प्र1.
शिक्षक की सहायता से इस कविता को कक्षा में नाटक के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
यह काम कक्षा में मिलकर करना है। नीचे तैयारी का तरीका दिया गया है।
कैसे कीजिए —
- पात्र बाँटिए — चाचा, छोटू, और दो-तीन बच्चे जो दादी, अम्मा और बड़के भैया बनेंगे।
- सामान जुटाइए — गत्ते का बना एक कैमरा, चाचा के लिए चश्मा और झोला।
- संवाद याद कीजिए — कविता की पंक्तियाँ ही संवाद हैं।
- अभिनय कीजिए — चाचा दरवाजे से आवाज़ लगाएँ, छोटू दौड़कर आए और अचरज से कैमरे को देखे।
- अंत में ‘क्लिक’ कहकर सब बच्चे एक साथ मुसकराकर खड़े हो जाएँ।
नमूना संवाद:
चाचा (दरवाजे से) — कहाँ गया, जल्दी आ छोटू, बैठ यहाँ, खींचूँगा फोटू!
छोटू (दौड़कर आते हुए) — यह क्या है चक्कर, छिपा हुआ क्या इसमें पेंटर?
चाचा (हँसकर) — वही रहा बुद्धू का बुद्धू! है प्रकाश-छाया का खेल, बना उसी से सुंदर मेल।
छोटू (दौड़कर आते हुए) — यह क्या है चक्कर, छिपा हुआ क्या इसमें पेंटर?
चाचा (हँसकर) — वही रहा बुद्धू का बुद्धू! है प्रकाश-छाया का खेल, बना उसी से सुंदर मेल।
संकेत: बोलते समय आवाज़ ऊँची-नीची कीजिए। चाचा की आवाज़ में उत्साह हो और छोटू की आवाज़ में अचरज।