कक्षा ४ हिंदी अध्याय 10 कैमरा के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
कविता के दो पात्र हैं — चाचा और छोटू। चाचा नया कैमरा लेकर आते हैं और दरवाजे से ही छोटू को पुकारते हैं। छोटू को अचरज होता है। वह पूछता है कि कहीं कैमरे के भीतर कोई पेंटर तो नहीं छिपा है। चाचा हँसकर बताते हैं कि यह तो प्रकाश और छाया का खेल है। उसी मेल से चित्र बनता है। कविता कहती है कि क्लिक करते ही फूल, कोयल, कौआ, गौरैया, दादी, अम्मा, बड़के भैया — सब कागज पर आ जाते हैं। अंत में कवि कहता है कि कैमरा हू-ब-हू चित्र बनाता है, इसलिए उसे अपना मित्र समझो। पाठ के अंत में ‘सुन, इमली के दाने सुन!’ (रमेश तैलंग) और हँसी के पाँच ‘ठहाके’ दिए गए हैं।
अभ्यास
- बातचीत के लिए
- पाठ के भीतर
- सोचिए और लिखिए
- भाषा की बात
- शब्द खेल
- कविता से आगे
- पुस्तकालय या अन्य स्रोत से
- कविता मंचन
- कैमरे से संवाद
- कलाकारी
- सुन, इमली के दाने सुन!
- ठहाके