हँसी इस बात पर है कि दिन में तारे दिखते ही नहीं, इसलिए मीता का उत्तर बिलकुल उलटा है।
मीता कहती है कि अँधेरे के कारण वह तारे नहीं गिन पा रही। पर सच यह है कि तारे अँधेरे में ही दिखते हैं। दिन की रोशनी में तो एक भी तारा नज़र नहीं आता।
अद्यतन2026-09-19
हँसी इस बात पर है कि दिन में तारे दिखते ही नहीं, इसलिए मीता का उत्तर बिलकुल उलटा है।
मीता कहती है कि अँधेरे के कारण वह तारे नहीं गिन पा रही। पर सच यह है कि तारे अँधेरे में ही दिखते हैं। दिन की रोशनी में तो एक भी तारा नज़र नहीं आता।
हँसी इस बात पर है कि सोनू ने ‘धूप’ शब्द का गलत अर्थ लगा लिया।
सोनू सोचता रहा कि आज बादल छाए थे, तो धूप कहाँ से लाता!
हँसी इस बात पर है कि रश्मि का उत्तर अनोखा भी है और सही भी।
राहुल शायद कोई बहादुर आदमी सुनना चाहता था। पर रश्मि ने सबसे सीधी बात कह दी — शेर का बच्चा अपने ही पिता से क्यों डरेगा!
हँसी इस बात पर है कि विद्यार्थी ने व्याकरण का उत्तर न देकर एक चीज़ का नाम बता दिया।
‘तिनका’ का बहुवचन ‘तिनके’ होता है। पर विद्यार्थी ने सोचा कि बहुत सारे तिनके एक साथ बाँध दो तो झाड़ू बन जाती है — इसलिए उसने ‘झाड़ू’ कह दिया।
हँसी इस बात पर है कि प्रमोद ने चींटियों को अपना जासूस बना लिया।
माँ ने मिठाई छिपा दी थी, इसलिए प्रमोद को पता नहीं था। पर चींटियाँ मीठे की गंध पाकर सीधे मिठाई तक पहुँच जाती हैं। प्रमोद ने सोचा कि उनके पीछे-पीछे चलकर मिठाई तक पहुँच जाएगा।