कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 छाया के साथ खेलना के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
छाया से अलग-अलग आकृतियाँ बनाना बहुत रोचक है। अपने मित्रों के साथ करके देखिए।
उत्तर

दीवार पर हाथों की छाया से आकृतियाँ बनाइए। इस तरह कीजिए —

  1. सादी, हल्के रंग की दीवार वाला कमरा चुनिए। दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर लीजिए।
  2. एक टॉर्च या लैंप जलाकर उसका प्रकाश दीवार पर डालिए।
  3. प्रकाश और दीवार के बीच खड़े होकर अपने हाथ प्रकाश में लाइए।
  4. उँगलियों को मोड़कर अलग-अलग आकृतियाँ बनाइए और हाथ नहीं, दीवार देखिए।
  5. हाथ को प्रकाश के पास ले जाइए — छाया बड़ी हो जाएगी।

नमूना उत्तर — शुरू करने के लिए सरल आकृतियाँ:

  • पक्षी: दोनों हाथ कलाइयों पर आड़े रखकर उँगलियों को पंखों की तरह हिलाइए।
  • कुत्ता: उँगलियाँ मिलाकर लंबा मुँह बनाइए; अंगूठे को मुँह की तरह खोलिए-बंद कीजिए।
  • हिरण: एक मुट्ठी के पीछे दूसरे हाथ की उँगलियाँ फैलाकर सींग बनाइए।
  • साँप: एक हाथ सीधा रखकर धीरे-धीरे लहराइए।

इस खेल से आप एक बात सीखते हैं — छाया उसी का आकार लेती है जो प्रकाश रोकता है, उसका रंग नहीं। गोरा हाथ हो या साँवला, दोनों की छाया एक जैसी काली बनती है।

ऐसा क्यों होता है: प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। जहाँ आपका हाथ उसे रोक देता है, वहाँ दीवार पर प्रकाश नहीं पहुँचता, और उस काले भाग की रूपरेखा आपके हाथ जैसी ही होती है।
क्या आप जानते हैं? छाया-कठपुतली भारत में लंबे समय से प्रचलित है। मोटे कागज से मोर या हाथी की आकृति काटकर, उसे तीली पर चिपकाकर आप कक्षा में छाया-नाटक कर सकते हैं। छाया से समय भी पता चलता है — प्राचीन लोगों ने इसके लिए सूर्यघड़ी बनाई। राजा जयसिंह ने जयपुर, उज्जैन, दिल्ली, वाराणसी तथा मथुरा में जंतर-मंतर बनवाया, जिसकी सूर्यघड़ी सम्राट यंत्र छाया के आधार पर सटीक समय बताती है।
क्या यह उपयोगी रहा?