कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 हमारा आकाश के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
दिन के अलग-अलग समय पर आकाश भिन्न-भिन्न दिखाई देता है। सुबह, दोपहर और रात में आकाश का रंग बदलता हुआ दिखाई देता है। सूर्य का रंग भी बदलता हुआ दिखाई देता है। पक्षियों, जंतुओं, पेड़ों और मनुष्यों की गतिविधियाँ भी बदलती रहती हैं। सूर्य आकाश की सबसे चमकीली वस्तु है। यह इतना चमकीला है कि जब यह आकाश में होता है, तब हमें अन्य तारे दिखाई नहीं देते। सूर्य हमें प्रकाश और ऊष्मा देता है। यह सुबह उगता हुआ, फिर सिर के ऊपर आता हुआ और फिर दूसरी ओर ढलता हुआ प्रतीत होता है। छाया दिन भर बदलती रहती है। सुबह की छाया लंबी होती है, दोपहर की छाया छोटी होती है और शाम की छाया फिर से लंबी हो जाती है। सायंकाल की छाया सुबह की छाया के विपरीत दिशा में बनती है। छाया प्रकाश का पीछा करती है। यदि वस्तु प्रकाश के स्रोत के समीप होती है तो छाया बड़ी होती है। यदि प्रकाश के स्रोत की दिशा बदलती है तो छाया की दिशा भी बदलती है। सूर्य
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | पाठ में कहाँ आया है | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| सूर्य | आकाश की सबसे चमकीली वस्तु; यह हमें प्रकाश और ऊष्मा देता है | सूर्य के रहते हुए अन्य तारे दिखाई नहीं देते | 153 |
| सूर्योदय | वह समय जब सुबह सूर्य उगता हुआ दिखाई देता है | आकाश नारंगी हो जाता है और पक्षी घोंसलों से निकल पड़ते हैं | 154 |
| सूर्यास्त | वह समय जब शाम को सूर्य डूबता है | पक्षी लौटते हैं, दीये जलते हैं और तारे दिखने लगते हैं | 154 |
| छाया | वह काली आकृति जो किसी वस्तु के प्रकाश रोकने पर बनती है | आपकी छाया आपके साथ दौड़ती है और मुद्रा बदलने पर बदल जाती है | 155 |
| प्रात:काल की छाया | लंबी छाया, जो सूर्य के नीचे रहने पर बनती है | छाया के तीन चित्रों में से पहला | 155 |
| मध्याह्न की छाया | छोटी छाया, जो सूर्य के सिर के ऊपर आने पर बनती है | छाया के तीन चित्रों में से दूसरा | 155 |
| पूर्व और पश्चिम | वह दिशा जहाँ से सूर्य उगता है, और जहाँ वह ढलता है | सूर्य पूर्व से सिर के ऊपर और फिर पश्चिम की ओर बढ़ता प्रतीत होता है | 157 |
| सूर्यघड़ी | छाया से समय बताने वाला उपकरण | जंतर-मंतर का सम्राट यंत्र, जिसे राजा जयसिंह ने बनवाया | 158 |
| तारों का पैटर्न | रात्रि के आकाश में चमकीले तारों को जोड़ने पर बनने वाली आकृति | आप अपना देखा हुआ पैटर्न बनाकर मित्रों से तुलना करते हैं | 159 |
| पूर्णिमा | वह रात जब चंद्रमा पूर्ण वृत्त दिखाई देता है | रक्षाबंधन, गुरु पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा पूर्णिमा के पर्व हैं | 160 |
| अमावस्या | वह रात जब चंद्रमा बिल्कुल दिखाई नहीं देता | दीपावली उस दिन मनाई जाती है, जब आकाश में चंद्रमा नहीं होता | 161 |
| चंद्रयान | भारत का चंद्रमा मिशन | विक्रम लैंडर 23 अगस्त 2023 को उतरा और आँकड़े एकत्र किए | 162 |
अभ्यास
- चित्र बनाइए
- लिखिए
- चर्चा कीजिए
- छाया
- पता कीजिए
- चित्र बनाइए
- छाया के साथ खेलना
- रात्रि का आकाश
- चित्र बनाइए
- चर्चा कीजिए
- लिखिए
- आइए विचार करें