कक्षा ४ हिंदी अध्याय 10 सुन, इमली के दाने सुन! के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कवि को इमली का दाना कहाँ मिला और उसने उसे कैसे उठाया?
उत्तर

कवि को इमली का दाना गली में मिला। उसने झुककर उसे उठाया।

तुझे गली में पाया था,
झुककर तुझे उठाया था,
क्यों: दाना बहुत छोटा होता है और नीचे पड़ा था। इसीलिए उसे उठाने के लिए झुकना पड़ा।
प्र2.
कवि उस दाने का क्या करना चाहता था?
उत्तर

कवि उसे मिट्टी के नीचे दबाकर चुपके से रख देना चाहता था। फिर वह कुछ दिन तक चुपचाप उसे देखता रहना चाहता था।

सोचा, तुझे उठा करके,
मिट्टी तले दबा करके,
चुपके से रख छोड़ूँगा,
कुछ दिन यूँ ही देखूँगा।
क्यों: बीज को मिट्टी में दबाने पर ही वह अंकुर बनता है। कवि यही होते हुए देखना चाहता था।
प्र3.
कविता के अनुसार दाने को अंकुर बनने के लिए किस चीज़ की ज़रूरत है?
उत्तर

उसे बारिश और नम मिट्टी की ज़रूरत है।

फिर जब बारिश आएगी,
मिट्टी नम हो जाएगी,
अंकुर बन तू फूटेगा,
क्यों: सूखी मिट्टी में बीज वैसा का वैसा पड़ा रहता है। पानी मिलने पर ही वह फूलकर फूटता है और अंकुर निकलता है।
प्र4.
कवि ने दाने के बड़े होने की जो कल्पना की, उसे क्रम से लिखिए।
उत्तर

कवि ने यह क्रम बताया है —

क्रमक्या होगा
1बारिश आएगी और मिट्टी नम हो जाएगी
2दाना अंकुर बनकर फूटेगा
3खुली हवा में झूमेगा
4पौधा बन जाएगा और दिन दूना बढ़ेगा
5उस पर फल आएँगे और सब इमली खाएँगे
क्यों: हर पौधा इसी क्रम से बड़ा होता है — पहले बीज, फिर अंकुर, फिर पौधा, फिर पेड़ और फल।
प्र5.
“जब तक मेरी मति जागी, तुझे गिलहरी ले भागी।” — इन पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

इसका अर्थ है — जब तक कवि की समझ आई और वह सँभला, तब तक गिलहरी दाना लेकर भाग चुकी थी।

यहाँ मति का अर्थ है बुद्धि या समझ। ‘मति जागी’ यानी ध्यान आया।

क्यों: दाना कवि के हाथ से फिसल गया था। वह उसे उठाने ही वाला था कि पास बैठी गिलहरी झपटकर ले गई। कवि की सारी योजना धरी रह गई।
संकेत: कविता का अंत हँसी वाला है। कवि अपनी ही देर पर मुसकरा रहा है।
क्या यह उपयोगी रहा?