प्र1.
पक्षी दैनंदिनी (डायरी) — (क) किसी पेड़ के समीप जाइए। (ख) अपनी आँखें बंद कीजिए और भिन्न-भिन्न पक्षियों का स्वर सुनिए। (ग) अब अपनी आँखें खोलिए और एक बार में एक पक्षी पर ध्यान केंद्रित कीजिए। (घ) अवलोकन कीजिए कि वह कैसे चलता है, क्या खाता है और कहाँ पर बैठता है। (ङ) अपने अवलोकनों को पक्षी दैनंदिनी (डायरी) में लिखिए! प्रत्येक पक्षी के लिए निम्नलिखित बातों को लिखिए —
पृष्ठ 47 पर छपा पक्षी दैनंदिनी का कार्ड — बाईं ओर एक पक्षी का चित्र और दाईं ओर रिक्त स्थान।
| पक्षी दैनंदिनी | |
|---|---|
| नाम | |
| दिनांक | |
| सिर का रंग | |
| पीठ का रंग | |
| पंखों के रंग | |
| चोंच का आकार | |
| गले का रंग | |
| पैरों का रंग | |
| रोचक तथ्य |
उत्तर
यह आपकी अपनी दैनंदिनी है, इसलिए लिखना आपको ही है। ऐसे कीजिए —
- प्रतिदिन एक ही समय पर उसी पेड़ के पास जाइए — प्रात:काल सबसे अच्छा समय है।
- चुपचाप खड़े होकर एक मिनट आँखें बंद रखिए। गिनिए कि कितने अलग-अलग स्वर सुनाई देते हैं।
- आँखें खोलिए और एक पक्षी चुनिए। केवल उसी को देखिए।
- उसे देखते-देखते ही ‘रूप-रंग’ वाले खाने ऊपर से नीचे तक भरिए।
- एक-दो रोचक तथ्य लिखिए — उसने क्या खाया, कैसे चला, कहाँ बैठा।
नमूना उत्तर — कौए की दैनंदिनी, जिसका चित्र पुस्तक के कार्ड पर बना है।
| पक्षी दैनंदिनी | मैंने क्या देखा |
|---|---|
| नाम | कौआ |
| दिनांक | 12 जुलाई |
| सिर का रंग | ऊपर से काला |
| पीठ का रंग | भूरा-स्लेटी |
| पंखों के रंग | चमकीला काला |
| चोंच का आकार | मोटी, मजबूत और थोड़ी मुड़ी हुई |
| गले का रंग | भूरा-स्लेटी |
| पैरों का रंग | काला |
| रोचक तथ्य | वह भूमि पर फुदका, रोटी का एक टुकड़ा उठाया और दीवार पर उड़ गया। बिल्ली पास आई तो वह जोर-जोर से काँव-काँव करने लगा। |
चोंच का आकार क्यों लिखते हैं: चोंच बताती है कि पक्षी क्या खाता है। कौए जैसी मोटी और मजबूत चोंच लगभग कुछ भी उठा सकती है, इसलिए कौआ अनाज, फल और बचा हुआ भोजन — सब खा लेता है।
संकेत: घोंसले के पास कभी मत जाइए और चूजे को कभी मत छुइए। दूर से देखिए, तभी पक्षी बार-बार आते रहेंगे।