प्र1.
क्या आपने कभी अपनी छाया को अपने साथ चलते हुए देखा है?
उत्तर
हाँ। आप जहाँ जाते हैं, छाया भी वहीं जाती है।
- आप चलते हैं तो छाया चलती है। आप दौड़ते हैं तो छाया भी दौड़ती है।
- आप अलग-अलग मुद्राएँ बनाते हैं तो छाया का आकार भी वैसे ही बदल जाता है।
- आप कूदते हैं तो छाया भी कूदती है।
ऐसा क्यों होता है: छाया वहीं बनती है जहाँ आपका शरीर प्रकाश को रोक देता है। आपका शरीर हमेशा आपके साथ ही रहता है, इसलिए उसके द्वारा बनने वाला काला धब्बा भी आपके साथ ही चलता है।
करके देखिए: धूप में खड़े होकर दोनों हाथ सिर पर सींगों की तरह रखिए और जमीन पर देखिए। छाया के भी सींग बन जाएँगे।