कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 चर्चा कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आप क्यों सोचते हैं कि आपके क्षेत्र में उद्यान, विद्यालय, चिकित्सालय और बस स्टैंड जैसे स्थान होने आवश्यक हैं?
उत्तर

ये स्थान इसलिए आवश्यक हैं, क्योंकि इनमें से हर एक पूरे क्षेत्र को वह वस्तु देता है, जो कोई अकेला परिवार अपने घर में नहीं बना सकता।

स्थानक्षेत्र को इसकी आवश्यकता क्यों है
उद्यानदौड़ने, खेलने और बैठने का सुरक्षित स्थान। बड़े-बुजुर्ग यहाँ टहलने आते हैं — मल्लिका की दादीजी प्रतिदिन सुबह अपनी सहेलियों के साथ यहाँ आती हैं।
विद्यालयबच्चे यहाँ पढ़ना, लिखना और गिनना सीखते हैं और यहीं उनके मित्र बनते हैं।
चिकित्सालय / स्वास्थ्य केंद्रबीमार पड़ने पर उपचार मिलता है और छोटे बच्चों को टीके लगते हैं।
बस स्टैंडलोग विद्यालय, कार्यस्थल या दूसरे नगर जाने के लिए बस पकड़ पाते हैं।

ये सभी सार्वजनिक स्थान हैं। इसका अर्थ है कि इनका उपयोग कोई भी कर सकता है — छोटा हो या बड़ा, निर्धन हो या संपन्न।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: सार्वजनिक स्थानों का उपयोग खेलने, आराम करने और दूसरों से मिलने के लिए किया जाता है। लोग विभिन्न अवसरों पर इन्हें साफ करने और सजाने के लिए भी एक साथ आते हैं। ये साझे अनुभव हमें एक-दूसरे के निकट लाते हैं और सुंदर स्मृतियाँ बनाते हैं।
प्र2.
अगर आपके क्षेत्र में इनमें से कोई एक या अधिक स्थान नहीं होते तो आपका जीवन कैसा होता?
उत्तर

जीवन बहुत कठिन और अकेला हो जाता। एक-एक करके देखिए कि क्या होता।

  • उद्यान न होता: बच्चों को सड़क पर खेलना पड़ता, जो सुरक्षित नहीं है। मल्लिका की दादीजी के पास टहलने का कोई स्थान न होता और श्वास लेने के लिए स्वच्छ हवा भी कम मिलती।
  • विद्यालय न होता: बच्चे घर पर ही रह जाते। न वे पढ़ना-लिखना सीख पाते, न प्रतिदिन अपने मित्रों से मिल पाते।
  • चिकित्सालय न होता: बीमार व्यक्ति को उपचार के लिए दूर जाना पड़ता। छोटा-सा रोग रास्ते में ही बड़ा हो जाता।
  • बस स्टैंड न होता: लोगों को बहुत दूर तक पैदल चलना पड़ता। बहुत-से लोग विद्यालय और कार्यस्थल देर से पहुँचते या जा ही न पाते।

अध्याय में यही बात दिखाई गई है। कांकेर में जब चिनार नदी उफान पर आ जाती थी तो "विद्यालय और चिकित्सालय तक पहुँचना एक बड़ी चुनौती बन जाती थी" — जब तक समुदाय ने मिलकर पुल नहीं बना लिया।

ऐसा क्यों होता है: साझा स्थान जब तक रहता है, हमें उसका महत्व पता ही नहीं चलता। उसकी आवश्यकता तब समझ आती है, जब वह नहीं होता।
प्र3.
आप ऐसा क्या कर सकते हैं, जिससे ये स्थान स्वच्छ और सुरक्षित रहें?
उत्तर

मैं प्रतिदिन छोटे-छोटे कार्यों से सार्वजनिक स्थानों की देखभाल कर सकता हूँ।

  1. कूड़ा केवल कूड़ेदान में डालूँ। यदि कूड़ेदान न हो तो कूड़ा घर तक ले जाऊँ।
  2. उद्यान में फूल न तोड़ूँ और टहनियाँ न तोड़ूँ।
  3. दीवारों, बेंचों और फिसल-पट्टी पर कुछ न लिखूँ।
  4. नए पौधों को पानी दूँ और उनके चारों ओर घेरा लगाऊँ, जिससे पशु उन्हें न खाएँ।
  5. प्रकाश स्तंभ, नल या बेंच टूटी हो तो तुरंत किसी बड़े को बताऊँ — जैसे कहानी में बबिता और समीर ने किया।
  6. मित्रों के साथ स्वच्छता अभियान में भाग लूँ और कूड़ा उठाते समय दस्ताने पहनूँ।
  7. पत्ते और बचा हुआ भोजन गड्ढे में डालूँ। वे खाद बन जाते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
  8. पैदल-पथ पर चलूँ और सड़क केवल निर्धारित स्थान से पार करूँ, जिससे स्थान सुरक्षित भी रहे।
यह क्यों काम करता है: सार्वजनिक स्थान का कोई एक मालिक नहीं होता। वह तभी स्वच्छ रहता है, जब उसका उपयोग करने वाला हर व्यक्ति उसे स्वच्छ रखे।
क्या यह उपयोगी रहा?