अन्वेषण अध्याय 7 प्रश्न और क्रियाकलाप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उत्पादन के कारक एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं? पाठगत अभ्यास में उत्पादन के कारकों को वर्गीकृत करने में आपने किन-किन कठिनाइयों का सामना किया?
उत्तर

वे इसमें भिन्न हैं कि वे आते कहाँ से हैं, उन्हें देता कौन है, उनका भुगतान क्या है, और क्या उन्हें बढ़ाया जा सकता है। इन्हीं चार आधारों पर तुलना करने से यह वर्गीकरण नामों की सूची न रहकर उपयोगी बन जाता है।

आधारभूमिश्रमपूँजीउद्यमिता
उत्पत्तिप्रकृति की देन — मृदा, वन, जल, वायु, सूर्य का प्रकाश, खनिज, तेल, प्राकृतिक गैसमनुष्य, शारीरिक और मानसिक योगदान के रूप मेंमानव निर्मित; स्वयं पहले उत्पादित, फिर उत्पादन में प्रयुक्तव्यक्ति का विचार, विवेक और जोखिम उठाने की तत्परता
क्या इसे बढ़ाया जा सकता है?नहीं — इसकी कुल मात्रा सीमित है और यह क्षरित हो सकती हैहाँ, और शिक्षा, प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य से इसकी गुणवत्ता भीहाँ — बचत और निवेश सेदुर्लभ; इसे प्रोत्साहित किया जा सकता है, बनाया नहीं
गतिशीलताअचल — भूखंड, खान या नदी हटाई नहीं जा सकतीगतिशील, किंतु लोग अनिच्छा से ही स्थान बदलते हैंधन तत्काल जाता है; मशीन लागत सहितगतिशील — उद्यमी वहीं जाता है जहाँ अवसर हो
पुस्तक के अनुसार भुगतानकिराया, यदि खरीदी न गई होश्रम का उचित पारिश्रमिकऋणदाता को ब्याज; शेयरधारकों को लाभांशजो शेष बचे — लाभ, और उसकी कोई गारंटी नहीं
जोखिमकिराया मिल जाए तो स्वामी पर कोई नहींबहुत कम — वस्तु बिके या न बिके, पारिश्रमिक देय हैब्याज हर स्थिति में देयपूरा। उद्यमी को सबसे अंत में मिलता है, या नहीं मिलता

वर्गीकरण की कठिनाइयाँ — और ये वास्तविक हैं।

  • सीमा पर बैठे इनपुट्स। विद्युत भूमि है या पूँजी? उसे मनुष्य बनाता है, किंतु कोयले, जल या सूर्य से। भंडारण का स्थान भूमि है या पूँजी? भूखंड भूमि है, उस पर बना भवन पूँजी, और किराया एक ही दोनों के लिए।
  • पहले से संसाधित कच्चा माल। ताजा उत्पाद आरंभ में भूमि था, किंतु भोजनालय तक पहुँची सब्जियों की टोकरी में श्रम, वाहन और ईंधन भी सम्मिलित हो चुके हैं। पीछे कहाँ तक जाएँ?
  • श्रम या मानव पूँजी? प्रतिवेदन में इनपुट के रूप में “मोबाइल के अवयवों का ज्ञान एवं कौशल” लिखा है। यह श्रम का परिश्रम नहीं, उसके पीछे की मानव पूँजी है। पुस्तक दोनों को अलग रखती है, किंतु हमारी तालिका में उसका कोई स्तंभ नहीं था।
  • एक ही व्यक्ति तीन भूमिकाओं में। छोटी किराने की दुकान का स्वामी पूँजी भी देता है, श्रम भी करता है और उद्यमी भी है। बड़ी कंपनी में ये तीन अलग-अलग समूह होते हैं, इसीलिए वहाँ वर्गीकरण साफ दिखता है।
  • धन स्वयं पूँजी नहीं है। बैंक में पड़ा धन कुछ उत्पादित नहीं करता; वह तभी पूँजी बनता है जब उपकरण, माल या दुकान में बदल जाए।
यह कठिनाई दोष क्यों नहीं है: ये श्रेणियाँ भुगतान और आपूर्ति के विषय में सोचने के औजार हैं, प्रकृति के खाने नहीं। जब भी कोई वस्तु रखने में कठिनाई हो, यह पूछिए कि आप किस प्रश्न का उत्तर खोज रहे हैं। यदि जानना है कि किसे भुगतान करना है, तो विद्युत को उस आपूर्तिकर्ता के साथ रखिए जो बिल भेजता है। यदि जानना है कि प्रकृति का योगदान क्या है, तो उसे कोयले तक ले जाइए। दोनों उत्तर अपने-अपने प्रश्न के लिए सही हैं।
प्र2.
मानव पूँजी, भौतिक पूँजी से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर

भौतिक पूँजी मशीन है; मानव पूँजी उसे भली-भाँति चलाने की क्षमता। अध्याय पूँजी को कोई भी भौतिक या वित्तीय संपत्ति कहता है जो वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन में प्रयुक्त होती है, और मानव पूँजी को वे विशिष्ट कौशल, ज्ञान, क्षमताएँ और विशेषज्ञता जो श्रम करने के लिए आवश्यक होती हैं — अर्थात उस श्रम की गुणवत्ता और दक्षता।

अंतर का आधारभौतिक पूँजीमानव पूँजी
यह है क्यामशीनें, औजार, उपकरण, वाहन, वेंडिंग कार्ट्स, कंप्यूटर, दुकानें, कारखाने, कार्यालय भवन — और वह धन जिससे ये खरीदे जाते हैंव्यक्ति में निहित कौशल, ज्ञान, क्षमताएँ, विशेषज्ञता, अनुभव और स्वास्थ्य
यह रहती कहाँ हैव्यक्ति के बाहर; इसे देखा, तौला और चित्रित किया जा सकता हैव्यक्ति के भीतर; केवल कार्य की गुणवत्ता में दिखाई देती है
यह बनती कैसे हैबचत करके खरीदने से — एक दिन में पूरा हो जाने वाला सौदाशिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी के उपयोग और सामाजिक परिवेश से — वर्षों में, और इसे बनी-बनाई खरीदा नहीं जा सकता
क्या इसे बेचा या हस्तांतरित किया जा सकता है?हाँ — मशीन बेच दीजिए, वह किसी और की हो जाएगीनहीं। इसे सिखाया जा सकता है, किंतु सिखाने से शिक्षक की अपनी कम नहीं होती। इसे धारक से अलग नहीं किया जा सकता
उपयोग से क्या होता हैवह घिसती है; प्रति वर्ष उसका मूल्य घटता हैअभ्यास से प्रायः बढ़ती है, और अनुपयोग, रोग या मृत्यु से ही समाप्त होती है
इसे मुख्यतः कौन बनाता हैफर्म, अपने धन या ऋण सेपरिवार, विद्यालय, स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज — साथ ही फर्म, कार्यस्थल पर प्रशिक्षण देकर
यह अंतर नीति क्यों तय करता है: अधिक भौतिक पूँजी चाहिए तो बचत और ऋण चाहिए। अधिक मानव पूँजी चाहिए तो विद्यालय, शिक्षक, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और प्रशिक्षण संस्थान चाहिए — और प्रतिफल के लिए एक पीढ़ी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसीलिए अध्याय भारत के जनांकिकीय लाभांश को कारखानों से नहीं, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण एवं कौशल प्रशिक्षण” से जोड़ता है। कोई देश मशीनें आयात कर सकता है; अपने लोगों का कौशल आयात नहीं कर सकता।
यदि समय कम हो तो एक पंक्ति में: भौतिक पूँजी उत्पादन में प्रयुक्त मानव निर्मित वस्तुएँ हैं; मानव पूँजी उन वस्तुओं को चलाने वाले लोगों के भीतर का ज्ञान, कौशल और स्वास्थ्य है — और स्वयं बढ़ने की क्षमता केवल दूसरी में है।
प्र3.
प्रौद्योगिकी व्यक्ति के कौशल और ज्ञान के विकास को किस प्रकार परिवर्तित कर रही है, आप इस विषय में क्या सोचते हैं?
उत्तर

इसका सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि इसने सीखने से भूगोल हटा दिया है। अध्याय यही कहता है : प्रौद्योगिकी ने भौगोलिक सीमाओं की बाध्यता को समाप्त कर लोगों को भारत तथा विदेशों में ज्ञान, कौशल-विकास और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं

क्या बदलाअध्याय का प्रमाण
कहाँ सीख सकते हैंविद्यार्थी किसी भी स्थान से सीख सकते हैं। जिस गाँव में महाविद्यालय नहीं, वह भी अब कटा हुआ नहीं
कब सीख सकते हैंविद्यार्थी नौकरी करते हुए या अन्य पाठ्यक्रम पढ़ते हुए भी अपनी गति से सीख सकते हैं — अर्थात कार्यरत वयस्क आय छोड़े बिना पुनः प्रशिक्षण ले सकता है
क्या सीख सकते हैंस्वयं (SWAYAM) मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज पर चलता है और कक्षा 9 से आगे रोबोटिक्स, जल-कृषि और वस्त्र-मुद्रण जैसे विषय देता है — ऐसे विषय जिनके शिक्षक अधिकांश विद्यालयों में हो ही नहीं सकते
कितना खर्चये पाठ्यक्रम निःशुल्क हैं, इसलिए यह बात तय करना बंद हो जाती है कि किसके पास शुल्क देने का सामर्थ्य है
कौशल के साथ काम मिलनासरकार का नेशनल करियर सर्विस पोर्टल प्लंबिंग से लेखांकन तक विविध क्षेत्रों में अवसर दिखाता है — सीखना और नियुक्ति जुड़ जाते हैं

और यह केवल पहुँच नहीं, कौशल की विषय-वस्तु भी बदलती है। किसान को अब मौसम की चेतावनी पढ़नी आनी चाहिए; परिवहन वाले को जी.पी.एस.; दुकानदार को यू.पी.आई.; शल्य चिकित्सक रोबोट्स के साथ काम करता है (चित्र 7.19) और छिड़काव करने वाला ड्रोन उड़ाता है (चित्र 7.18)। जो कौशल पूर्णतः हस्तकौशल थे, उन पर अब एक डिजिटल परत चढ़ गई है।

सीमाओं के विषय में ईमानदार रहिए। ऑनलाइन पहुँच के लिए उपकरण, विद्युत और संयोजकता चाहिए, जो हर घर में नहीं — इसलिए प्रौद्योगिकी अंतर पाट भी सकती है और बढ़ा भी सकती है। और कुछ कौशल पर्दे पर नहीं सीखे जा सकते : वेल्डर को कुछ धातु जलानी ही पड़ती है, रसोइए को कुछ व्यंजन बिगाड़ने ही पड़ते हैं, और अध्याय की अपनी प्रशिक्षण की परिभाषा व्यावहारिक है — निर्माण स्थलों का अवलोकन, सामग्री परीक्षण, सुरक्षा प्रक्रियाओं को समझना। सबसे अच्छा ढंग वही है जो सिविल इंजीनियरिंग वाले उदाहरण में है : सिद्धांत ऑनलाइन या कक्षा में सीखिए, फिर उन्हें वास्तविक कार्यस्थल पर करके देखिए।
प्र4.
कौशल वह है जिसे आप अभ्यास से सीखते और उसमें निपुण होते हैं। यह किसी भी कार्य, जैसे— खेल खेलना, रचनात्मक लेखन करना, गणित की समस्याएँ हल करना, भोजन बनाना आदि के प्रभावी निष्पादन में आपकी सहायता करता है। यहाँ तक कि लोगों से उचित संवाद स्थापित करना भी एक कौशल है। यदि आज आपको कोई एक कौशल सीखने का अवसर मिले तो आप कौन-सा कौशल सीखना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर

इसका उत्तर आपका अपना है — किंतु अच्छा उत्तर एक नहीं, तीन काम करता है : कौशल का ठीक-ठीक नाम लेता है, किसी वास्तविक परिस्थिति से जुड़ा कारण देता है, और यह भी बताता है कि आप उसका अभ्यास कैसे करेंगे — क्योंकि अध्याय कौशल को अभ्यास और प्रशिक्षण से आने वाली क्षमता कहता है। “मुझे कोडिंग सीखनी है” जैसा अस्पष्ट उत्तर दुर्बल है; “मैं ऐसा एक कार्यक्रम लिखना चाहता हूँ जो मेरी एक वास्तविक समस्या हल कर दे” सशक्त है।

अच्छे उत्तर का अंगस्वयं से पूछिए
नाम ठीक-ठीक लीजिए“संगीत” नहीं, “तबला बजाना”; “अच्छा बोलना” नहीं, “कक्षा के सामने बिना पर्ची के तीन मिनट बोलना”
यही क्योंआज आप क्या नहीं कर पाते जो इससे कर पाएँगे? इससे और किसे लाभ होगा?
सीखेंगे कैसेकौन सिखा सकता है — कोई बुजुर्ग, शिक्षक, पड़ोसी, या स्वयं (SWAYAM) का निःशुल्क पाठ्यक्रम? सप्ताह में कितना अभ्यास?
सफलता कैसे जानेंगेऐसी एक परीक्षा जो आप छह महीने में सचमुच पास कर सकें
नमूना उत्तर: “मैं बिना पर्ची देखे सबके सामने बोलना सीखना चाहूँगा। हमारे विद्यालय में हर समूह-परियोजना के अंत में प्रस्तुति होती है, और मुझे विषय आता है, फिर भी खड़े होते ही शब्द नहीं निकलते — अर्थात मेरा ज्ञान अपने वास्तविक मूल्य से कम रह जाता है। यह प्रतिभा नहीं, कौशल है : यह अभ्यास और प्रशिक्षण से सुधरता है, ठीक जैसा अध्याय कहता है। मैं प्रतिदिन दस मिनट ऊँचे स्वर में पढ़ूँगा, फिर सप्ताह में एक बार परिवार के सामने अपनी पढ़ी हुई किसी बात पर दो मिनट बोलूँगा, और महीने में एक बार प्रार्थना-सभा में स्वेच्छा से बोलूँगा। मेरी परीक्षा यह होगी कि अगली समूह-परियोजना मैं अकेले, तीन मिनट, बिना कागज पकड़े प्रस्तुत करूँ। मैंने इसे किसी तकनीकी कौशल पर इसलिए चुना कि यह आगे सीखे जाने वाले हर कौशल का मूल्य बढ़ा देता है — जो अभियंता अपना डिजाइन समझा न सके, उसे किसी और के समझाने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।”
आपके चुनाव के पीछे का अर्थशास्त्र: आप जो भी चुनें, आप मानव पूँजी बना रहे हैं — और मानव पूँजी वह अकेली पूँजी है जिसे कोई आपसे ले नहीं सकता। इसमें एक विशेषता और है जो भौतिक पूँजी में नहीं : यह उपयोग से बढ़ती है। प्रतिदिन चलने वाली मशीन घिसती है; प्रतिदिन प्रयोग होने वाला कौशल और पैना होता है।
प्र5.
क्या आप मानते हैं कि उद्यमिता उत्पादन की ‘प्रेरक शक्ति’ है? क्यों या क्यों नहीं?
उत्तर

हाँ — इस विशेष अर्थ में कि उद्यमिता ही शेष तीन कारकों को गति देती है; किंतु नहीं, यदि ‘प्रेरक शक्ति’ का अर्थ यह लिया जाए कि वह अकेले कुछ उत्पादित कर सकती है। पहले अपनी स्थिति बताइए, फिर दोनों पक्ष रखिए।

इसे प्रेरक शक्ति कहने के पक्ष में। भूमि, श्रम और पूँजी तीनों निष्क्रिय हैं। भूखंड खाली पड़ा रहता है, मशीन बेकार खड़ी रहती है और कुशल श्रमिक बेरोजगार बैठा रहता है, जब तक कोई यह तय न करे कि बनाना क्या है और उसका उत्तरदायित्व न ले। चित्र 7.16 बताता है कि वह ‘कोई’ क्या करता है, और उसकी हर बात पहल का कार्य है —

  • समस्या की पहचान कर उसके नए समाधान प्रस्तुत करता है — जब तक आवश्यकता दिखे नहीं, कुछ उत्पादित नहीं होता।
  • समय और धन का निवेश कर जोखिम उठाता है — शेष तीनों कारकों को भुगतान वस्तु बिके या न बिके मिलता है; केवल उद्यमी को नहीं।
  • उत्पादन के विभिन्न कारकों को संयोजित करता है — यही वस्तुतः उत्पादन का आरंभ है।
  • व्यापार संचालन और कार्य प्रणाली से संबंधित प्रमुख निर्णय लेता है।
  • नवाचार के माध्यम से समाज के कल्याण में योगदान देता है, रोजगार सृजित करता है और आजीविकाओं को सहारा देता है।

रत्ना छोटा उदाहरण है, जे.आर.डी. टाटा बड़ा : 1932 में भारत के पास पायलट, पूँजी और भूमि सब थे, किंतु हवाई सेवा तब तक नहीं थी जब तक एक व्यक्ति ने उसे आरंभ करने का निश्चय नहीं किया।

इसे बढ़ा-चढ़ाकर न कहने के पक्ष में। पूँजी के बिना उद्यमी मशीन नहीं खरीद सकता, कुशल श्रम के बिना उसे चला नहीं सकता, और भूमि या कच्चे माल के बिना उसके पास काम करने को कुछ नहीं — अर्थात उद्यमिता उत्पादन को संगठित करती है, उत्पन्न नहीं करती। उत्पादन निजी उद्यमी के बिना भी होता है : सरकारी विभाग, दुग्ध संघ जैसी सहकारी संस्थाएँ और पारिवारिक खेत भी कारकों को जोड़ते हैं। और उद्यमी के निर्णय मूल्य बना भी सकते हैं और नष्ट भी कर सकते हैं, इसीलिए अध्याय उद्यमी वाले भाग के बाद उत्तरदायित्वों वाला भाग रखता है।

दोनों बातें एक साथ कहने का सटीक ढंग: उद्यमिता आरंभ करने और संगठित करने वाला कारक है — जो तय करती है कि क्या बनेगा, प्रत्येक अन्य कारक कितना लगेगा, और असफल होने पर हानि कौन उठाएगा। उसे प्रेरक शक्ति कहना उचित है। उसे पूरा इंजन कहना नहीं, क्योंकि अध्याय की अपनी उपमा पहेली के टुकड़ों की है, और पहेली में कोई एक टुकड़ा पूरा चित्र नहीं होता।
प्र6.
क्या प्रौद्योगिकी अन्य कारकों, जैसे श्रम को प्रतिस्थापित कर सकती है? यह अच्छा है या बुरा? अपने उत्तर की पुष्टि उदाहरण की सहायता से करें।
उत्तर

हाँ, प्रौद्योगिकी श्रम को प्रतिस्थापित कर सकती है — किंतु वह व्यक्तियों से अधिक कार्यों को प्रतिस्थापित करती है, और यह अच्छा है या बुरा, यह पूरी तरह इस पर निर्भर है कि विस्थापित श्रमिकों को पुनः प्रशिक्षित किया जाता है या नहीं।

पुस्तक का अपना उदाहरण: कृषि कार्य में मशीनों का बढ़ता उपयोग श्रम पर निर्भरता को कम कर सकता है। ट्रैक्टर और थ्रेशर एक दिन में वह कर देते हैं जो एक दर्जन श्रमिक सप्ताह भर में करते थे। इसके साथ अध्याय के अन्य उदाहरण भी लीजिए — डाक के स्थान पर ई-मेल, हाथ से छिड़काव के स्थान पर ड्रोन, और शल्य चिकित्सा में सहायता करते रोबोट्स।

अच्छाबुरा
समान या कम इनपुट्स से अधिक उत्पादन — अध्याय प्रौद्योगिकी की भूमिका इसी रूप में बताता हैजिस श्रमिक का कार्य मशीन ले लेती है, उसकी आजीविका जाती है, और सबसे पहले सबसे कम कुशल पर मार पड़ती है
खतरनाक, दोहरावपूर्ण और कमरतोड़ काम मनुष्य से हट जाता है — हाथ से रसायन छिड़कना सचमुच हानिकारक हैआयु में बड़े श्रमिक पुनः प्रशिक्षण नहीं ले पाते; एक गाँव एक ही ऋतु में अपनी मुख्य मजदूरी खो सकता है
लागत कम और गुणवत्ता बेहतर, इसलिए वस्तु अधिक लोगों तक पहुँचती हैलाभ मुख्यतः मशीन के स्वामी को जाता है, इसलिए असमानता बढ़ सकती है
नए प्रकार के कार्य बनते हैं — ड्रोन संचालक, सॉफ्टवेयर एवं गुणवत्ता अभियंता, ऑनलाइन पाठ्यक्रम बनाने वाले, मशीन ठीक करने वालेनए कार्यों के लिए प्रायः वे कौशल चाहिए जो विस्थापित श्रमिकों के पास नहीं, और वे कार्य दूसरे स्थानों पर होते हैं

और प्रतिस्थापन ही पूरी कहानी नहीं है। अध्याय एक उल्टा उदाहरण भी देता है : त्रिआयामी मुद्रण (3-डी प्रिंटिंग) बड़े पैमाने पर हथकरघा उत्पाद तैयार करके वस्त्र क्षेत्र की लुप्त होती कला-शैलियों को पुनर्जीवित कर सकती है। यहाँ प्रौद्योगिकी किसी शिल्प को मारने के बजाय उसे बाजार लौटा देती है। वह यह भी स्मरण कराता है कि चरखी और ठेलागाड़ी आज भी उपयोग में हैं — प्रौद्योगिकी सब कुछ बहा नहीं ले जाती।

निर्णय, संतुलित रूप में: प्रौद्योगिकी से उत्पादन बढ़ना अच्छा है; किसी श्रमिक का बिना किसी मार्ग के बाहर हो जाना बुरा है। ये दोनों एक ही घटना नहीं हैं, और समाज इन्हें अलग कर सकता है। इसीलिए अध्याय कौशल-विकास और प्रशिक्षण को व्यवसाय का उत्तरदायित्व बताता है — “जिससे श्रमिकों को ऐसे कौशल प्राप्त हो सकें जो उन्हें श्रम बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखें” — और इसीलिए स्वयं (SWAYAM) जैसे निःशुल्क मंच महत्वपूर्ण हैं। प्रश्न यह नहीं कि मशीन आने दी जाए या नहीं, अपितु यह कि जिस व्यक्ति का काम गया उसे कहीं और खड़े होने में सहायता मिली या नहीं।
प्र7.
शिक्षा और कौशल-प्रशिक्षण मानव पूँजी को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? क्या वे एक-दूसरे को प्रतिस्थापित करते हैं या एक-दूसरे के पूरक हैं?
उत्तर

दोनों मानव पूँजी बढ़ाते हैं, और वे एक-दूसरे के पूरक हैं, प्रतिस्थापक नहीं। कोई भी दूसरे का काम नहीं कर सकता।

शिक्षाकौशल-प्रशिक्षण
पुस्तक के अनुसार यह है क्याज्ञान प्राप्त करने में सहायता करती है; यह प्रक्रिया मूलभूत साक्षरता से आरंभ होकर विशिष्ट क्षेत्रों में निपुणता तक पहुँचती हैकिसी विशेष कार्य या गतिविधि के लिए आवश्यक कौशल को सीखने की प्रक्रिया
यह क्या देती हैक्यों — सिद्धांत, तर्क, और उन समस्याओं को हल करने की क्षमता जो पहले कभी मिली नहींकैसे — हाथ, विवेक, गति और सुरक्षा की आदतें
यह होती कहाँ हैविद्यालय, महाविद्यालय; विद्यालय में सीखा हुआ ज्ञान को समृद्ध करता हैनिर्माण स्थल पर, कार्यशाला में, रसोई में; व्यावहारिक अनुभव द्वारा

अध्याय का अपना उदाहरण इस प्रश्न को सुलझा देता है। सिविल इंजीनियरिंग का विद्यार्थी डिजाइन और निर्माण सामग्री के सिद्धांत सीखता है — यह शिक्षा है। इन्हीं सिद्धांतों का उपयोग सड़क और पुल जैसी आधारभूत संरचना बनाने में होता है, और चुनौती एक दीर्घकालिक, कम लागत वाले और पर्यावरण के अनुकूल समाधान की होती है। पुस्तक कहती है कि यह चुनौती प्रशिक्षण द्वारा प्राप्त की जाती है — निर्माण स्थलों के अवलोकन, सामग्री परीक्षण, सुरक्षा प्रक्रियाओं को समझने एवं व्यावहारिक अनुभव से। शिक्षा और प्रशिक्षण, दोनों से ही व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट बन पाता है।

दोनों दिशाओं में प्रतिस्थापन क्यों विफल है: प्रशिक्षण के बिना शिक्षा ऐसा व्यक्ति देती है जो बीम पर पड़ने वाला भार तो निकाल सकता है, किंतु उसने कभी कंक्रीट ढलते नहीं देखा — वह स्थल पर खराब मिश्रण नहीं पहचान पाएगा। शिक्षा के बिना प्रशिक्षण ऐसा व्यक्ति देता है जो ठीक वही काम कर सकता है जो उसे दिखाया गया, और डिजाइन, सामग्री या मशीन बदलते ही अटक जाता है। पहला कर नहीं पाता, दूसरा बदल नहीं पाता। और चूँकि पुरानी प्रौद्योगिकी को नई प्रतिस्थापित करती रहती है, दूसरे का कौशल अल्पजीवी होता है — यही सबसे व्यावहारिक तर्क है कि पुनः प्रशिक्षण को संभव शिक्षा ही बनाती है।
तीसरे साथी को न भूलिए: अध्याय इनके साथ स्वास्थ्य को भी गिनाता है। शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवा मिलकर मानव पूँजी के सहयोगी कारक हैं, और जो व्यक्ति अस्वस्थ है वह शेष दोनों का पूरा उपयोग नहीं कर सकता।
प्र8.
कल्पना कीजिए कि आप एक व्यवसाय आरंभ करना चाहते हैं जो स्टील की पानी की बोतलों का उत्पादन करेगा। आपको किस प्रकार के इनपुट्स की आवश्यकता होगी? आप उन्हें कैसे प्राप्त करेंगे? यदि कोई एक कारक उपलब्ध न हो तो आपके व्यवसाय के संचालन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर

चारों कारकों पर क्रम से चलिए, फिर बताइए कि प्रत्येक कहाँ से आएगा।

कारकइस व्यवसाय को क्या चाहिएमैं इसे कैसे प्राप्त करूँगा
भूमिलगभग 500–1,000 वर्ग मीटर का शेड; विश्वसनीय विद्युत संयोजन; धुलाई और शीतलन के लिए जल; और कच्चा माल — स्टेनलेस स्टील, जो लौह अयस्क और क्रोमियम से बनता हैभूमि खरीदने के बजाय निकटतम औद्योगिक क्षेत्र में इकाई किराए पर लूँगा — अध्याय की वही बात कि व्यवसायी भूमि खरीदते हैं अथवा किराए पर लेते हैं। स्टील शीट किसी रोलिंग मिल या वितरक से कुंडलियों में खरीदूँगा
श्रम एवं मानव पूँजीप्रेस संचालक, वेल्डर, पॉलिश करने वाले, ढक्कन और गैसकेट जोड़ने वाला, गुणवत्ता जाँचने वाला, एक डिजाइनर, एक पर्यवेक्षक, तथा विक्रय एवं लेखा के लिए एक व्यक्तिस्थानीय स्तर पर और सरकार के नेशनल करियर सर्विस से भर्ती; आई.टी.आई. प्रशिक्षित प्रेस एवं वेल्डिंग कर्मी; शेष को कार्यस्थल पर प्रशिक्षण, क्योंकि “कौशल-विकास और प्रशिक्षण” नियोक्ता के रूप में मेरा उत्तरदायित्व है
पूँजीडीप-ड्रॉइंग प्रेस, शियरिंग मशीन, खराद, वेल्डिंग सेट, बफिंग एवं पॉलिशिंग मशीनें, निर्वात-ऊष्मारोधन एवं रिसाव परीक्षण उपकरण, छपाई या लेजर अंकन मशीन, पैकिंग टेबल, वितरण का वाहन — और कच्चे माल, वेतन तथा बिना बिके माल के लिए कार्यशील पूँजीपहले व्यक्तिगत बचत और परिवार, फिर कमी के लिए बैंक ऋण, जिसे एक अवधि में ब्याज सहित चुकाऊँगा — ठीक वही मार्ग जो रत्ना ने अपनाया
उद्यमिताबोतल बनाने का निर्णय, डिजाइन और मूल्य, जोखिम, और व्यवसाय के दैनिक निर्णययह मेरा अपना है। मैं समस्या पहचानता हूँ — सस्ती प्लास्टिक बोतलें जो रिसती हैं और फेंक दी जाती हैं — और शेष तीन कारकों को जोड़कर उसका समाधान करता हूँ
प्रौद्योगिकीदोहरी दीवार वाली बोतल के लिए डीप-ड्रॉइंग और निर्वात-ऊष्मारोधन; लेजर अंकन; यू.पी.आई. आधारित भुगतान; एक वेबसाइटमशीनें खरीदूँगा; प्रक्रियाएँ आपूर्तिकर्ताओं और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों से सीखूँगा

यदि कोई एक कारक न हो। अध्याय का नियम है कि कारकों की अनुपस्थिति या दुरुपयोग पर उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है या उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है। इनमें से क्या होगा, यह इस पर निर्भर है कि कौन-सा कारक गया।

अनुपस्थित कारकक्या होगाअकुशल या ठप?
स्टील की आपूर्ति नहीं (भूमि)दबाने को कुछ नहीं। मशीनें और श्रमिक खाली बैठे रहते हैं, जबकि वेतन और ब्याज चलते रहते हैंठप
कुशल वेल्डर नहीं (श्रम)बोतलें जोड़ से रिसती हैं और अस्वीकृत होती हैं; या तो उत्पादन घटता है या अपव्यय बढ़ता हैअकुशल, और लंबा चला तो ठप
पूँजी नहीं (ऋण अस्वीकृत)प्रेस खरीदे ही नहीं जा सकते, या माल का भुगतान नहीं हो सकता; व्यवसाय आरंभ ही न होठप
विद्युत या जल नहींप्रेस और धुलाई रुक जाते हैं; जनरेटर लागत बहुत बढ़ा देता हैठप, या अत्यंत महँगा
उद्यमी नहींसब कुछ उपस्थित है और कोई निर्णय नहीं — न डिजाइन चुना गया, न आदेश दिया गया, न मूल्य तय हुआआरंभ ही नहीं होगा
निकालने योग्य निष्कर्ष: उत्पादन चारों कारकों का योग नहीं, गुणनफल है — यदि कोई एक शून्य हो, तो उत्तर शून्य है, चाहे शेष कितने ही बड़े हों। इसीलिए अध्याय इन्हें पहेली के टुकड़ों से जोड़ता है, और इसीलिए व्यवसाय-योजना में चारों का प्रबंध आरंभ करने से पहले करना पड़ता है, एक-एक करके नहीं।
प्र9.
किसी उद्यमी या संस्थापक का साक्षात्कार कीजिए और जानिए कि उन्हें व्यवसाय आरंभ करने की प्रेरणा कहाँ से प्राप्त हुई, उन्हें कौन-कौन से अवसर प्राप्त हुए और उन्हें किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आप समूहों में बँटकर एक प्रश्नावली बना सकते हैं और प्राप्त जानकारी को एक रिपोर्ट में साझा कर सकते हैं।
उत्तर

विधि। जोड़ी बनाकर काम कीजिए — एक पूछे, दूसरा लिखे, जिससे बातचीत रुके नहीं। ऐसा व्यक्ति चुनिए जिस तक पहुँच सकें : दुकानदार, दर्जी, फूड स्टॉल का स्वामी, छोटी कार्यशाला का मालिक, ट्यूशन केंद्र का संस्थापक। पहले अनुमति लीजिए, लगभग बीस मिनट लीजिए, और अंत में अपने नोट्स पढ़कर सुना दीजिए ताकि कुछ गलत दर्ज न हो।

अध्याय के अनुसार बनी प्रश्नावली। प्रश्न खुले रखिए और उन्हें कारकों के अनुसार समूहबद्ध कीजिए, जिससे आपकी रिपोर्ट लगभग स्वयं बन जाएगी —

  1. इससे पहले आप क्या करते थे, और अपना काम आरंभ करने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
  2. आपको ऐसी कौन-सी समस्या दिखी जिसे कोई ठीक से हल नहीं कर रहा था?
  3. यह स्थान क्यों चुना, और यह आपका अपना है या किराए का? (भूमि)
  4. आपके साथ कितने लोग काम करते हैं? उन्होंने यह काम कहाँ सीखा? क्या आप उन्हें प्रशिक्षित करते हैं? (श्रम एवं मानव पूँजी)
  5. सबसे पहले कौन-से उपकरण खरीदने पड़े और उनकी लगभग लागत कितनी थी? (पूँजी)
  6. धन कहाँ से आया — बचत, परिवार, बैंक ऋण? ऋण मिलना कठिन था? (पूँजी)
  7. सबसे कठिन वर्ष कौन-सा था और किस बात ने लगभग रोक ही दिया था?
  8. क्या किसी नई प्रौद्योगिकी ने आपका काम बदला — यू.पी.आई., कोई डिलीवरी ऐप, कोई नई मशीन?
  9. आप अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग क्या करते हैं?
  10. यदि सरकार का कोई एक नियम सरल हो जाए तो आपको सबसे अधिक सहायता किससे मिलेगी?
  11. जो विद्यार्थी अपना कुछ आरंभ करना चाहता है, उससे आप क्या कहेंगे?

रिपोर्ट का ढाँचा — एक पृष्ठ पर्याप्त है : हमने किसका साक्षात्कार लिया और व्यवसाय क्या है · प्रेरणा · चारों कारक, एक-एक छोटा अनुच्छेद · उन्हें दिखे अवसर · उनकी चुनौतियाँ · हमने क्या सीखा। एक चित्र या रेखाचित्र और एक आँकड़ा अवश्य जोड़िए।

नमूना नोट्स: “हमने श्रीमती सुनीता देवी से बात की, जो अपने स्वयं-सहायता समूह की चार महिलाओं के साथ अचार बनाने की इकाई चलाती हैं। प्रेरणा: वे पहले से ही रिश्तेदारों के लिए अचार बनाती थीं और उन्हें लगा कि इसे बेचा जा सकता है; वे ऐसा काम भी चाहती थीं जो घर के पास हो। भूमि: अपने घर के दो कमरे, और अगले गाँव के किसानों से खरीदे आम एवं मिर्च। श्रम: चार महिलाएँ, सभी उन्हीं की सिखाई हुई; उनके अनुसार सबसे कठिन बात यह सिखाना है कि तेल कब पर्याप्त गरम हुआ। पूँजी: आरंभ में ₹40,000 — स्टील के बड़े बर्तन, मर्तबान और सीलिंग मशीन — जिसमें आधा बचत से और आधा स्वयं-सहायता समूह से आया। अवसर: पास के राजमार्ग के ढाबों को एक स्थिर स्थानीय आपूर्तिकर्ता चाहिए था। चुनौतियाँ: हर खेप में एक-सी गुणवत्ता रखना, और एफ.एस.एस.ए.आई. लाइसेंस की कागजी प्रक्रिया, जिसमें चार महीने लगे। हमने क्या सीखा: उन्होंने कहा कि व्यवसाय तभी स्थिर हुआ जब उन्होंने मूल्य पर प्रतिस्पर्धा छोड़कर हर मर्तबान पर तिथि छापनी आरंभ की — ढाबे सस्तापन नहीं, गुणवत्ता खरीद रहे थे।”
कक्षा में नोट्स मिलाते समय क्या देखिए: लगभग हर उद्यमी धन और कुशल श्रमिक — इन्हीं दो को सबसे बड़ी बाधा बताएगा, जो पूँजी और मानव पूँजी के विषय में अध्याय का दावा है, किंतु अब वह आपकी अपनी कक्षा द्वारा निकाला गया निष्कर्ष होगा, पुस्तक से पढ़ा हुआ वाक्य नहीं।
प्र10.
अर्थशास्त्री की भाँति विचार करें। आइए पता लगाएँ कि क्या होता है जब परिस्थितियाँ परिवर्तित होती हैं। यदि आप रत्ना होते तो, निम्नलिखित परिस्थितियों में क्या करते? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें। क. मान लीजिए कि आपके कार्यस्थल का किराया अचानक दोगुना हो जाता है। क्या आप लागत की भरपाई के लिए परोसे जाने वाले भोजन की कीमत बढ़ाएँगे? क्या आप सस्ते स्थान की खोज करेंगे? यह आपके व्यवसाय को किस प्रकार प्रभावित करेगा? ख. कल्पना कीजिए कि आपका एक कर्मचारी अचानक काम छोड़ देता है। क्या शेष कर्मचारी उतना ही काम संभाल सकते हैं? नए कर्मचारी को आकर्षित करने के लिए क्या आप अधिक वेतन देंगे? ग. आपको अपने भोजनालय में अच्छी तकनीकी एवं उपकरण लाने के लिए एक लघु ऋण प्राप्त होता है। क्या इससे उत्पादन में वृद्धि या गुणवत्ता में सुधार होगा? क्या आप इसकी सहायता से अधिक ग्राहकों तक पहुँच पाएँगे? घ. मान लीजिए कि आपके पड़ोस में एक नया भोजनालय खुल जाता है। आप ग्राहकों को आकर्षित करने और उन्हें अपना ग्राहक बनाए रखने के लिए क्या करेंगे? क्या आप अपनी सेवा में सुधार करेंगे, कीमत कम करेंगे या फिर कुछ नया उपलब्ध कराएँगे? ङ. व्यवसाय संचालन को अधिक सहज बनाने हेतु किन सरकारी नियमों में संशोधन किए जाने चाहिए?
उत्तर

प्रत्येक परिस्थिति को उत्पादन के किसी एक कारक में आए परिवर्तन के रूप में देखिए, और पूछिए कि उससे लागत, उत्पादन और ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा। ‘अर्थशास्त्री की भाँति विचार करना’ यहाँ यही है।

क. किराया दोगुना — भूमि की लागत में तीव्र वृद्धि।

मान लीजिए किराया ₹20,000 मासिक था और दोगुना होकर ₹40,000 हो गया।
अतिरिक्त लागत = ₹20,000 प्रतिमाह
यदि ‘पॉज पॉइंट’ प्रतिदिन लगभग 40 थालियाँ परोसता है → 40 × 30 = 1,200 थालियाँ मासिक
प्रति थाली अतिरिक्त लागत = 20,000 ÷ 1,200 ≈ ₹17
  • कीमत बढ़ाएँ? थोड़ी, और सावधानी से। ₹150 की थाली पर ₹17 लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि है। राजमार्ग के यात्री आगे बढ़कर अगले भोजनालय पर रुक सकते हैं; यदि अधिक लोग ऐसा करने लगें तो प्रति थाली मिले अतिरिक्त रुपये कई गुना अधिक थालियों के रूप में खो जाएँगे।
  • सस्ता स्थान खोजें? राजमार्ग से हटकर किराया कम है — किंतु राजमार्ग ही तो व्यवसाय है। ग्राहक स्थान के कारण आते हैं, इसलिए सस्ता स्थान किराए में जितना बचाएगा, बिक्री में उससे अधिक गँवा सकता है। भूमि अचल भी है : उसके नियमित यात्री ग्राहक नए स्थान पर उठाकर नहीं ले जाए जा सकते।
  • मैं वास्तव में क्या करूँगी: लंबी अवधि के लिए किराया स्थिर कराने की बात करूँगी, अपव्यय घटाकर और सब्जियाँ सीधे किसान से खरीदकर कुछ लागत सोखूँगी, उन्हीं व्यंजनों की कीमत थोड़ी बढ़ाऊँगी जिन पर ग्राहक कम ध्यान देते हैं, और उसी किराए से अधिक थालियाँ बेचने का प्रयास करूँगी — क्योंकि किराया एक स्थिर लागत है, इसलिए हर अतिरिक्त ग्राहक प्रति थाली किराए का भार घटाता है।
  • व्यवसाय पर प्रभाव: लाभ तत्काल घटेगा; यदि वह न बिक्री बढ़ा सकी न कीमत, तो कहीं और कटौती करनी होगी, और सबसे बुरी स्थिति में उस स्थान पर व्यवसाय चलाना कठिन हो जाएगा।

ख. एक कर्मचारी का जाना — श्रम की अचानक कमी।

  • क्या शेष कर्मचारी संभाल लेंगे? रत्ना के पास सात लोग हैं। छह कुछ समय तक अधिक काम करके संभाल सकते हैं, सदा नहीं : भीड़ के समय सेवा धीमी होगी, भूलें और अपव्यय बढ़ेंगे, और थके कर्मचारी बीमार पड़ेंगे — पृष्ठ 168 का उत्पादकता वाला तर्क उलटा चलता हुआ। अर्थात एक सप्ताह के लिए हाँ, एक महीने के लिए नहीं।
  • अधिक वेतन? संभवतः। यदि क्षेत्र में रसोइए दुर्लभ हैं तो उन्हें आकर्षित करने के लिए अधिक देना ही पड़ेगा — दुर्लभता मूल्य के साथ यही करती है। किंतु एक व्यक्ति का वेतन दूसरों से ऊपर करने से असंतोष फैलता है, इसलिए बेहतर यह है कि पद के लिए वेतन बढ़ाया जाए और यह बात सबको बताई जाए।
  • अर्थशास्त्री जो अन्य विकल्प गिनाएगा: किसी वर्तमान सहायक को ऊपर के काम का प्रशिक्षण देकर सरल काम के लिए नया व्यक्ति रखना (सस्ता भी, और मानव पूँजी भी बढ़ती है); केवल भीड़ के घंटों के लिए अंशकालिक सहायक; अथवा श्रम के स्थान पर थोड़ी पूँजी — बर्तन धोने की मशीन या आटा गूँधने की मशीन — जो अध्याय की उसी बात का प्रयोग है कि प्रौद्योगिकी श्रम पर निर्भरता घटा सकती है।
  • सीख: कोई कारक कम पड़ने पर उत्पादन ठप होने से पहले अकुशल होता है। रत्ना को चाहिए कि कम-से-कम एक व्यक्ति हर काम में प्रशिक्षित रहे, ताकि किसी एक के जाने से रसोई रुक न सके।

ग. बेहतर तकनीक के लिए लघु ऋण — पूँजी में वृद्धि।

  • क्या उत्पादन या गुणवत्ता बढ़ेगी? दोनों, यदि धन सही वस्तु पर लगे, क्योंकि प्रौद्योगिकी का काम ही यही है — वह समान या कम इनपुट्स के साथ अधिक उत्पादन करने में सक्षम बनाती है। व्यावसायिक गैस चूल्हा और रेफ्रिजरेटर पकाने का समय और खराब होने वाला माल दोनों घटाएँगे; आटा गूँधने की मशीन रसोइए को तवे के लिए मुक्त कर देगी।
  • क्या अधिक ग्राहकों तक पहुँच होगी? हाँ, दो प्रकार से — वह उसी भीड़ के समय अधिक थालियाँ परोस सकेगी, और दूसरी तरह की प्रौद्योगिकी (यू.पी.आई. का कोड, किसी डिलीवरी ऐप पर सूची, फोन नंबर वाला बोर्ड) उन ग्राहकों को ले आएगी जो अन्यथा आगे निकल जाते।
  • सावधानी: ऋण पर ब्याज है, जो हर महीने देना होगा, चाहे अतिरिक्त ग्राहक आएँ या न आएँ। इसलिए वही उपकरण चुनिए जो सबसे शीघ्र अपनी लागत निकाल दे, और हस्ताक्षर से पहले गणित कर लीजिए : यदि ऋण की मासिक लागत ₹3,000 है और रेफ्रिजरेटर ₹4,000 का माल खराब होने से बचाता है, तो यह लाभ का सौदा है; यदि वह ₹1,500 ही बचाता है, तो नहीं।

घ. पड़ोस में नया भोजनालय।

  • कीमत घटाना सबसे दुर्बल उत्तर है। नया भोजनालय भी घटा सकता है, और तब दोनों उतने ही काम के लिए कम कमाएँगे। मूल्य-युद्ध वही जीतता है जिसकी जेब गहरी हो, और वह प्रायः छोटा स्वामी नहीं होता।
  • अपनी मौजूदा शक्ति पर प्रतिस्पर्धा कीजिए: स्वादिष्ट और उच्च गुणवत्ता वाले भोजन की पाँच वर्ष की प्रतिष्ठा। गुणवत्ता हर दिन बिल्कुल एक जैसी रखिए, भोजनालय और शौचालय स्वच्छ रखिए — राजमार्ग के यात्रियों के लिए यह निर्णायक होता है — और सेवा तीव्र रखिए, क्योंकि यात्री की असली लागत समय है।
  • कुछ नया दीजिए: कोई क्षेत्रीय विशेष व्यंजन जो दूसरे के पास न हो, यात्रियों के लिए निश्चित मूल्य वाली थाली, रास्ते के लिए पैक भोजन, सुरक्षित पेयजल एवं फोन चार्जिंग, छायादार पार्किंग।
  • पुराने ग्राहक बनाए रखिए: नियमित ग्राहकों को पहचानिए, उनकी प्रतिक्रिया लीजिए, और ट्रक एवं बस चालकों को — जो यात्री लाते हैं — यहीं रुकने का कारण दीजिए।
  • अर्थशास्त्री की बात: प्रतिस्पर्धा केवल खतरा नहीं है। वह दोनों भोजनालयों को सुधरने पर विवश करती है, और यात्री को लाभ होता है। रत्ना का लक्ष्य भिन्न होना चाहिए, केवल सस्ता नहीं।

ङ. व्यवसाय संचालन सहज बनाने हेतु किन नियमों में संशोधन हो। इसे इस दृष्टि से रखिए कि रत्ना जैसे छोटे स्वामी को वास्तव में किन बातों से जूझना पड़ता है — यह चर्चा का प्रश्न है, इसलिए नारे नहीं, कारण दीजिए —

  • छोटे उद्यम के लिए एकल-खिड़की पंजीकरण — व्यापार लाइसेंस, खाद्य सुरक्षा लाइसेंस, दुकान एवं स्थापना पंजीकरण और जी.एस.टी. एक ही ऑनलाइन आवेदन में, और निर्णय के लिए निश्चित समय-सीमा।
  • छोटे व्यवसायों के लिए सरल कर-विवरणी — वर्ष में कम विवरणियाँ, और ऐसे प्रपत्र जो दुकानदार बिना लेखाकार रखे भर सके।
  • शीघ्र और बिना प्रतिभूति के लघु ऋण। अध्याय दिखाता है कि व्यक्तिगत बचत कम पड़ती है और बैंक ऋण उस कमी को भरता है; यह चरण जितना सरल होगा, उतनी ही अधिक रत्नाएँ होंगी।
  • निरीक्षण के स्पष्ट, प्रकाशित नियम — क्या जाँचा जाएगा, कौन जाँचेगा और कितनी बार — जिससे अनुपालन संभव हो और ईमानदार स्वामी घाटे में न रहे।
  • बड़े क्रेताओं द्वारा छोटे आपूर्तिकर्ताओं का समय पर भुगतान, ताकि छोटी इकाई की कार्यशील पूँजी फँसी न रहे।
पाँचों परिस्थितियों में समान बात क्या है: हर परिस्थिति किसी एक कारक की उपलब्धता या उसकी कीमत बदलती है, और हर बार रत्ना के पास तीन में से एक उत्तर होता है — प्रतिस्थापन (सहायक के स्थान पर मशीन), मितव्ययिता (बढ़े किराए के बदले कम अपव्यय), या विशिष्टता (कम कीमत के बदले बेहतर गुणवत्ता)। यही तीन उत्तर मिलकर लघु-व्यवसाय का पूरा अर्थशास्त्र बनाते हैं, और ये सीधे अध्याय के उस कथन से निकलते हैं कि कारक उस अनुपात में मिलाए जाते हैं जिसे उत्पादक बदल सकता है।
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