आप पर्दे पर क्या देखते हैं? क्या आप कुछ आश्चर्यजनक देखते हैं?
उत्तर
पर्दे पर मोमबत्ती की लौ का एक छोटा, हल्का प्रतिबिंब दिखाई देता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि यह प्रतिबिंब उल्टा अर्थात व्युत्क्रमित बनता है। प्रतिबिंब में लौ की नोक नीचे की ओर होती है।
लौ के ऊपरी सिरे से चला प्रकाश सूचीछिद्र से होकर नीचे की ओर जाता है और निचले सिरे से चला प्रकाश ऊपर की ओर। किरणें छिद्र पर एक-दूसरे को काटती हैं, अत: प्रतिबिंब उल्टा बनता है।
ऐसा क्यों होता है: प्रकाश सरल रेखा में चलता है और पर्दे तक केवल वही किरणें पहुँचती हैं जो सूचीछिद्र से होकर जाती हैं। लौ के ऊपरी सिरे से आई सीधी किरण छिद्र के बाद नीचे की ओर ही जा सकती है और निचले सिरे से आई किरण ऊपर की ओर। दोनों किरणें सूचीछिद्र पर एक-दूसरे को काट देती हैं, इसलिए ऊपर-नीचे बदल जाता है और प्रतिबिंब उल्टा बनता है।
संकेत: छिद्र छोटा करने पर प्रतिबिंब अधिक स्पष्ट परंतु मंद हो जाता है; बड़ा करने पर अधिक चमकीला परंतु धुंधला।
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