प्र1.
“फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार”, कविता की इस पंक्ति में ‘सुकुमार’ शब्द आया है। यह ‘सु’ और ‘कुमार’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है— कोमल या कोमल अंगों वाला। आप भी इसी प्रकार कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ खोजिए।
| सु | कुमार | सुकुमार | कोमल अंगों वाला |
|---|---|---|---|
| सु | योग्य | ……… | ……… |
| सु | यश | ……… | ……… |
| सु | ……… | सुकर्म | अच्छे कर्म |
| सु | वास | ……… | ……… |
| सु | ……… | सुदर्शन | ……… |
उत्तर
भरी हुई तालिका —
| सु | दूसरा शब्द | बना हुआ शब्द | अर्थ |
|---|---|---|---|
| सु | कुमार | सुकुमार | कोमल अंगों वाला |
| सु | योग्य | सुयोग्य | बहुत योग्य, हर काम के लायक |
| सु | यश | सुयश | अच्छा नाम, अच्छी कीर्ति |
| सु | कर्म | सुकर्म | अच्छे कर्म |
| सु | वास | सुवास | अच्छी महक, सुगंध |
| सु | दर्शन | सुदर्शन | देखने में सुंदर |
नियम: ‘सु’ शब्द के आगे जुड़कर उसे ‘अच्छा’ बना देता है। इसीलिए सु + यश = अच्छा यश, सु + वास = अच्छी महक।
और शब्द बनाइए: सु + पुत्र = सुपुत्र (अच्छा बेटा), सु + स्वागत = सुस्वागत, सु + पथ = सुपथ (अच्छा रास्ता)।
मेरा वाक्य: बगीचे के फूलों की सुवास पूरे आँगन में फैल गई।
मेरा वाक्य: बगीचे के फूलों की सुवास पूरे आँगन में फैल गई।