वे इसमें भिन्न हैं कि वे आते कहाँ से हैं, उन्हें देता कौन है, उनका भुगतान क्या है, और क्या उन्हें बढ़ाया जा सकता है। इन्हीं चार आधारों पर तुलना करने से यह वर्गीकरण नामों की सूची न रहकर उपयोगी बन जाता है।
| आधार | भूमि | श्रम | पूँजी | उद्यमिता |
|---|---|---|---|---|
| उत्पत्ति | प्रकृति की देन — मृदा, वन, जल, वायु, सूर्य का प्रकाश, खनिज, तेल, प्राकृतिक गैस | मनुष्य, शारीरिक और मानसिक योगदान के रूप में | मानव निर्मित; स्वयं पहले उत्पादित, फिर उत्पादन में प्रयुक्त | व्यक्ति का विचार, विवेक और जोखिम उठाने की तत्परता |
| क्या इसे बढ़ाया जा सकता है? | नहीं — इसकी कुल मात्रा सीमित है और यह क्षरित हो सकती है | हाँ, और शिक्षा, प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य से इसकी गुणवत्ता भी | हाँ — बचत और निवेश से | दुर्लभ; इसे प्रोत्साहित किया जा सकता है, बनाया नहीं |
| गतिशीलता | अचल — भूखंड, खान या नदी हटाई नहीं जा सकती | गतिशील, किंतु लोग अनिच्छा से ही स्थान बदलते हैं | धन तत्काल जाता है; मशीन लागत सहित | गतिशील — उद्यमी वहीं जाता है जहाँ अवसर हो |
| पुस्तक के अनुसार भुगतान | किराया, यदि खरीदी न गई हो | श्रम का उचित पारिश्रमिक | ऋणदाता को ब्याज; शेयरधारकों को लाभांश | जो शेष बचे — लाभ, और उसकी कोई गारंटी नहीं |
| जोखिम | किराया मिल जाए तो स्वामी पर कोई नहीं | बहुत कम — वस्तु बिके या न बिके, पारिश्रमिक देय है | ब्याज हर स्थिति में देय | पूरा। उद्यमी को सबसे अंत में मिलता है, या नहीं मिलता |
वर्गीकरण की कठिनाइयाँ — और ये वास्तविक हैं।
- सीमा पर बैठे इनपुट्स। विद्युत भूमि है या पूँजी? उसे मनुष्य बनाता है, किंतु कोयले, जल या सूर्य से। भंडारण का स्थान भूमि है या पूँजी? भूखंड भूमि है, उस पर बना भवन पूँजी, और किराया एक ही दोनों के लिए।
- पहले से संसाधित कच्चा माल। ताजा उत्पाद आरंभ में भूमि था, किंतु भोजनालय तक पहुँची सब्जियों की टोकरी में श्रम, वाहन और ईंधन भी सम्मिलित हो चुके हैं। पीछे कहाँ तक जाएँ?
- श्रम या मानव पूँजी? प्रतिवेदन में इनपुट के रूप में “मोबाइल के अवयवों का ज्ञान एवं कौशल” लिखा है। यह श्रम का परिश्रम नहीं, उसके पीछे की मानव पूँजी है। पुस्तक दोनों को अलग रखती है, किंतु हमारी तालिका में उसका कोई स्तंभ नहीं था।
- एक ही व्यक्ति तीन भूमिकाओं में। छोटी किराने की दुकान का स्वामी पूँजी भी देता है, श्रम भी करता है और उद्यमी भी है। बड़ी कंपनी में ये तीन अलग-अलग समूह होते हैं, इसीलिए वहाँ वर्गीकरण साफ दिखता है।
- धन स्वयं पूँजी नहीं है। बैंक में पड़ा धन कुछ उत्पादित नहीं करता; वह तभी पूँजी बनता है जब उपकरण, माल या दुकान में बदल जाए।