कक्षा ४ हिंदी अध्याय 1 आनंदमयी गतिविधि के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे दिए गए अक्षर जाल में पक्षियों के नाम खोजिए और उनके बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए। (‘नीलकंठ’ का उदाहरण पहले से घेरा हुआ है।)
नीकंती
मै
नाबू
चीगौरैया
बुबुबा
साबा
उत्तर

इस जाल में कुल दस पक्षियों के नाम छिपे हैं। एक (नीलकंठ) पुस्तक ने घेरकर दिखा दिया है, बाकी नौ ये हैं—

पक्षीकहाँ मिलाकैसे पढ़ें
नीलकंठपहली पंक्ति, खाने 1–4बाएँ से दाएँ (दिया हुआ)
तीतरपाँचवाँ खाना, पंक्ति 1–3ऊपर से नीचे
मैनापहला खाना, पंक्ति 2–3ऊपर से नीचे
बतखदूसरी पंक्ति, खाने 2–4बाएँ से दाएँ
कबूतरतीसरी पंक्ति, खाने 2–5बाएँ से दाएँ
चीलचौथी पंक्ति, खाने 1–2बाएँ से दाएँ
गौरैयाचौथी पंक्ति, खाने 3–5बाएँ से दाएँ
बुलबुलपाँचवीं पंक्ति, खाने 1–4बाएँ से दाएँ
सारसछठी पंक्ति, खाने 1–3बाएँ से दाएँ
बाजछठी पंक्ति, खाने 4–5बाएँ से दाएँ (पाँचवें खाने में ऊपर से नीचे भी पढ़ा जा सकता है)

इन पक्षियों के बारे में थोड़ी जानकारी —

  • नीलकंठ — गले और पंखों पर सुंदर नीला रंग। खेतों में कीड़े खाता है।
  • तीतर — ज़मीन पर रहने वाला पक्षी, कम उड़ता है, झाड़ियों में छिपता है।
  • मैना — पीली चोंच और पीले पैर। बोलना सीख सकती है।
  • बतख — पानी में तैरती है, पैरों में जाली जैसी झिल्ली होती है।
  • कबूतर — पुराने ज़माने में चिट्ठी ले जाता था। दाने चुगता है।
  • चील — बहुत ऊँचा उड़ती है और ऊपर से नीचे का शिकार देख लेती है।
  • गौरैया — हमारे घरों में, पंखे और छज्जे के पीछे घोंसला बनाती है।
  • बुलबुल — सिर पर छोटी कलगी होती है, मीठा गाती है।
  • सारस — बहुत लंबे पैर और लंबी गर्दन। जोड़े में रहता है।
  • बाज — बहुत तेज़ उड़ने वाला शिकारी पक्षी, नज़र बहुत तेज़ होती है।
संकेत: नाम खोजने के दो ही रास्ते आज़माइए — बाएँ से दाएँ और ऊपर से नीचे। पहले हर पंक्ति पढ़िए, फिर हर खाना ऊपर से नीचे पढ़िए।
प्र2.
जब शिशु पक्षी चहचहाते हैं तो एक मधुर ध्वनि सुनाई देती है। आइए, हम भी शिशु पक्षियों की तरह चहचहाएँ। सभी बच्चे अपनी एक हथेली अपने होठों पर रखें। सभी मिलकर चीं-चीं की ध्वनि निकालें।
उत्तर

यह पूरी कक्षा के साथ करने वाली गतिविधि है। कैसे करें —

  1. सब बच्चे अपनी एक हथेली होठों पर हल्के-से रखिए।
  2. अब सब मिलकर धीरे-धीरे चीं-चीं की ध्वनि निकालिए। हथेली के कारण आवाज़ काँपती हुई निकलेगी — ठीक शिशु पक्षी जैसी।
  3. पहले धीमे, फिर थोड़ा तेज़, फिर से धीमे — जैसे सुबह पक्षी जागते हैं।
  4. अब रुककर सुनिए। पूरी कक्षा पेड़ की शाखाओं जैसी लगेगी।
  5. इसके बाद पुस्तक के सुझाव के अनुसार बारी-बारी से किसी भी पक्षी की ध्वनि निकालिए — कौआ, कोयल, मुर्गा, तोता, कबूतर — और तालियों की गड़गड़ाहट से उसका स्वागत कीजिए।
इससे क्या सीखते हैं: हर पक्षी की आवाज़ अलग होती है। इसी अलग आवाज़ से पक्षी एक-दूसरे को पहचानते हैं और बुलाते हैं। इसी कारण सुबह-शाम कलरव सुनाई देता है।
नमूना उत्तर (कौन-सा पक्षी कैसे बोलता है): कौआ — काँव-काँव, कोयल — कुहू-कुहू, मुर्गा — कुकड़ूँ-कूँ, चिड़िया — चीं-चीं, कबूतर — गुटर-गूँ।
प्र3.
नीचे पशु-पक्षियों से संबंधित कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पहेलियों का उपयुक्त चित्रों से मिलान कीजिए — (1) पंखों में नाखून हूँ रखता, रात अँधेरे में ही उड़ता। दिन में न मैं भोजन पाऊँ, उलटा होकर के सो जाऊँ। (2) पत्तों जैसा उसका रंग, कुतर-कुतर खाने का ढंग। घरों में भी पाला जाता, नाम बताओ उसका ज्ञाता। (3) नीड़ नहीं वह कभी बनाती, बागों की रानी कहलाती। काला रंग है उसका भैया, सबके दिल को खूब लुभाती। (4) दिनभर सूरत नहीं दिखाता, रात कुलाँचे भरता। और समझता ऐसा जैसे, सूरज उससे डरता।
चित्र 1 चित्र 2 चित्र 3 चित्र 4
पृष्ठ 14 पर दिए गए चार चित्र — चित्र 1 काले रंग का लंबी पूँछ वाला पक्षी, चित्र 2 बड़ी-बड़ी आँखों और सिर पर दो कलगियों वाला भूरा पक्षी, चित्र 3 चमड़े जैसे चौड़े पंखों से उड़ता जीव, चित्र 4 लाल टेढ़ी चोंच वाला हरा पक्षी।
उत्तर

सही मिलान —

पहेलीउत्तरचित्रपहचान की कुंजी
1. पंखों में नाखून हूँ रखता…चमगादड़चित्र 3उलटा लटककर सोता है और रात में उड़ता है
2. पत्तों जैसा उसका रंग…तोताचित्र 4हरा रंग, कुतर-कुतरकर खाना, घरों में पाला जाना
3. नीड़ नहीं वह कभी बनाती…कोयलचित्र 1काला रंग, मीठी कूक, अपना घोंसला नहीं बनाती
4. दिनभर सूरत नहीं दिखाता…उल्लूचित्र 2दिन में नहीं दिखता, रात में जागता है
पहेली 1 उल्लू क्यों नहीं: उल्लू भी रात में उड़ता है, पर उलटा लटककर सोना केवल चमगादड़ करता है। ‘पंखों में नाखून’ भी चमगादड़ की ही पहचान है — उसके पंख के किनारे पर छोटा नाखून होता है।
पहेली 3 का मज़ा: ‘नीड़’ का अर्थ है घोंसला। कोयल अपना घोंसला नहीं बनाती, वह कौए के घोंसले में अंडे रख देती है। इसीलिए पहेली कहती है — “नीड़ नहीं वह कभी बनाती।”
पुस्तक की एक बात ध्यान दीजिए: पहेली 1 में ‘पंखों में नाखून हूँ रखता’ और पहेली 4 में ‘सूरज उससे डरता’ लिखा है। बोलचाल में हम ‘मैं रखता हूँ’ और ‘सूरज उससे डरता है’ कहते हैं। पहेलियों में तुक मिलाने के लिए शब्द इसी तरह छोटे कर दिए जाते हैं।
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