प्र1.
साग-भाजियों की बातचीत को पूरा कीजिए — आलू, बैंगन, टमाटर, प्याज, मिर्च, भिंडी, गोभी, करेला, पालक, लौकी।
उत्तर
पृष्ठ 112 का संवाद। हर साग-भाजी का चित्र भी बना है। पहले दो संवाद पुस्तक ने लिखे हैं।
एक नमूना संवाद। आप इससे अलग वाक्य भी लिख सकते हैं।
यह कल्पना का काम है। पुस्तक ने आलू और बैंगन के संवाद लिखकर दिखा दिए हैं।
| पात्र | संवाद |
|---|---|
| आलू | मैं साग-भाजियों का राजा हूँ। मेरे बिना सारी साग-भाजियाँ अधूरी हैं। |
| बैंगन | तुम राजा हो तो क्या हुआ? मैं भी कम स्वादिष्ट नहीं! |
| टमाटर | ……………………………………………… |
| प्याज | ……………………………………………… |
| मिर्च | ……………………………………………… |
| भिंडी | ……………………………………………… |
| गोभी | ……………………………………………… |
| करेला | ……………………………………………… |
| पालक | ……………………………………………… |
| लौकी | ……………………………………………… |
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए —
- हर साग-भाजी अपने बारे में एक बात कहे — अपना रंग, आकार, स्वाद या गुण।
- वाक्य छोटा और बोलचाल जैसा हो, जैसे पाठ की मिठाइयाँ बोलती हैं।
- अंत में कोई एक साग-भाजी झगड़ा मिटा दे। तभी बात पूरी होती है।
नमूना उत्तर —
| पात्र | संवाद |
|---|---|
| आलू | मैं साग-भाजियों का राजा हूँ। मेरे बिना सारी साग-भाजियाँ अधूरी हैं। |
| बैंगन | तुम राजा हो तो क्या हुआ? मैं भी कम स्वादिष्ट नहीं! |
| टमाटर | मेरे बिना तो सब्ज़ी का रंग ही नहीं चढ़ता। चाट में भी मैं ही हूँ। |
| प्याज | मुझे काटते ही आँखों में पानी आ जाता है, फिर भी सब मुझे डालते हैं। |
| मिर्च | थोड़ी-सी मैं पड़ जाऊँ तो खाने में चटपटापन आ जाता है। |
| भिंडी | मैं लंबी और हरी हूँ। बच्चे मुझे बहुत चाव से खाते हैं। |
| गोभी | सर्दियों में तो मैं ही सबकी पसंद बन जाती हूँ। |
| करेला | मैं कड़वा जरूर हूँ, पर शरीर के लिए सबसे अच्छा हूँ। |
| पालक | मुझे खाने से शरीर में ताकत आती है। मैं हरी पत्तियों वाला हूँ। |
| लौकी | झगड़ो मत! सबका अपना-अपना स्वाद है, हम सब मिलकर थाली सजाते हैं। |
क्यों: ‘मिठाइयों का सम्मेलन’ में भी हर मिठाई ने पहले अपनी बात कही और अंत में अध्यक्ष ने निर्णय दिया। यही ढाँचा यहाँ भी काम आता है।