कक्षा ४ हिंदी अध्याय 9 मिठाइयों का सम्मेलन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
छगनलाल हलवाई दुकान बंद करके घर चले गए। मौका मिलते ही मिठाइयों ने सम्मेलन किया। लड्डू दादा को सम्मेलन का अध्यक्ष बनाया गया। बाकी मिठाइयाँ श्रोता बनकर बैठीं। कलाकंद भाई ने बात उठाई कि डॉक्टर कुछ लोगों को मिठाई खाने से रोक रहे हैं। रसगुल्ला ने कारण बताया — मिठाइयों की अति मिठास ही उनकी उपेक्षा का कारण है। रबड़ी जी ने कहा — “जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है।” गुझिया ने शक्कर बढ़ने की बात कही। लड्डू दादा का निर्णय — मिठाइयाँ अपनी शक्कर घटाएँ, लोग जीभ पर नियंत्रण रखें, श्रम करें और स्वस्थ रहें। पाठ के अंत में ‘जलेबी’ कविता है, जिसमें चंदू चाचा गरमागरम जलेबी बेचते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
| पात्र | सम्मेलन में भूमिका | उसने क्या कहा | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| छगनलाल हलवाई | मिठाई की दुकान के मालिक | दुकान बंद करके अपने घर चले गए | 105 |
| लड्डू दादा | सम्मेलन के अध्यक्ष | शक्कर की मात्रा कम करो; लोग जीभ पर नियंत्रण रखें | 105–106 |
| कलाकंद भाई | श्रोता | आजकल डॉक्टर कुछ लोगों को हमारा सेवन करने से रोक रहे हैं | 105 |
| सोनपापड़ी | श्रोता | क्या आप जानते हैं कि डॉक्टर लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं? | 105 |
| जलेबी बहन | श्रोता | बरफ़ी बहन तुम ही बता दो न! | 105 |
| बरफ़ी बहन | श्रोता | आप इस तरह मेरा मजाक मत उड़ाइए। | 105 |
| मैसूरपाक | श्रोता | मीठा अपना स्वाद है, मीठे-मीठे बोल। | 105 |
| रसगुल्ला | श्रोता | हमारी अति मिठास ही हमारी उपेक्षा का कारण है। | 106 |
| गुलाबजामुन | श्रोता | फिर हमें मिठाई कौन कहेगा? | 106 |
| गुझिया | श्रोता | कुछ लोगों के शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ रही है। | 106 |
| रबड़ी जी | श्रोता | जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है। | 106 |
| पेड़ा | श्रोता | शुभ कार्यों में मिठाई बाँटने की प्रथा को भला कौन बंद कर सकता है? | 106 |
अभ्यास
- बातचीत के लिए
- पाठ के भीतर
- हमारी मिठास
- भाषा की बात
- साग-भाजियों का सम्मेलन
- हम और हमारा स्वास्थ्य
- भूल-भुलैया
- चटपटी चाट
- जलेबी (कविता)