कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे दी गई तालिका में सुबह, दोपहर और रात के समय आकाश में आप जो देखते हैं, उसके विषय में लिखिए। आपके लिए कुछ बॉक्स पहले से भरे हुए हैं। आप इनमें नई बातें जोड़कर अपनी तालिका को बढ़ा सकते हैं।
सुबह का आकाशदोपहर का आकाशरात का आकाश
नारंगी रंग का आकाश  
 सूर्य का तेज प्रकाशचंद्रमा और तारे
नारंगी सूर्य  
   
   
तालिका जैसी पुस्तक में छपी है — कुछ बॉक्स पहले से भरे हुए हैं।
उत्तर

हर खाली बॉक्स में एक बात लिखिए। केवल वही लिखिए जो आपको आकाश में सचमुच दिखता है।

नमूना उत्तर: पूरी भरी हुई तालिका। काले रंग की चार बातें वे हैं जो पुस्तक में पहले से छपी हैं।

सुबह का आकाशदोपहर का आकाशरात का आकाश
नारंगी रंग का आकाशआकाश चमकीला नीलाआकाश गहरा काला
सूर्य नीचे की ओर दिखाई देता हैसूर्य का तेज प्रकाशचंद्रमा और तारे
नारंगी सूर्यसूर्य सिर के ऊपर आ जाता हैचंद्रमा की आकृति बदलती रहती है
छाया लंबी होती हैछाया छोटी होती हैसूर्य नहीं, इसलिए छाया नहीं
पक्षी घोंसलों से बाहर निकलते हैंबहुत कम पक्षी दिखाई देते हैंउल्लू और चमगादड़ उड़ते हैं
ऐसा क्यों होता है: आकाश में हमें जो कुछ दिखता है, वह सूर्य पर निर्भर करता है। सुबह और शाम सूर्य नीचे रहता है, इसलिए आकाश नारंगी दिखता है और छाया लंबी होती है। दोपहर में सूर्य सिर के ऊपर आ जाता है, इसलिए प्रकाश तेज होता है और छाया छोटी होती है। रात में सूर्य नहीं होता, इसलिए आकाश काला दिखता है और चंद्रमा तथा तारे दिखाई देते हैं।
संकेत: पुस्तक कहती है कि आप नई बातें जोड़ सकते हैं। तो अपनी एक पंक्ति और बनाइए — “आकाश में उड़ती पतंग”, “हवाई जहाज की सफेद लकीर” या “बारिश से पहले के काले बादल”।
प्र2.
सहपाठियों के साथ अपने अवलोकनों को साझा कीजिए और उनके अवलोकनों से इनकी तुलना कीजिए।
उत्तर

यह काम चार-पाँच बच्चों के छोटे समूह में कीजिए।

  1. अपनी तालिका एक-एक खाना करके पढ़कर सुनाइए।
  2. मित्रों की बातें सुनिए। जो बात आपकी बात से मिलती हो, उस पर सही का निशान लगाइए।
  3. जो नई बात अच्छी लगे, उसे रंगीन पेंसिल से अपनी तालिका में जोड़ लीजिए।
  4. गिनिए कि कितनी बातें मिलीं और कितनी नई थीं।

आप पाएँगे कि अधिकतर बातें मिलती-जुलती हैं, क्योंकि आप सबने एक ही आकाश देखा है। जो बातें नहीं मिलतीं, वे समय और स्थान के कारण अलग होती हैं।

नमूना उत्तर: “हममें से पाँच बच्चों ने सुबह के लिए ‘नारंगी आकाश’ लिखा था। केवल रवि ने लिखा — ‘आकाश में अब भी पतला चंद्रमा दिख रहा था’, क्योंकि वह पाँच बजे उठता है। कमला के रात के आकाश में एक भी तारा नहीं था, क्योंकि उस रात उसके गाँव में बादल थे।”

तुलना क्यों करें: तुलना से पता चलता है कि आकाश सबके लिए एक ही है, पर आप क्या देखते हैं यह इस पर निर्भर करता है कि आपने कब और कितने ध्यान से देखा।
प्र3.
क्या आपने दिन के अलग-अलग समय पर जंतुओं और पौधों की गतिविधियों में और उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन देखा है? इन परिवर्तनों पर अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और एक सूची बनाइए।
उत्तर

हाँ। दिन बीतने के साथ जंतुओं और पौधों की गतिविधियाँ बदलती रहती हैं।

नमूना उत्तर: एक पूरे दिन के अवलोकन के बाद बनाई गई सूची।

दिन का समयजंतु और पक्षीपौधे
प्रात:कालमुर्गा बाँग देता है। पक्षी चहचहाकर घोंसलों से निकलते हैं। गाय-बकरी चरने जाती हैं।बहुत-से फूल खिल जाते हैं। पत्तों पर ओस की बूँदें दिखती हैं।
मध्याह्नकुत्ते और भैंसें छाया में आराम करते हैं। बहुत कम पक्षी दिखाई देते हैं।तेज धूप में पत्तियाँ कुछ मुरझाई-सी लगती हैं।
सायंकालपक्षी घोंसलों की ओर लौटते हैं। गाय-बकरी घर आती हैं। दीये के पास कीड़े मँडराने लगते हैं।दिन में खिलने वाले फूल बंद होने लगते हैं।
रातउल्लू, चमगादड़, झींगुर और मच्छर निकलते हैं। अधिकतर जंतु सो जाते हैं।रात की रानी जैसे फूल खिलते हैं और तेज सुगंध देते हैं।
ऐसा क्यों होता है: अधिकतर जंतु तभी घूमते-फिरते हैं जब प्रकाश हो और भोजन मिल सके, और अंधेरे में आराम करते हैं। कुछ जंतु इसके उलट होते हैं — उल्लू और चमगादड़ रात को निकलते हैं। पौधे सूर्य के प्रकाश से काम करते हैं, इसलिए बहुत-से फूल सुबह खिलते हैं और शाम को बंद हो जाते हैं।
संकेत: अपने घर के पास किसी एक जंतु को एक सप्ताह तक देखिए — कौआ, गली का कुत्ता या चींटियों की कतार। हर सुबह और हर शाम उसके बारे में एक पंक्ति लिखिए। पैटर्न अपने आप दिख जाएगा।
प्र4.
क्या आप आकाश में सबसे चमकीली वस्तु का अनुमान लगा सकते हैं?
उत्तर

सूर्य। यही हमारे आकाश की सबसे चमकीली वस्तु है।

  • यह इतना चमकीला है कि जब यह आकाश में होता है, तब हमें अन्य तारे दिखाई नहीं देते।
  • यह हमें प्रकाश और ऊष्मा दोनों देता है।
तारे कहाँ छिप जाते हैं: दिन में भी तारे आकाश में रहते हैं। सूर्य का प्रकाश इतना तेज होता है कि उनकी छोटी-सी टिमटिमाहट हमारी आँखों को दिखाई नहीं देती। सूर्यास्त के बाद यह तेज प्रकाश हट जाता है और तारे फिर दिखने लगते हैं।
स्वयं जाँचिए: अंधेरे कमरे में जलती हुई टॉर्च देखिए — वह तुरंत दिख जाती है। अब ट्यूबलाइट जलाकर देखिए। टॉर्च जल तो रही है, पर अब मुश्किल से दिखती है।
क्या यह उपयोगी रहा?