कक्षा ४ हिंदी अध्याय 1 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार”, कविता की इस पंक्ति में ‘सुकुमार’ शब्द आया है। यह ‘सु’ और ‘कुमार’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है— कोमल या कोमल अंगों वाला। आप भी इसी प्रकार कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ खोजिए।
सुकुमारसुकुमारकोमल अंगों वाला
सुयोग्य………………
सुयश………………
सु………सुकर्मअच्छे कर्म
सुवास………………
सु………सुदर्शन………
उत्तर

भरी हुई तालिका —

सुदूसरा शब्दबना हुआ शब्दअर्थ
सुकुमारसुकुमारकोमल अंगों वाला
सुयोग्यसुयोग्यबहुत योग्य, हर काम के लायक
सुयशसुयशअच्छा नाम, अच्छी कीर्ति
सुकर्मसुकर्मअच्छे कर्म
सुवाससुवासअच्छी महक, सुगंध
सुदर्शनसुदर्शनदेखने में सुंदर
नियम: ‘सु’ शब्द के आगे जुड़कर उसे ‘अच्छा’ बना देता है। इसीलिए सु + यश = अच्छा यश, सु + वास = अच्छी महक।
और शब्द बनाइए: सु + पुत्र = सुपुत्र (अच्छा बेटा), सु + स्वागत = सुस्वागत, सु + पथ = सुपथ (अच्छा रास्ता)।
मेरा वाक्य: बगीचे के फूलों की सुवास पूरे आँगन में फैल गई।
प्र2.
नीचे दिए गए वाक्यों में कुछ रिक्त स्थान हैं और कुछ शब्द रेखांकित किए गए हैं। उन शब्दों से वाक्यों को पूरा कीजिए जो रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ रखते हैं — (क) सूखा और ……………… कचरा अलग-अलग डिब्बों में डालें।
उत्तर

उत्तर — गीला।

पूरा वाक्य: सूखा और गीला कचरा अलग-अलग डिब्बों में डालें।

नियम: जिन शब्दों का अर्थ एक-दूसरे के उलटा हो, उन्हें विपरीत अर्थ वाले शब्द कहते हैं। ‘सूखा’ का उलटा ‘गीला’ है।
मेरा वाक्य: बारिश में मेरा बस्ता गीला हो गया, इसलिए मैंने उसे धूप में सुखाया।
प्र3.
(ख) दिल्ली मेरे घर से ……………… है लेकिन गुवाहाटी पास में है।
उत्तर

उत्तर — दूर।

पूरा वाक्य: दिल्ली मेरे घर से दूर है लेकिन गुवाहाटी पास में है।

कैसे पहचानें: वाक्य में ‘लेकिन’ शब्द आया है। ‘लेकिन’ दो उलटी बातों को जोड़ता है। इसलिए ‘पास’ का उलटा शब्द ‘दूर’ ही आएगा।
मेरा वाक्य: मेरा विद्यालय पास में है, पर मेरी मौसी का घर बहुत दूर है।
प्र4.
(ग) अनवर कब ……………… और कब गया, पता ही नहीं चला।
उत्तर

उत्तर — आया।

पूरा वाक्य: अनवर कब आया और कब गया, पता ही नहीं चला।

क्यों: ‘गया’ का अर्थ है चला जाना, और उसका उलटा है ‘आया’। ‘आया’ और ‘गया’ साथ आने से वाक्य का अर्थ बनता है कि अनवर बहुत थोड़ी देर रुका।
मेरा वाक्य: डाकिया अभी-अभी आया और चिट्ठी देकर चला गया।
प्र5.
(घ) कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही ………………।
उत्तर

उत्तर — छोटा।

पूरा वाक्य: कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही छोटा

वाक्य का अर्थ: हर काम बराबर होता है। झाड़ू लगाना भी उतना ही ज़रूरी है जितना पढ़ना। ‘बड़ा’ का उलटा शब्द ‘छोटा’ है।
और विपरीत शब्द: दिन–रात, ठंडा–गरम, हल्का–भारी, नया–पुराना।
मेरा वाक्य: मेरा भाई मुझसे छोटा है, पर बातें बड़ों जैसी करता है।
प्र6.
आइए, अब एक रोचक संवाद पढ़ते हैं—
सहेली कहती हैसलमा कहती है
सलमा, तुम्हें कितने पैसे चाहिए?जितने पैसे राजू को मिले।
तुम्हें उतने नहीं मिल सकते।तो मुझे कितने पैसे मिल सकते हैं?
केवल पचास रुपये।नहीं, मुझे राजू जितने ही रुपये चाहिए।
इतने पैसे तो ऐसे नहीं मिल सकते।तो फिर कैसे मिल सकते हैं?
इतना-सा, उतना-सा, जितना-सा और कितना-सा का वाक्यों में प्रयोग कीजिए और उनके अर्थ भी समझाइए।
उत्तर

संवाद में सलमा और उसकी सहेली बार-बार कितने, जितने, उतने, इतने शब्दों का प्रयोग करती हैं। इन्हीं शब्दों में ‘सा’ जोड़ने पर चार नए शब्द बनते हैं। इनके अर्थ ये हैं—

शब्दअर्थकब बोलते हैंउदाहरण
इतना-साबस इतना ही, बहुत थोड़ाजो चीज़ पास है और दिख रही हैमुझे बस इतना-सा दूध चाहिए।
उतना-साउतना ही थोड़ाजो चीज़ दूर है या पहले बताई जा चुकी हैमुझे भी उतना-सा ही हलवा दीजिए।
जितना-साजिस मात्रा कादो चीज़ों की तुलना करते समयजितना-सा काम मिला था, मैंने पूरा कर लिया।
कितना-साकितनी मात्रा कापूछते समयइस डिब्बे में कितना-सा चावल बचा है?
ध्यान दीजिए: ‘सा’ लगते ही मात्रा कम हो जाती है। ‘इतना’ कहने पर मात्रा बड़ी भी हो सकती है, पर ‘इतना-सा’ कहने पर वह हमेशा थोड़ी ही रहती है। कविता में भी यही हुआ — “बस इतना-सा ही है संसार।”
संवाद से जोड़िए: सलमा कहती है “मुझे राजू जितने ही रुपये चाहिए।” यहाँ ‘जितने’ तुलना कर रहा है। सहेली कहती है “तुम्हें उतने नहीं मिल सकते।” यहाँ ‘उतने’ उसी मात्रा की ओर इशारा कर रहा है।
प्र7.
अब नीचे दिए गए शब्दों से वाक्य बनाकर सलमा की सहायता कीजिए — इतना-सा, उतना-सा, जितना-सा, कितना-सा।
उत्तर

नमूना वाक्य —

शब्दवाक्य
इतना-सानन्हा चूज़ा इतना-सा है कि हथेली पर आ जाता है।
उतना-सामेरा टिफ़िन भी उतना-सा ही है जितना तुम्हारा।
जितना-साजितना-सा पानी बचा था, मैंने पौधे में डाल दिया।
कितना-सातुम्हें कितना-सा समय और चाहिए?
याद रखिए: ये नमूने हैं। आप अपने घर, विद्यालय या खेल से जुड़े अपने वाक्य बनाइए और शिक्षक को दिखाइए।
क्यों ज़रूरी है: पुस्तक कहती है — “फिर आपको राजू जितने रुपये मिल जाएँगे।” यानी जब हम सही शब्द से अपनी बात साफ-साफ कह देते हैं, तभी सामने वाला हमारी बात ठीक से समझ पाता है।
क्या यह उपयोगी रहा?