प्र1.
चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?
उत्तर
चिड़िया को यह संसार तीन बार छोटा लगा—
- जब वह अंडे के भीतर थी — “सबसे पहले मेरे घर का, अंडे जैसा था आकार”।
- जब उसका घर घोंसला बना — “फिर मेरा घर बना घोंसला, सूखे तिनकों से तैयार”।
- जब वह पेड़ की हरी शाखों पर निकली — “फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार”।
इन तीनों बार वह एक ही बात कहती है — “तब मैं यही समझती थी, बस इतना-सा ही है संसार।”
क्यों: हर बार उसने उतना ही देखा था जितना उसके आस-पास था। जो हम नहीं देखते, उसके बारे में हम सोच भी नहीं पाते। इसीलिए उसकी दुनिया उसे छोटी लगती रही।