कक्षा ४ हिंदी अध्याय 9 पाठ के भीतर के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
रसगुल्ला भाई के अनुसार मिठाइयों की उपेक्षा का क्या कारण है?
उत्तर

रसगुल्ला भाई के अनुसार मिठाइयों की अति मिठास ही उनकी उपेक्षा का कारण है।

पाठ में वे कहते हैं — “आप यह नहीं जानते कि हमारी अति मिठास ही हमारी उपेक्षा का कारण है।”

क्यों: मिठाइयों में शक्कर बहुत अधिक होती है। अधिक शक्कर खाने से कुछ लोगों का शरीर बिगड़ जाता है। इसीलिए डॉक्टर उन्हें मिठाई खाने से रोक देते हैं।
संकेत: ‘उपेक्षा’ का अर्थ है — किसी को छोड़ देना या उस पर ध्यान न देना।
प्र2.
लड्डू दादा ने क्या-क्या सुझाव दिए?
उत्तर

अध्यक्ष लड्डू दादा ने तीन सुझाव दिए —

  1. मिठाइयाँ अपने में शक्कर की मात्रा कम करें। वे कहते हैं — “इसके लिए हमें अपने में शक्कर की मात्रा कम करनी चाहिए।”
  2. लोग अपनी जीभ पर थोड़ा नियंत्रण रखें। मिठाई खाएँ, पर अति न करें।
  3. लोग शारीरिक श्रम करते रहें और स्वस्थ रहें।

वे यह भी समझाते हैं — “शक्कर कम होने से ही हम लोगों के मन में मिठास बढ़ा सकते हैं।”

क्यों: लड्डू दादा चाहते हैं कि मिठाई भी बनी रहे और लोग भी बीमार न पड़ें। इसलिए उन्होंने दोनों पक्षों को एक-एक काम दिया।
प्र3.
“फिर हमें मिठाई कौन कहेगा?” गुलाबजामुन ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर

गुलाबजामुन ने यह बात डर के कारण कही।

अभी-अभी लड्डू दादा ने कहा था कि मिठाइयों को अपने में शक्कर की मात्रा कम करनी चाहिए। मिठाई की पहचान ही उसका मीठापन है। गुलाबजामुन को लगा कि शक्कर कम हो गई तो वे मीठे ही नहीं रहेंगे। फिर लोग उन्हें मिठाई क्यों कहेंगे?

क्यों: हर चीज़ की एक पहचान होती है। गुलाबजामुन को अपनी पहचान खो जाने का डर था।
संकेत: लड्डू दादा ने उनका डर दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि शक्कर कम होने पर लोगों के मन की मिठास बढ़ेगी।
प्र4.
इस पाठ में जीभ पर नियंत्रण रखने की बात क्यों कही गई है?
उत्तर

क्योंकि लोग मिठाई खाते समय अति कर देते हैं।

रबड़ी जी कहती हैं — “जहाँ अति होती है, वहाँ क्षति होती है। हमारा सेवन करते समय लोग अति कर देते हैं और बाद में भुगतते हैं।” गुझिया भी बताती है कि कुछ लोगों के शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ रही है।

इसलिए लड्डू दादा कहते हैं कि लोग अपनी जीभ पर थोड़ा नियंत्रण रखें। मिठाई खाएँ, पर अति न करें।

क्यों: जीभ को केवल स्वाद पता होता है, शरीर की जरूरत नहीं। इसलिए जीभ जितना माँगे, उतना खा लेना ठीक नहीं।
संकेत: गुलाबजामुन का दोहा भी यही कहता है — “जीभ चटोरी न सुने, माँगे मीठा मोर।”
प्र5.
इस पाठ में मिठाइयों को लड्डू दादा, बरफ़ी बहन आदि नामों से पुकारा गया है। नीचे दिए गए उदाहरण के अनुसार मिठाइयों को अपनी पसंद के नाम देते हुए उनके चित्र भी बनाइए — गुलाबजामुन – गुलाबजामुन मामा, काजूकतली –, गुझिया –, मैसूरपाक –
उत्तर

यह काम आपको स्वयं करना है। पुस्तक ने केवल एक उदाहरण दिया है — गुलाबजामुन – गुलाबजामुन मामा

मिठाईआपकी पसंद का नामचित्र
गुलाबजामुनगुलाबजामुन मामापुस्तक में गुलाबजामुन का चित्र बना हुआ है
काजूकतली………………………(खाली खाना — चित्र बनाइए)
गुझिया………………………(खाली खाना — चित्र बनाइए)
मैसूरपाक………………………(खाली खाना — चित्र बनाइए)
पृष्ठ 108 पर दी गई सूची। पहली पंक्ति पुस्तक ने उदाहरण के रूप में भरी है।

कैसे कीजिए —

  1. घर के किसी रिश्ते का नाम चुनिए — मामा, बुआ, चाचा, दीदी, नाना, मौसी।
  2. उसे मिठाई के नाम के आगे जोड़ दीजिए, जैसे पाठ में ‘लड्डू दादा’ और ‘बरफ़ी बहन’ हैं।
  3. फिर खाली खाने में उस मिठाई का चित्र बनाइए और उसमें आँखें, हाथ-पैर भी जोड़िए।
मिठाईनमूना नामचित्र में क्या बनाइए
गुलाबजामुनगुलाबजामुन मामागोल-गोल भूरा गुलाबजामुन, आँखें और पैर
काजूकतलीकाजूकतली दीदीचाँदी के वर्क वाली चपटी बरफ़ी जैसी आकृति
गुझियागुझिया बुआआधे चाँद जैसी गुझिया, किनारे पर लहरें
मैसूरपाकमैसूरपाक चाचाचौकोर पीला टुकड़ा, ऊपर छोटे-छोटे छेद
एक नमूना। आप अपनी पसंद के दूसरे नाम भी रख सकते हैं।
क्यों: रिश्ते का नाम जोड़ते ही मिठाई एक पात्र बन जाती है। तभी वह पाठ में बोल पाती है।
क्या यह उपयोगी रहा?