प्राथमिक क्षेत्रक उन आर्थिक गतिविधियों का समूह है जिनमें लोग वस्तुओं के उत्पादन के लिए सीधे प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। पृष्ठ 196 इसे “उन गतिविधियों का समूह, जिसमें प्रकृति से सीधे कच्चे माल का निष्कर्षण शामिल होता है, जैसे – कृषि, मत्स्य पालन, वानिकी आदि” बताता है, और पाठ जोड़ता है कि इनमें “लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं।”
द्वितीयक = उसका रूप बदलकर नया उत्पाद बनाना
दोनों में अंतर:
| अंतर का आधार | प्राथमिक क्षेत्रक | द्वितीयक क्षेत्रक |
|---|---|---|
| 1. सामग्री का स्रोत | स्वयं प्रकृति — मिट्टी, जल, वन, खदान, पशुधन | प्राथमिक क्षेत्रक की उपज |
| 2. सामग्री के साथ क्या होता है | उसे उगाया, पकड़ा, पाला या निकाला जाता है। रूप नहीं बदलता | रूप बदलता है — प्रसंस्करण, विनिर्माण या जोड़कर नया उत्पाद बनता है |
| 3. उत्पाद का स्वरूप | कच्चा माल — गेहूँ, दूध, मछली, कपास, लकड़ी, लौह अयस्क | तैयार या अर्ध-तैयार वस्तुएँ — आटा, घी, कपड़ा, फर्नीचर, इस्पात; भवन, सड़क और उपयोगी सेवाएँ भी |
| 4. कार्यस्थल | खेत, वन, खदान, नदी, समुद्र, पशु-फार्म | मिल, कारखाना, कार्यशाला, उत्पादन इकाई, निर्माण स्थल |
| 5. निर्भरता | प्रकृति पर — वर्षा, मिट्टी, ऋतु तथा मछली या खनिज के भंडार पर | कच्चे माल के लिए प्राथमिक क्षेत्रक पर, तथा मशीनों और ऊर्जा पर |
| 6. मूल्य | उपज का मूल्य अपने आप में अपेक्षाकृत कम होता है | मूल्य जुड़ता है — उत्पाद कच्चे माल की लागत से अधिक में बिकता है |
दो उदाहरण, जोड़े में, ताकि अंतर स्पष्ट दिखे:
- विदर्भ या गुजरात की काली मिट्टी में कपास उगाना प्राथमिक गतिविधि है — किसान पौधे से रेशा लेता है। कोयंबटूर की मिल में उसी कपास से सूत कातना और कपड़ा बुनना द्वितीयक गतिविधि है — कपास अब कुछ और बन चुकी है।
- छत्तीसगढ़ के बैलाडीला में लौह अयस्क का खनन प्राथमिक गतिविधि है — अयस्क धरती से निकाला जाता है। भिलाई संयंत्र में उसी अयस्क से इस्पात और फिर इस्पात से कार बनाना द्वितीयक गतिविधि है।