कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.1

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
काँच के एक गिलास को जल से आधा भरिए। इसमें धीरे-धीरे थोड़ी मात्रा में कैल्सियम ऑक्साइड (क्विक लाइम) डालिए। आप क्या अवलोकन कर रहे हैं?
उत्तर

कैल्सियम ऑक्साइड जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करता है। बुलबुले और सिसकारी की ध्वनि दिखाई-सुनाई देती है, ढेला टूटकर सफेद लेई जैसा हो जाता है और गिलास स्पष्ट रूप से गरम लगने लगता है।

कैल्सियम ऑक्साइड + जल → कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + ऊष्मा मुक्त
ऐसा क्यों होता है: यह एक रासायनिक परिवर्तन है — एक पूर्णतया नया पदार्थ, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड, बनता है और इस प्रक्रिया में ऊष्मा मुक्त होती है। वही मुक्त ऊष्मा आपको काँच के माध्यम से अनुभव होती है।
सुरक्षा सर्वोपरि: पुस्तक कहती है कि इस चरण को सावधानीपूर्वक करें। क्विक लाइम धीरे-धीरे और थोड़ी मात्रा में डालिए, अपना मुख गिलास से दूर रखिए और मिश्रण को नंगे हाथों से न छुइए।
प्र2.
कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन बनाने के लिए इसे निरंतर विलोडित कीजिए। इस विलयन को चूने का जल कहते हैं। इसे छानिए और इसके रंग का अवलोकन कीजिए।
उत्तर

छानने के बाद चूने का जल एक स्वच्छ, रंगहीन द्रव होता है। बिना छने द्रव की दूधिया सफेदी उन अघुले कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड कणों के साथ चली जाती है जो छानने के कागज पर रह जाते हैं।

ऐसा क्यों होता है: कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड जल में बहुत थोड़ा ही घुलता है; शेष सूक्ष्म ठोस कणों के रूप में रह जाता है जो प्रकाश को प्रकीर्णित कर द्रव को सफेद दिखाते हैं। छानने पर वे कण हट जाते हैं और केवल घुला हुआ भाग बचता है — और किसी रंगहीन पदार्थ का जल में विलयन स्वयं भी रंगहीन ही होता है।
संकेत: स्वच्छ, रंगहीन विलयन से आरंभ करना ही इस क्रियाकलाप का आधार है। इसके बाद जो भी दूधियापन दिखे, वह अवश्य ही किसी नई वस्तु से आया होगा, आरंभिक विलयन से नहीं।
प्र3.
इस रंगहीन विलयन को कुछ घंटों के लिए पेट्री डिश में छोड़ दीजिए (चित्र 8.5, क)। नियमित अंतराल पर विलयन को विलोडित करते रहिए। आप क्या देखते हैं (चित्र 8.5, ख)? क्या यह दूधिया हो जाता है?
उत्तर

हाँ। कुछ घंटों में स्वच्छ विलयन धीरे-धीरे दूधिया सफेद हो जाता है और सतह पर एक पतली सफेद परत भी बन सकती है।

अवस्थाआप क्या देखते हैं
छानने के तुरंत बाद (चित्र 8.5, क)स्वच्छ, रंगहीन चूने का जल
खुली पेट्री डिश में कुछ घंटों बाद (चित्र 8.5, ख)पूरा विलयन दूधिया सफेद
ऐसा क्यों होता है: पेट्री डिश खुली है, अत: चूने के जल की एक बड़ी सतह वायु के संपर्क में रहती है। विलोडित करते रहने से नया विलयन बार-बार सतह पर आता है, जिससे अभिक्रिया केवल ऊपरी परत तक रुकने के स्थान पर निरंतर चलती रहती है।
प्र4.
क्या आप व्याख्या कर सकते हैं कि विलयन दूधिया क्यों हो गया है?
उत्तर

क्योंकि वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड ने चूने के जल के कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया करके कैल्सियम कार्बोनेट — अघुलनशील सूक्ष्म सफेद कण — और जल बना दिया है।

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट + जल
ऐसा क्यों होता है: कैल्सियम कार्बोनेट जल में नहीं घुलता। यह अत्यंत सूक्ष्म सफेद कणों के रूप में निलंबित रहता है जो प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं, और यही प्रकीर्णन आपकी आँख को दूधियापन के रूप में दिखता है। चूँकि डिश में वायु के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मिलाया गया, अत: कार्बन डाइऑक्साइड वायु से ही आई होगी — इस प्रकार यह क्रियाकलाप सिद्ध करता है कि वायु में कार्बन डाइऑक्साइड होती है
यह कीजिए: ताजे चूने के जल में नली से धीरे-धीरे साँस छोड़िए। यह घंटों के स्थान पर कुछ ही क्षणों में दूधिया हो जाएगा, क्योंकि उच्छवासित वायु में कार्बन डाइऑक्साइड सामान्य वायु से कहीं अधिक होती है।
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