कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 पता कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
एक टॉर्च और एक छड़ी लीजिए। दरवाजे और खिड़कियाँ बंद करके कमरे में अंधेरा कीजिए। एक हाथ में छड़ी पकड़िए और टॉर्च को जलाइए। टॉर्च के प्रकाश को छड़ी पर डालिए। निम्नलिखित परिस्थितियों में छड़ी की छाया में होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन कीजिए — (क) छड़ी को आगे-पीछे करने पर। (ख) टॉर्च की दिशा में परिवर्तन करने पर।
उत्तर
सामग्री: एक टॉर्च, एक सीधी छड़ी या पेंसिल, और सादी दीवार वाला एक अंधेरा कमरा।
दरवाजे और खिड़कियाँ बंद करके कमरे में अंधेरा कीजिए।
छड़ी को खड़ा कीजिए, या किसी मित्र से दीवार से लगभग एक मीटर दूर पकड़वाइए।
टॉर्च जलाकर उसका प्रकाश छड़ी पर डालिए। दीवार पर छड़ी की काली छाया बन जाएगी।
(क) टॉर्च को स्थिर रखकर छड़ी को टॉर्च की ओर और फिर टॉर्च से दूर ले जाइए। हर बार छाया देखिए।
(ख) छड़ी को स्थिर रखकर टॉर्च को हिलाइए — बाएँ, दाएँ, ऊपर, नीचे। हर बार छाया देखिए।
आप क्या देखेंगे:
छड़ी टॉर्च के पास → छाया बड़ी हो जाती है। छड़ी टॉर्च से दूर → छाया छोटी हो जाती है।
टॉर्च बाईं ओर → छाया दाईं ओर चली जाती है, और उलटा भी वैसा ही।
नमूना उत्तर: “जब मैंने पेंसिल टॉर्च के पास की, तो उसकी छाया बढ़कर आधी दीवार पर फैल गई। जब मैंने टॉर्च बाईं ओर की, तो छाया खिसककर दीवार की दाईं ओर चली गई।”
वही छड़ी, वही दीवार — केवल टॉर्च की जगह बदली गई है।
ऐसा क्यों होता है: छाया वस्तु के पीछे का वह भाग है जहाँ प्रकाश पहुँच ही नहीं पाता। वस्तु को प्रकाश के पास लाइए, वह अधिक प्रकाश रोकेगी, इसलिए वह काला भाग बड़ा हो जाएगा। प्रकाश को नई ओर ले जाइए, तो काला भाग भी उलटी ओर चला जाएगा।
संकेत: यही नियम धूप में भी चलता है — बस यहाँ प्रकाश आप हिलाते हैं, और बाहर सूर्य चलता हुआ प्रतीत होता है।
प्र2.
यदि हम छड़ी (वस्तु) और प्रकाश के स्रोत के बीच की दूरी को परिवर्तित करें तो छाया कैसे परिवर्तित होती है?
उत्तर
छाया का आकार बदल जाता है।
यदि वस्तु प्रकाश के स्रोत के समीप होती है तो छाया बड़ी होती है।
यदि वस्तु प्रकाश के स्रोत से दूर होती है तो छाया छोटी होती है।
वही छड़ी, वही दीवार — केवल टॉर्च की जगह बदली गई है।
ऐसा क्यों होता है: प्रकाश आगे बढ़ते हुए फैलता जाता है। टॉर्च के पास रखी वस्तु प्रकाश के सँकरे भाग में होती है और उसका बड़ा हिस्सा रोक लेती है, इसलिए बड़ी छाया बनती है। वही वस्तु दूर हटाने पर बहुत कम प्रकाश रोक पाती है, इसलिए छाया छोटी हो जाती है।
स्वयं जाँचिए: अपना हाथ दीये या लैंप के पास ले जाइए और दीवार देखिए — बहुत बड़ा हाथ। पीछे हटिए, हाथ फिर छोटा हो जाएगा।
प्र3.
यदि हम टॉर्च (प्रकाश के स्रोत) की दिशा को बदलते हैं तो छाया कैसे परिवर्तित हो जाती है?
उत्तर
छाया की दिशा बदल जाती है।
टॉर्च बाईं ओर से जलाइए → छाया दाईं ओर बनेगी।
टॉर्च दाईं ओर से जलाइए → छाया बाईं ओर बनेगी।
टॉर्च ठीक ऊपर से डालिए → छाया छोटी होकर छड़ी के ठीक नीचे आ जाएगी।
एक पंक्ति का नियम — छाया हमेशा प्रकाश से उलटी ओर बनती है।
ऐसा क्यों होता है: प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। छड़ी उस प्रकाश को रोक देती है और उसके ठीक पीछे काला भाग रह जाता है। इसलिए जैसे ही प्रकाश नई ओर से आता है, “छड़ी के पीछे” का अर्थ भी नई ओर हो जाता है।
प्र4.
हम सुबह और शाम की छाया को अलग-अलग दिशाओं में बनते हुए देखते हैं। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर
क्योंकि इन दोनों समय सूर्य आकाश की अलग-अलग ओर होता है।
सुबह सूर्य पूर्व में दिखाई देता है। छाया उससे उलटी ओर, पश्चिम की ओर बनती है।
शाम तक सूर्य पश्चिम में पहुँच जाता है। अब छाया दूसरी ओर, पूर्व की ओर बनती है।
इसीलिए शाम की छाया सुबह की छाया के ठीक विपरीत दिशा में जाती है।
ऐसा क्यों होता है: यह वही नियम है जो आपने अभी टॉर्च से जाँचा। प्रकाश की दिशा बदलिए, छाया की दिशा बदल जाएगी। बाहर सूर्य ही टॉर्च है, और वह दिन भर पूर्व से पश्चिम की ओर चलता हुआ प्रतीत होता है।