कक्षा ४ हिंदी अध्याय 1 ऐसा वर दो के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
इस प्रार्थना में बच्चे भगवान से कौन-कौन से वर माँगते हैं?
उत्तर

बच्चे भगवान से पाँच बातें माँगते हैं—

  • जग के सारे सद्गुण हमारे भीतर भर दीजिए।
  • हम फूलों जैसे मुस्कराएँ और सब पर प्रेम लुटाएँ।
  • हम दीपक बनकर अँधेरे से लड़ें और कभी दुख से न घबराएँ।
  • हमारा तन और मन दोनों मजबूत हो जाएँ।
  • हमें ऐसा ज्ञान और बुद्धि मिले कि हम सच के रास्ते पर चलें।
क्यों: बच्चे कोई चीज़ नहीं माँग रहे। वे केवल अच्छे गुण माँग रहे हैं, क्योंकि अच्छे गुण ही जीवन भर काम आते हैं।
प्र2.
‘हम फूलों जैसे मुस्काएँ, सब पर प्रेम-सुगंध लुटाएँ,’ — इन पंक्तियों का सरल अर्थ बताइए।
उत्तर

सरल अर्थ: हम हमेशा फूल की तरह हँसते-मुस्कराते रहें और सबसे प्रेम से मिलें।

कवि जो चित्र बना रहे हैं: कवि हमें एक खिले हुए फूल जैसा बता रहे हैं। फूल दो काम करता है — वह खिलकर सबको अच्छा लगता है, और अपनी सुगंध चारों ओर बाँट देता है। कवि कहते हैं कि हमारा प्रेम भी उसी सुगंध जैसा हो, जो हर किसी तक पहुँचे।

क्यों: फूल सुगंध देते समय यह नहीं देखता कि सामने कौन है। कवि चाहते हैं कि हमारा प्रेम भी सबके लिए एक-सा हो।
प्र3.
‘दीपक बनें, लड़ें हम तम से,’ — इस पंक्ति में कवि क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर

‘तम’ का अर्थ है अँधेरा। कवि कहते हैं कि हम दीपक की तरह बनें और अँधेरे से लड़ें।

यहाँ अँधेरा केवल रात का अँधेरा नहीं है। अँधेरे का अर्थ है — दुख, डर और अनजानपन। दीपक छोटा-सा होता है, फिर भी वह अँधेरा भगा देता है। कवि चाहते हैं कि हम भी छोटे होकर भी दूसरों के जीवन में उजाला करें।

संकेत: अगली पंक्ति ‘ज्योतिर्मय हो यह जग हमसे’ इसी बात को पूरा करती है — हमसे सारा जग रोशन हो जाए।
प्र4.
‘सन्मार्ग’ शब्द का अर्थ क्या है? इसे अपने एक वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर

सन्मार्ग = अच्छा रास्ता, सही राह। यह ‘सत्’ और ‘मार्ग’ से मिलकर बना है।

प्रार्थना की पंक्ति है — “सत्य-मार्ग पर बढ़ते जाएँ, सबको ही सन्मार्ग दिखाएँ”। यानी हम खुद सच के रास्ते पर चलें और दूसरों को भी वही रास्ता दिखाएँ।

मेरा वाक्य: अच्छी पुस्तकें हमें सन्मार्ग पर चलना सिखाती हैं।

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