कक्षा ४ हिंदी अध्याय 1 चिड़िया का गीत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

कविता की चिड़िया चार बार अपना ठिकाना बदलती है — अंडा, घोंसला, पेड़ की शाखें और खुला आकाश। पहले तीन ठिकानों पर वह हर बार कहती है — “तब मैं यही समझती थी, बस इतना-सा ही है संसार।” जब वह पंख पसारकर दूर तक उड़ती है, तभी उसे समझ आता है — “बहुत बड़ा है यह संसार।” कविता का भाव यह है कि जितना हम बाहर निकलते और देखते हैं, उतनी ही हमारी समझ बढ़ती जाती है। अभ्यास में विपरीत शब्द, ‘सु’ से बने शब्द, ‘इतना-सा/उतना-सा/जितना-सा/कितना-सा’, पक्षियों का भोजन और पहेलियाँ आती हैं। पृष्ठ 16 का पाठ ‘मति की उड़ान’ भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल से हमारा परिचय कराता है।

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थकविता/पाठ की पंक्तिआपका अपना वाक्य
घोंसलापक्षी का घर, जो तिनकों से बनता हैफिर मेरा घर बना घोंसलाआँगन के पेड़ पर चिड़िया ने घोंसला बनाया है।
तिनकासूखी घास या डंठल का छोटा टुकड़ासूखे तिनकों से तैयारचिड़िया चोंच में तिनका लेकर उड़ी।
शाखपेड़ की डालफिर मैं निकल गई शाखों परआम की शाख पर कोयल बैठी है।
सुकुमारकोमल, कोमल अंगों वालाहरी-भरी थीं जो सुकुमारनन्हें पौधे की पत्तियाँ बहुत सुकुमार हैं।
पसारनाफैलानाउड़ी दूर तक पंख पसारमोर ने अपने पंख पसार दिए।
संसारदुनिया, सारा जगतबहुत बड़ा है यह संसार।यह संसार बहुत सुंदर है।
इतना-साबहुत छोटा, इतनी-सी मात्रा काबस इतना-सा ही है संसार।मुझे बस इतना-सा दूध चाहिए।
कलरवपक्षियों की मीठी चहचहाहटपक्षियों की चहचहाहट (कलरव)सुबह बगीचे में पक्षियों का कलरव गूँज रहा था।
नीड़घोंसलानीड़ नहीं वह कभी बनातीकोयल अपना नीड़ नहीं बनाती।
सन्मार्गअच्छा रास्ता, सही राहसबको ही सन्मार्ग दिखाएँअच्छे मित्र हमें सन्मार्ग पर ले जाते हैं।
  1. ऐसा वर दो
  2. बातचीत के लिए
  3. कविता की बात
  4. कविता की बात
  5. सोचिए और लिखिए
  6. समझ और अनुभव
  7. चित्रों की भाषा
  8. अनुमान और कल्पना
  9. कल्पना की उड़ान
  10. आकार-प्रकार
  11. भाषा की बात
  12. पाठ से आगे
  13. कलाकारी
  14. आनंदमयी गतिविधि
  15. बोलिए फटाफट
  16. मति की उड़ान
क्या यह उपयोगी रहा?