अन्वेषण अध्याय 7 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 7.15.1 और 7.15.2 में दिखाई गई गुप्तकालीन मूर्तियों को ध्यानपूर्वक देखिए। इनकी विशेषताओं को देखकर क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि वहाँ किन देवताओं को दर्शाया गया है? दिए गए स्थान पर अपने विचार लिखिए और चर्चा में अपने विचार साझा कीजिए।
उत्तर

भारतीय मूर्तिकला में देवता की पहचान उसके लक्षणों से होती है — वह क्या धारण किए है, क्या पहने है, किस वाहन पर खड़ा है। लक्षण पढ़िए, नाम अपने आप निकल आएँगे।

चित्र 7.15.1चित्र 7.15.2
क्या दिखता हैएक ऊँचा गोलाकार स्तंभ-रूप, जिसके सामने एक मुख उत्कीर्ण है; मोटी लटों वाली ऊपर बँधी जटाएँ; जटाओं में अर्धचंद्र; भौंहों के बीच एक चिह्न; भारी कुंडल और मणियों का हारएक चतुर्भुज खड़ी पुरुष-प्रतिमा; ऊँचा अलंकृत मुकुट; सिर के पीछे बड़ा सजा हुआ प्रभामंडल; लंबी माला और हार; एक निचले हाथ में शंख
निर्णायक लक्षणजटाओं में अर्धचंद्र और तीसरे नेत्र का चिह्न — तथा स्वयं स्तंभ-रूप, जो लिंग हैशंख सहित चार भुजाएँ, किरीट मुकुट और अलंकृत प्रभामंडल
देवताशिव — यह एक मुख-लिंग है, अर्थात वह लिंग जिससे देवता का मुख प्रकट होता हैविष्णु
यह पहचान क्यों सुरक्षित है: अर्धचंद्र और जटाएँ केवल शिव की पहचान हैं — वे चंद्रशेखर कहलाते हैं, ‘जिनके केशों में चंद्रमा है’। शंख विष्णु के चार आयुधों (शंख, चक्र, गदा, पद्म) में से एक है, और ऊँचे मुकुट व विशाल प्रभामंडल के साथ बहुभुजी देवता की प्रतिमा गुप्तकालीन विष्णु का प्रचलित रूप है। अध्याय स्वयं दो स्वतंत्र पुष्टियाँ देता है — गुप्त शासक विष्णु के परम भक्त थे (पृष्ठ 156), और उदयगिरि की गुफाएँ हिंदू देवी-देवताओं, विशेषकर विष्णु की प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

चित्र 7.15.3 (तीसरा चित्र) भी देखिए — इसका परिचय शीर्षक में ही दे दिया गया है। अहिच्छत्र (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) से मिली दो मृण्मूर्तियाँ भारत की पवित्र नदियों को दर्शाती हैं, और यहाँ भी पहचान वाहन से होती है —

  • गंगा मकर पर खड़ी हैं — मगरमच्छ जैसा एक पौराणिक जीव।
  • यमुना कच्छप (कछुए) पर खड़ी हैं।
  • दोनों के सिर के ऊपर से जल प्रवाहित हो रहा है और हाथ में घट है — दोनों ही उनके नदी-रूप के स्मारक हैं।
यह कीजिए: अपनी अभ्यास-पुस्तिका में दो स्तंभों की सूची बनाइए — लक्षण और देवता। अर्धचंद्र व जटाएँ → शिव। शंख, चक्र, वनमाला → विष्णु। मकर → गंगा। कच्छप → यमुना। गरुड़ → विष्णु (अध्याय बताता है कि चंद्रगुप्त द्वितीय के अभिलेखों पर गरुड़ मिलता है)। यह सूची याद हो जाए तो आप किसी भी संग्रहालय में नाम-पट्टिका पढ़े बिना मूर्तियाँ पहचान सकेंगे।
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