कक्षा ४ हिंदी अध्याय 1 समझ और अनुभव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
जब कोई शिशु चिड़िया घोंसले से बाहर आती है तो उसे लगता है कि संसार बहुत बड़ा है। क्या आपको भी घर से बाहर निकलते समय ऐसा ही अनुभव होता है और क्यों?
उत्तर

हाँ, ऐसा अनुभव होता है — और कारण भी वही है जो चिड़िया का था।

घर में हमें हर चीज़ पहले से पता होती है — कौन-सा कमरा कहाँ है, कौन क्या कहेगा। बाहर निकलते ही बहुत-सी नई चीज़ें एक साथ सामने आ जाती हैं। तब पहले थोड़ा डर लगता है, फिर अच्छा लगने लगता है।

नमूना उत्तर: पहले दिन जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान तक गया, तो रास्ता मुझे बहुत लंबा लगा। इतनी गाड़ियाँ, इतने लोग! घर लौटकर मुझे लगा कि मेरे घर के बाहर तो बहुत बड़ी दुनिया है। अब वही रास्ता मुझे छोटा लगता है, क्योंकि अब मैं उसे जान गया हूँ।
क्यों: जो जगह हम जानते हैं वह छोटी लगती है और जो नहीं जानते वह बड़ी। जैसे-जैसे हम जानने लगते हैं, डर कम होता जाता है।
प्र2.
एक शिशु पक्षी की तरह आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। अब तक आपमें भी कई परिवर्तन आए हैं। नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार अपने अंदर आए परिवर्तनों को लिखिए — • शारीरिक परिवर्तन • रुचियों में परिवर्तन • समझ में परिवर्तन • खान-पान में परिवर्तन • चित्रकारी • खेल • गीत-संगीत • पढ़ना-लिखना • नृत्य और अभिनय
उत्तर

यह काम आपको स्वयं करना है। कैसे करें —

  1. अपनी लेखन-पुस्तिका में एक तालिका बनाइए। एक तरफ शीर्षक, दूसरी तरफ ‘पहले’ और ‘अब’।
  2. हर शीर्षक के सामने बस एक छोटा वाक्य लिखिए।
  3. घर पर माता-पिता से पूछिए और अपनी पुरानी तस्वीरें देखिए — इससे बहुत-सी बातें याद आ जाएँगी।
शीर्षकपहलेअब
शारीरिक परिवर्तनमैं बहुत छोटा था, दो दूध के दाँत गिरे नहीं थेमैं लंबा हो गया हूँ, नए दाँत आ गए हैं
रुचियों में परिवर्तनबस खिलौनों से खेलता थाअब कहानी की किताबें पढ़ना अच्छा लगता है
समझ में परिवर्तनघड़ी देखना नहीं आता थाअब समय देखकर खुद तैयार हो जाता हूँ
खान-पान में परिवर्तनकेवल दूध और खिचड़ीअब रोटी-सब्जी, दाल और फल सब खाता हूँ
चित्रकारीटेढ़ी-मेढ़ी लकीरें खींचता थाअब पेड़, घर और चिड़िया बना लेता हूँ
खेलकेवल दौड़-भागअब कबड्डी और खो-खो के नियम भी जानता हूँ
गीत-संगीतबस ताली बजाता थाअब दो-तीन गीत पूरे याद हैं
पढ़ना-लिखनाकेवल अक्षर पहचानता थाअब पूरा पाठ पढ़ और लिख लेता हूँ
नृत्य और अभिनयशरमाता थाअब कक्षा के सामने अभिनय कर लेता हूँ
याद रखिए: ये केवल नमूने हैं। अपने सच्चे बदलाव लिखिए और कक्षा में सुनाइए। यदि कोई और बदलाव आपको याद आए तो उसे भी जोड़िए।
प्र3.
पहले चिड़िया को लगता था कि यह संसार बहुत छोटा है परंतु सच्चाई कुछ और ही थी। उस समय आपको कैसा लगा जब आपने इनमें से किसी एक को पहली बार देखा — • रेलगाड़ी • मेट्रो ट्रेन • मॉल • समुद्र • पहाड़ • वायुयान • जलयान • जंगल • चार या छह वीथियों वाली सड़कें • खेत • रेगिस्तान या मरुस्थल • नदी
उत्तर

सूची में से कोई एक चीज़ चुनिए जिसे आपने सचमुच पहली बार देखा हो। फिर तीन बातें लिखिए—

  1. आपने उसे कब और किसके साथ देखा।
  2. वह देखने में कैसी लगी — उसका आकार, रंग, आवाज़।
  3. उस समय आपके मन में क्या आया।
नमूना उत्तर (समुद्र): पिछली छुट्टियों में मैं पहली बार परिवार के साथ समुद्र देखने गया। पानी इतनी दूर तक फैला था कि आखिर कहीं दिखाई ही नहीं देता था। लहरें आकर मेरे पैरों को छू जातीं और वापस लौट जातीं। मैंने माँ से पूछा कि इसका दूसरा किनारा कहाँ है। तब मुझे भी चिड़िया जैसा लगा — मैंने सोचा, यह संसार तो सचमुच बहुत बड़ा है!
क्यों ऐसा लगता है: हमारी आँखें जितना देख चुकी होती हैं, उतने को ही हम ‘पूरा’ मान लेते हैं। जब उससे बड़ी कोई चीज़ सामने आती है, तो हमारी समझ एक साथ बड़ी हो जाती है।
संकेत: आपके और भी अनुभव हो सकते हैं। उन्हें भी कक्षा में अवश्य साझा कीजिए।
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