कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
निम्नलिखित के मध्य दो अंतर बताइए — (क) दिन और रात
उत्तर

दिन और रात के दो अंतर —

  1. दिन में सूर्य आकाश में होता है और चारों ओर उजाला रहता है। रात में सूर्य आकाश में नहीं होता और अंधेरा रहता है।
  2. दिन में हमें सूर्य और नीला आकाश दिखता है। रात में हमें चंद्रमा और तारे दिखाई देते हैं।

(आप यह भी लिख सकते हैं — दिन में धूप से छाया बनती है, रात में धूप की छाया नहीं बनती।)

कारण: दिन और रात के सारे अंतर एक ही बात से निकलते हैं — सूर्य का प्रकाश है, या नहीं है।
प्र2.
निम्नलिखित के मध्य दो अंतर बताइए — (ख) प्रात:कालीन आकाश और सायंकालीन आकाश
उत्तर

प्रात:कालीन और सायंकालीन आकाश के दो अंतर —

  1. प्रात:काल आकाश पूर्व की ओर नारंगी होता है, जहाँ से सूर्य उगता है। सायंकाल आकाश पश्चिम की ओर नारंगी होता है, जहाँ सूर्य ढलता है।
  2. प्रात:कालीन आकाश उजला होता जाता है — तारे धुँधले पड़ते जाते हैं। सायंकालीन आकाश काला होता जाता है — तारे दिखने लगते हैं।
कारण: दोनों समय आकाश नारंगी इसलिए दिखता है क्योंकि सूर्य नीचे रहता है। अंतर बताने वाली बात है — आकाश की कौन-सी ओर, और प्रकाश बढ़ रहा है या घट रहा है।
प्र3.
निम्नलिखित के मध्य दो अंतर बताइए — (ग) दिन और रात के समय हमारी गतिविधियाँ
उत्तर

हमारी गतिविधियों के दो अंतर —

  1. दिन में हम विद्यालय जाते हैं, काम करते हैं, बाहर खेलते हैं और धूप में कपड़े सुखाते हैं। रात में हम घर के भीतर रहते हैं, भोजन करते हैं और सो जाते हैं।
  2. दिन में हम सूर्य के प्रकाश में काम करते हैं, जो मुफ्त मिलता है। रात में देखने के लिए हमें दीये और बत्तियाँ जलानी पड़ती हैं।
कारण: हम अधिकतर काम तभी करते हैं जब देखना और घूमना-फिरना आसान हो। प्रकाश हटते ही दिन का बाहरी काम समाप्त हो जाता है।
प्र4.
निम्नलिखित के मध्य दो अंतर बताइए — (घ) दिन और रात के समय जंतुओं की गतिविधियाँ
उत्तर

जंतुओं की गतिविधियों के दो अंतर —

  1. दिन में अधिकतर पक्षी और जंतु जागते हैं — पक्षी भोजन की खोज में उड़ते हैं, गाय चरती है, तितलियाँ फूलों पर आती हैं। रात में इनमें से अधिकतर अपने घोंसलों, दड़बों और बाड़ों में सो जाते हैं।
  2. कुछ जंतु इसके उलट करते हैं। उल्लू, चमगादड़, झींगुर और मच्छर रात में निकलते हैं और दिन में आराम करते हैं।
कारण: जंतु तभी घूमते हैं जब उन्हें भोजन सुरक्षित रूप से मिल सके। अधिकतर को यह दिन के उजाले में मिलता है, पर कुछ अंधेरे में भी शिकार कर लेते हैं, इसलिए उनका दिन और रात उलटे हो जाते हैं।
प्र5.
कुछ बातों की जाँच कीजिए — एक शिक्षक ने कहा कि दिन के समय सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर चलता हुआ प्रतीत होता है। इस कथन के बारे में मीरा की कुछ जिज्ञासा है और वह अपने शिक्षक से प्रश्न पूछना चाहती है। कम-से-कम दो ऐसे प्रश्न लिखिए, जो वह पूछ सकती है।
उत्तर

अच्छा प्रश्न वही है जो उस बात के आगे पूछे, जो कथन में नहीं बताई गई। मीरा ये प्रश्न पूछ सकती है —

  1. “आप ‘प्रतीत होता है’ क्यों कहते हैं? क्या सूर्य सचमुच चलता है, या हमें केवल ऐसा दिखता है?”
  2. “क्या सूर्य हर दिन पूर्व में ठीक उसी जगह से उगता हुआ दिखता है?”

वह ये प्रश्न भी पूछ सकती है —

  • “पश्चिम में डूबने के बाद सूर्य कहाँ चला जाता है? सुबह तक वह फिर पूर्व में कैसे पहुँच जाता है?”
  • “क्या रात में चंद्रमा और तारे भी पूर्व से पश्चिम की ओर चलते हुए प्रतीत होते हैं?”

नमूना उत्तर: इनमें से कोई भी दो प्रश्न, अपने शब्दों में लिखिए।

ये अच्छे प्रश्न क्यों हैं: हर प्रश्न शिक्षक के वाक्य को लेकर अगला कदम पूछता है — सचमुच या केवल दिखने में?, हर दिन या नहीं?, और रात में क्या होता है? इस दिखाई देने वाली यात्रा का कारण आपके शिक्षक आगे की कक्षा में बताएँगे।
संकेत: पूछने से पहले अपने प्रश्न लिख लीजिए। लिखा हुआ प्रश्न जल्दबाजी में पूछे गए प्रश्न से लगभग हमेशा बेहतर होता है।
प्र6.
समझाइए — मान लीजिए, आप सुबह और दोपहर के समय एक ही स्थान पर खड़े हैं। सुबह आपकी छाया एक दिशा में होगी, जबकि दोपहर को दूसरी दिशा में, ऐसा क्यों? क्या आपकी छाया की लंबाई दोनों समय समान होगी?
उत्तर

दिशा क्यों बदलती है: क्योंकि इन दोनों समय सूर्य आकाश की अलग-अलग ओर होता है।

  1. सुबह सूर्य पूर्व में दिखाई देता है। आपकी छाया उससे उलटी ओर, पश्चिम की ओर बनती है।
  2. दोपहर तक सूर्य पश्चिम की ओर बढ़ जाता है। अब छाया दूसरी ओर, पूर्व की ओर बनती है।

आप तो हिले ही नहीं। सूर्य हिला, इसलिए छाया हिल गई।

पूर्वपश्चिमसुबहदोपहर
वही बच्चा, वही स्थान — दिन के दो अलग-अलग समय।

क्या लंबाई समान होगी? नहीं।

  • सुबह-सुबह सूर्य नीचे रहता है, इसलिए छाया लंबी होती है।
  • दोपहर के आसपास सूर्य सिर के ऊपर आ जाता है, इसलिए छाया सबसे छोटी होती है।
  • उसके बाद सूर्य फिर नीचे जाता है और छाया फिर से लंबी हो जाती है।

अर्थात दोनों छायाओं की दिशा अलग होगी, और प्राय: लंबाई भी अलग होगी।

ऐसा क्यों होता है: छाया हमेशा प्रकाश से उलटी ओर बनती है, और प्रकाश नीचे से आने पर वह खिंचकर लंबी हो जाती है। दोनों बातें सूर्य की एक ही यात्रा से निकलती हैं — पूर्व, सिर के ऊपर, पश्चिम।
स्वयं जाँचिए: विद्यालय के मैदान में 8 बजे और फिर 12 बजे एक ही जगह खड़े होइए। हर बार अपनी छाया के सिरे पर एक पत्थर रखिए, और फिर दोनों पत्थरों की तुलना कीजिए।
प्र7.
शब्दों के साथ रचनात्मक बनिए — (क) आकाश की सुंदरता से प्रेरित होकर एक कविता लिखिए।
उत्तर

चार से आठ पंक्तियाँ लिखिए। कविता बनाने का एक आसान तरीका —

  1. आकाश की एक चीज चुनिए — सूर्य, चंद्रमा, तारा, बादल या इंद्रधनुष।
  2. एक पंक्ति में लिखिए कि वह कैसी दिखती है। किसी जानी-पहचानी चीज से तुलना कीजिए — लड्डू, दीया, नाव, रुई।
  3. एक पंक्ति में लिखिए कि वह क्या करती है — उगता है, छिपता है, टिमटिमाता है, तैरता है।
  4. हो सके तो दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द पहली पंक्ति के अंतिम शब्द से मिलाइए।
  5. कविता को एक शीर्षक दीजिए।

नमूना उत्तर:

मेरा आकाश

सुबह का सूरज नारंगी गोला,
धीरे-धीरे दीवार पर बोला।
दोपहर में वह सिर पर आता,
छोटी छाया पैरों में समाता।
रात को चंदा फाँक निराली,
तारे गिनती करते ताली।
यह कविता क्यों बनी: हर पंक्ति एक छोटी, सच्ची बात कहती है जो आपने सचमुच देखी है। तुक तो केवल याद रखने में मदद करती है — असली बात पंक्ति के भीतर का चित्र है।
संकेत: कविता उसी भाषा में लिखिए जिसमें आप सोचते हैं। आकाश पर लिखी भोजपुरी, तमिल या मराठी कविता भी उतनी ही अच्छी है।
प्र8.
शब्दों के साथ रचनात्मक बनिए — (ख) पहेली पूर्ण कीजिए और उसका उत्तर दीजिए — “रंग में एक, आकार अनेक / उजाले में दिखता, जैसे हो रहस्य कोई विशेष।” यह क्या है?
उत्तर

पहेली का उत्तर है — छाया

अब दो छूटी हुई पंक्तियाँ। इनमें एक और संकेत जोड़िए और तुक बनाए रखिए।

नमूना उत्तर — पूरी पहेली:

रंग में एक, आकार अनेक
उजाले में दिखता, जैसे हो रहस्य कोई विशेष।
साथ-साथ चलती, पर बोले न कभी,
दीवार पर, धरती पर दिखती सभी।

यह क्या है? → छाया

ये दो पंक्तियाँ भी उतनी ही सही हैं —

सुबह लंबी, दोपहर छोटी,
अंधेरा होते ही हो जाए लापता।

हर संकेत छाया पर कैसे ठीक बैठता है:

  • रंग में एक — वस्तु का रंग कुछ भी हो, छाया हमेशा काली ही होती है।
  • आकार अनेक — सुबह लंबी, दोपहर छोटी, शाम को फिर लंबी।
  • उजाले में दिखता — प्रकाश नहीं, तो छाया नहीं।
उत्तर छाया ही क्यों है: इस पाठ में और कोई चीज ऐसी नहीं है जो हमेशा एक ही रंग की हो, जिसका आकार बदलता रहे, और जो केवल प्रकाश होने पर ही दिखे। सूर्य, चंद्रमा और तारे तो चमकीले हैं, काले नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा?