प्र1.
निम्नलिखित मनोभावों को संवाद के रूप में लिखिए — प्रसन्न, चकित, शांत, दुखी। (पुस्तक ने ‘प्रसन्न’ का उदाहरण दे दिया है — “मेरी खोई हुई पुस्तक मिल गई है!”)
उत्तर
मनोभाव का अर्थ है — मन का भाव। संवाद ऐसा लिखिए कि पढ़ते ही वह भाव समझ में आ जाए।
| मनोभाव | संवाद |
|---|---|
| प्रसन्न | मेरी खोई हुई पुस्तक मिल गई है! (यह उदाहरण पुस्तक में छपा है) |
| चकित | अरे! यह पौधा एक ही रात में इतना बड़ा कैसे हो गया! |
| शांत | कोई बात नहीं, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। |
| दुखी | मेरा प्यारा पिल्ला आज सुबह से कहीं नहीं मिल रहा। |
ऐसा क्यों: भाव शब्दों से भी झलकता है और चिह्नों से भी। चकित और प्रसन्न वाक्य के अंत में ! लगता है। शांत वाक्य धीमा और छोटा होता है। दुखी वाक्य में मन की कमी दिखती है।
पाठ से देखिए: तेनाली – (चकित) शतरंज और मैं! · राजा – (क्रोधित) मुझे सब पता है तेनाली। · तेनाली – (घबराकर) पर…पर… मुझे वास्तव में शतरंज का ज्ञान नहीं महाराज।
संकेत: आपके संवाद इनसे अलग हो सकते हैं। बस भाव साफ़ झलकना चाहिए।