कक्षा ४ हिंदी अध्याय 1 कविता की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों का मिलान उनके नीचे दी गई उपयुक्त पंक्तियों से कीजिए—
फिर मेरा घर बना घोंसला सूखे तिनकों से तैयार आखिर जब मैं आसमान में उड़ी दूर तक पंख पसार फिर मैं निकल गई शाखों पर हरी-भरी थीं जो सुकुमार सबसे पहले मेरे घर का अंडे जैसा था आकार 1 2 तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार। तभी समझ में मेरी आया बहुत बड़ा है यह संसार। ऊपर के चार खानों को नीचे के दो खानों से जोड़िए।
पुस्तक के पृष्ठ 5 का मिलान-कार्य — ऊपर कविता के चार अंश (क, ख, ग, घ) और नीचे दो अंश (1, 2)।
उत्तर

मिलान इस प्रकार होगा —

कविता का अंशइससे जुड़ेगा
क. फिर मेरा घर बना घोंसला / सूखे तिनकों से तैयार1. तब मैं यही समझती थी / बस इतना-सा ही है संसार।
ख. आखिर जब मैं आसमान में / उड़ी दूर तक पंख पसार2. तभी समझ में मेरी आया / बहुत बड़ा है यह संसार।
ग. फिर मैं निकल गई शाखों पर / हरी-भरी थीं जो सुकुमार1. तब मैं यही समझती थी / बस इतना-सा ही है संसार।
घ. सबसे पहले मेरे घर का / अंडे जैसा था आकार1. तब मैं यही समझती थी / बस इतना-सा ही है संसार।
क्यों: कविता में चिड़िया के तीन छोटे ठिकाने हैं — अंडा, घोंसला और पेड़ की शाखें। इन तीनों के बाद वह हर बार एक ही बात दोहराती है, “बस इतना-सा ही है संसार।” केवल चौथी बार, जब वह खुले आसमान में उड़ती है, तब उसकी बात बदल जाती है — “बहुत बड़ा है यह संसार।”
संकेत: कविता में सही क्रम यह है — घ ➜ क ➜ ग ➜ ख। इसी क्रम में चिड़िया की दुनिया बड़ी होती जाती है।
क्या यह उपयोगी रहा?