कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आपने कभी वट-वृक्ष को देखा है, जिसकी लटकती हुई जड़ें भूमि को स्पर्श कर रही हों? एक रंग-बिरंगा पक्षी, जो पानी में गोता लगा रहा हो? एक मकड़ी, जो अपना जाला बुन रही हो? फूलों के चारों ओर तितलियाँ उड़ रही हों?
अध्याय के आरंभ में दिखाए गए चार दृश्य — वट-वृक्ष, पानी में गोता लगाता पक्षी, जाले पर मकड़ी और फूल के पास तितलियाँ।
उत्तर

ये चारों दृश्य हमारे आस-पास ही मिलते हैं। इनके विषय में जानिए —

  • वट-वृक्ष: इसकी डालियों से मोटी जड़ें नीचे की ओर लटकती हैं। भूमि को छूने पर ये कठोर हो जाती हैं और नए तनों की तरह पेड़ को सहारा देती हैं।
  • पानी में गोता लगाता रंग-बिरंगा पक्षी: यह किलकिला (किंगफ़िशर) है। यह डाल पर चुपचाप बैठा रहता है और फिर सीधे गोता लगाकर अपनी लंबी चोंच से मछली पकड़ लेता है।
  • जाला बुनती मकड़ी: मकड़ी बहुत पतला और चिपचिपा धागा बुनकर पहिए जैसा जाला बनाती है। छोटे कीट इसमें फँस जाते हैं।
  • फूलों के पास तितलियाँ: ये फूल के भीतर का मीठा रस, यानी मकरंद, पीने आती हैं।
पुस्तक यह क्यों पूछती है: प्रकृति अद्भुत जंतुओं और पौधों से भरी हुई है। जिन चीज़ों के पास से हम रोज़ गुजरते हैं, उन्हें ध्यान से देखकर ही हम उनके विषय में जान पाते हैं।

नमूना उत्तर: हाँ, मैंने अपने गाँव के मंदिर के पास वट-वृक्ष देखा है। उसकी लटकती जड़ें भूमि को छूती हैं और हम उन पर झूलते हैं। मैंने अपने विद्यालय के बगीचे के फूलों पर तितलियाँ और खिड़की के कोने में मकड़ी का जाला भी देखा है। पानी में गोता लगाता पक्षी मैंने अभी तक नहीं देखा।

यह कीजिए: किसी पेड़ के पास पाँच मिनट चुपचाप खड़े रहिए और गिनिए कि आपको कितने अलग-अलग जीव दिखाई देते हैं। आप चकित रह जाएँगे।
प्र2.
आभा दीदी! क्या रास्ते में हमें बंदर, हिरण, साँप, बाज और बाघ आदि जीव-जंतु दिखाई देंगे?
उत्तर

आभा दीदी का अपना उत्तर है — “यही तो हमें पता लगाना है!”

जंगल में कोई यह नहीं बता सकता कि आपको क्या दिखाई देगा। जंतु अपनी इच्छा से इधर-उधर घूमते हैं। कुछ छिप जाते हैं, कुछ केवल रात में निकलते हैं और कुछ ऊँचे पेड़ों पर ही रहते हैं।

इस भ्रमण में विद्यार्थियों ने बहुत कुछ देखा —

  • जंगल में बंदर और हिरण (पृष्ठ 38–39);
  • तालाब के पास गौर और एक खरगोश (पृष्ठ 42);
  • पेड़ पर बैठा धनेश पक्षी (पृष्ठ 44);
  • घास से उछलकर निकला एक टिड्डा (पृष्ठ 49)।

उन्हें बाघ दिखाई नहीं दिया। तालाब के पास कीचड़ में उन्हें केवल उसके पदचिह्न मिले।

बाघ क्यों कठिनाई से दिखता है: बाघ बहुत चुपचाप चलता है और उसकी धारियाँ उसे ऊँची घास में छिपा देती हैं। वह जीपों और लोगों से भी दूर रहता है।
संकेत: आभा दीदी ने यह भी कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना है कि हम जंगल के पेड़-पौधों और जंतुओं को हानि न पहुँचाएँ। शोर करने वालों की तुलना में चुप रहने वालों को अधिक जंतु दिखते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?