कक्षा ४ हिंदी अध्याय 9 जलेबी (कविता) के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कविता में जलेबी कौन बेच रहा है और किस दाम पर बेच रहा है?
उत्तर

कविता में चंदू चाचा जलेबी बेच रहे हैं।

वे गरमागरम जलेबी बेचते हैं और आवाज लगाते हैं — “एक पाव बीस में ले लो, मीठी मस्त जलेबी।” कविता में केवल ‘बीस’ लिखा है, यानी एक पाव जलेबी का दाम बीस रुपए है।

क्यों: दुकानदार आवाज लगाकर ग्राहक बुलाते हैं। इसीलिए चंदू चाचा दाम भी साथ-साथ बता देते हैं।
संकेत: ‘पाव’ तौलने की एक माप है। एक किलो का चौथा भाग एक पाव होता है।
प्र2.
कवि ने जलेबी का आकार कैसा बताया है?
उत्तर

कवि कहता है — “टेढ़ी-मेढ़ी अंदर से, बाहर गोल-गोल।”

इसका अर्थ है कि जलेबी के भीतर के घुमाव टेढ़े-मेढ़े होते हैं, पर बाहर से वह गोल दिखाई देती है।

क्यों: जलेबी बनाते समय घोल को कड़ाही में गोल-गोल घुमाकर डाला जाता है। इसी से भीतर टेढ़े-मेढ़े घुमाव बन जाते हैं।
संकेत: पाठ के पृष्ठ 113 की भूल-भुलैया भी इसी टेढ़े-मेढ़े आकार से बनाई गई है।
प्र3.
तन्नु ने दादी से क्या पूछा? कविता में इसका क्या उत्तर मिलता है?
उत्तर

तन्नु ने दादी से पूछा — “इनमें भरता कैसे रस?”

यानी वह जानना चाहती है कि जलेबी के भीतर मीठा रस कैसे भर जाता है।

कविता की अगली पंक्तियाँ ही उत्तर देती हैं —

  1. पहले जलेबी कड़क कड़ाही में तली जाती है।
  2. फिर वह चाशनी में डूबती है और रस से भर जाती है।
  3. तब वह ‘सरस’ और ‘मनभावन’ हो जाती है।
क्यों: तली हुई जलेबी के भीतर छोटी-छोटी खाली जगह रह जाती है। चाशनी में डूबते ही वह जगह मीठे रस से भर जाती है।
संकेत: ‘सरस’ का अर्थ है रस से भरी हुई। ‘मनभावन’ का अर्थ है जो मन को भा जाए।
प्र4.
“खाओ, घर ले जाओ, मीठे हो जाएँगे बोल।” इन पंक्तियों का क्या अर्थ है?
उत्तर

चंदू चाचा कहते हैं — जलेबी यहीं खाओ और घर भी ले जाओ। जो मीठा खाएगा, उसके बोल भी मीठे हो जाएँगे।

यहाँ ‘मीठे बोल’ का अर्थ है — प्यार से बोलना, मीठी बातें करना।

क्यों: मीठा खाने से मन खुश हो जाता है। खुश मन से निकली बात अपने आप मीठी लगती है।
संकेत: यही बात ‘मिठाइयों का सम्मेलन’ में मैसूरपाक ने भी कही थी — “मीठा अपना स्वाद है, मीठे-मीठे बोल। बस मिठास फैलाइए, मन दरवाजे खोल।।”
प्र5.
कविता की अंतिम पंक्तियों से चंदू चाचा के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर

अंतिम पंक्तियाँ हैं — “चंदू बातें बहुत बनाता, बिकती जाती, बिकती जाती।”

इससे पता चलता है कि चंदू चाचा बहुत बातूनी और हँसमुख दुकानदार हैं। वे बातें करते जाते हैं और जलेबी बिकती जाती है।

क्यों: मीठी और मजेदार बातें सुनकर ग्राहक रुक जाते हैं। रुके हुए ग्राहक खरीद भी लेते हैं। इसीलिए चंदू चाचा की जलेबी जल्दी बिक जाती है।
संकेत: ‘बिकती जाती, बिकती जाती’ एक ही बात दो बार कही गई है। इससे लगता है कि बिक्री लगातार चलती रहती है।
क्या यह उपयोगी रहा?