रसगुल्ला भाई के अनुसार मिठाइयों की अति मिठास ही उनकी उपेक्षा का कारण है।
पाठ में वे कहते हैं — “आप यह नहीं जानते कि हमारी अति मिठास ही हमारी उपेक्षा का कारण है।”
अद्यतन2026-09-19
रसगुल्ला भाई के अनुसार मिठाइयों की अति मिठास ही उनकी उपेक्षा का कारण है।
पाठ में वे कहते हैं — “आप यह नहीं जानते कि हमारी अति मिठास ही हमारी उपेक्षा का कारण है।”
अध्यक्ष लड्डू दादा ने तीन सुझाव दिए —
वे यह भी समझाते हैं — “शक्कर कम होने से ही हम लोगों के मन में मिठास बढ़ा सकते हैं।”
गुलाबजामुन ने यह बात डर के कारण कही।
अभी-अभी लड्डू दादा ने कहा था कि मिठाइयों को अपने में शक्कर की मात्रा कम करनी चाहिए। मिठाई की पहचान ही उसका मीठापन है। गुलाबजामुन को लगा कि शक्कर कम हो गई तो वे मीठे ही नहीं रहेंगे। फिर लोग उन्हें मिठाई क्यों कहेंगे?
क्योंकि लोग मिठाई खाते समय अति कर देते हैं।
रबड़ी जी कहती हैं — “जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है। हमारा सेवन करते समय लोग अति कर देते हैं और बाद में भुगतते हैं।” गुझिया भी बताती है कि कुछ लोगों के शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ रही है।
इसलिए लड्डू दादा कहते हैं कि लोग अपनी जीभ पर थोड़ा नियंत्रण रखें। मिठाई खाएँ, पर अति न करें।
यह काम आपको स्वयं करना है। पुस्तक ने केवल एक उदाहरण दिया है — गुलाबजामुन – गुलाबजामुन मामा।
| मिठाई | आपकी पसंद का नाम | चित्र |
|---|---|---|
| गुलाबजामुन | गुलाबजामुन मामा | पुस्तक में गुलाबजामुन का चित्र बना हुआ है |
| काजूकतली | ……………………… | (खाली खाना — चित्र बनाइए) |
| गुझिया | ……………………… | (खाली खाना — चित्र बनाइए) |
| मैसूरपाक | ……………………… | (खाली खाना — चित्र बनाइए) |
कैसे कीजिए —
| मिठाई | नमूना नाम | चित्र में क्या बनाइए |
|---|---|---|
| गुलाबजामुन | गुलाबजामुन मामा | गोल-गोल भूरा गुलाबजामुन, आँखें और पैर |
| काजूकतली | काजूकतली दीदी | चाँदी के वर्क वाली चपटी बरफ़ी जैसी आकृति |
| गुझिया | गुझिया बुआ | आधे चाँद जैसी गुझिया, किनारे पर लहरें |
| मैसूरपाक | मैसूरपाक चाचा | चौकोर पीला टुकड़ा, ऊपर छोटे-छोटे छेद |