 192 कहता है कि ये सेवा कार्य “नि:स्वार्थ भाव से समाज में योगदान देते हैं।” यही सेवा है, और यह भारतीय जीवन के सबसे पुराने विचारों में से एक है। गुरुद्वारे का लंगर “सभी श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन” कराता है — सभी को, बिना यह पूछे कि कौन है।
  • वे वह काम करते हैं जो धन से नहीं हो पाता। किसी नगरपालिका के पास इतने कर्मचारी नहीं कि हर गली स्वच्छ रहे। स्वच्छ भारत अभियान इसलिए सफल है कि साधारण नागरिक स्वयं यह करते हैं, और “इन सामूहिक प्रयासों से घर, आस-पास के क्षेत्र, समाज और राष्ट्र स्वच्छ रहता है।”
  • वे उन तक पहुँचते हैं जहाँ और कुछ नहीं पहुँचता। दादा जी की नि:शुल्क भूगोल की कक्षा, महिलाओं को सिलाई सिखाने वाला स्वैच्छिक समूह, युवा विकास कार्यक्रम में रोहन की सप्ताहांत कक्षाएँ — हर एक किसी को ऐसा कौशल देती है जो शायद उसे और कहीं से न मिलता। आज नि:शुल्क दिया गया कौशल कल किसी की जीविका बन जाता है।
  • वे अपने जीवनकाल से आगे सोचते हैं। वन महोत्सव “वृक्षों के महत्व और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता” के लिए समुदाय को वृक्षारोपण हेतु एकत्र करता है। वन महोत्सव में पेड़ लगाने वाला प्राय: उसकी छाया में स्वयं कभी नहीं बैठता।
  • वे ऐसा उदाहरण रखते हैं जो फैलता है। कचरा अलग करने वाला एक परिवार पूरी गली बदल देता है; एक स्वच्छ गली पूरी कॉलोनी बदल देती है। सामुदायिक सेवा इस तरह बढ़ती है जैसे कोई वेतन वाला काम प्राय: नहीं बढ़ पाता।
गहरी बात: समाज दो अलग-अलग चीजों से बँधा रहता है — लेन-देन, जहाँ मैं आपको कुछ इसलिए देता हूँ कि आप भुगतान करते हैं, और सेवा, जहाँ मैं आपको कुछ इसलिए देता हूँ कि आपको आवश्यकता है। पहली को धन सँभाल लेता है। दूसरी को केवल ऐसे लोग सँभालते हैं। इसीलिए अध्याय इन्हें सम्मान देने को कहता है — शिष्टाचार के नाते नहीं, बल्कि इसलिए कि इनके बिना समाज सचमुच नहीं चलता।
अपने जीवन से उदाहरण दीजिए: इस प्रश्न का अच्छा उत्तर किसी एक वास्तविक व्यक्ति का नाम लेता है — नि:शुल्क पढ़ाने वाला पड़ोसी, रक्तदान शिविर लगवाने वाले चाचा, हर गर्मी में तालाब साफ करने वाला समूह — और बताता है कि वे रुक जाएँ तो क्या नहीं रहेगा। वह एक ठोस उदाहरण पन्ने भर की प्रशंसा से अधिक मूल्यवान है।
प्र4.
विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए लोगों को किस-किस प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर

अध्याय चार रूप बताता है और हर एक की परिभाषा हाशिये पर देता है; अपना काम स्वयं करने वालों के लिए पाँचवाँ रूप भी है।

पारिश्रमिक का रूपपुस्तक की परिभाषाकब मिलता हैउदाहरण
वेतन“एक नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को नियमित रूप से प्रतिमाह किया जाने वाला नियत भुगतान” (पृष्ठ 187)हर माह उतनी ही राशि, चाहे उस दिन का काम कैसा भी रहा होविमान चालक गीता मौसी; सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोहन; निर्माण तकनीशियन काव्या के चाचा; गाँव के डाकघर में काव्या की चाची; शिक्षक, बैंक कर्मी, नर्स
मजदूरी“एक विशिष्ट समय अवधि के लिए नियोक्ता द्वारा श्रमिक को किया गया भुगतान” (पृष्ठ 189)दिन या घंटे के हिसाब से, प्राय: उसी अवधि के अंत मेंसाहिल, खेत का श्रमिक, जिसे “दैनिक मजदूरी” मिलती है; निर्माण स्थल के राजमिस्त्री, सहायक और पल्लेदार
शुल्क“किसी व्यावसायिक परामर्श या सेवाओं के लिए एक व्यक्ति या संगठन को किया गया भुगतान” (पृष्ठ 185)प्रत्येक दी गई सेवा पर एक बार“अभियोजन का शुल्क” लेती वकील; चिकित्सक का परामर्श शुल्क; काव्या की चाची की परीक्षा-तैयारी कक्षाओं का साप्ताहिक शुल्क
वस्तु के रूप में भुगतान“किए गए कार्य के लिए प्राप्त किया गया गैर-मौद्रिक भुगतान” (पृष्ठ 189)नकद के साथ, या नकद के स्थान परसाहिल को शेष भुगतान “आमों के रूप में” मिलता है; अनाज के रूप में भुगतान पाने वाले खेत-श्रमिक; ऐसी नौकरी जिसमें आवास या भोजन नि:शुल्क मिले
लाभ (स्वरोजगार वालों के लिए)अध्याय में परिभाषित नहीं, किंतु दिखाया गया है — सामग्री और सब व्यय निकालने के बाद जो बचेजब भी बिक्री हो; हर सप्ताह अलग-अलगबढ़ई राजेश: ₹1000 − ₹600 की लकड़ी − उपकरण और सामग्री का व्यय; अनु के माता-पिता की वस्त्र दुकान; स्कूल बैग बेचने वाला व्यापारी; अपनी उपज बेचने वाला किसान
भुगतान का रूप कैसे तय होता है: यह इस पर निर्भर करता है कि कार्य किस व्यवस्था में हो रहा है। एक ही नियोक्ता के साथ नियमित, निरंतर काम के लिए वेतन उपयुक्त है — आप अपने समय की उपलब्धता के लिए भुगतान पाते हैं। जो काम केवल कुछ दिन मिले उसके लिए मजदूरी — आप उन्हीं दिनों का पाते हैं जिन दिन काम किया। एक व्यक्ति के लिए एक बार प्रयुक्त कौशल के लिए शुल्क। और वस्तु के रूप में भुगतान वहाँ सुविधाजनक है जहाँ उपज प्रचुर हो और नकद कम — इसीलिए यह खेती में आम है और इसीलिए साहिल “समान मूल्य” के आम लेकर घर जाता है। अपना काम करने वाले को सबसे अंत में, बची हुई राशि से भुगतान मिलता है — वही लाभ है।
सावधान — परीक्षा का प्रिय भ्रम: वेतन नियत होता है और सामान्यत: मासिक; मजदूरी एक विशिष्ट समय अवधि — जैसे एक दिन या एक घंटे — के लिए होती है। हर माह की पहली तारीख को ₹12,000 पाने वाला दुकान का सहायक वेतन पाता है। जिस दिन आए उसी दिन शाम को ₹500 पाने वाला सहायक मजदूरी पाता है। दुकान एक ही, शब्द दो अलग।
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