कक्षा ४ हिंदी अध्याय 13 हम सब सुमन एक उपवन के के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कविता में कवि हम सबको क्या कहता है? ‘सुमन’ और ‘उपवन’ का अर्थ भी लिखिए।
उत्तर

कवि हम सबको एक ही बगीचे के फूल कहता है।

“हम सब सुमन एक उपवन के।”
शब्दअर्थ
सुमनफूल
उपवनबगीचा, बाग़
कवि का भाव: उपवन का अर्थ यहाँ हमारा देश है और सुमन का अर्थ है हम सब लोग। जैसे एक ही बगीचे में अलग-अलग रंग के फूल खिलते हैं, वैसे ही एक ही देश में अलग-अलग तरह के लोग रहते हैं।
संकेत: ‘सुमन’ पाठ 13 में एक विद्यार्थी का नाम भी है। यहाँ उसी शब्द का दूसरा अर्थ — फूल — काम में आया है।
पृष्ठ संख्या की एक गड़बड़ी: पुस्तक की विषय-सूची में इस कविता के आगे 173 लिखा है। पर पाठ 13 पृष्ठ 154 से शुरू होकर पृष्ठ 171 (मेरी चित्रकारी) पर समाप्त होता है, और उसके ठीक अगले पन्ने पर यह कविता छपी है। कविता वाले पन्ने पर पृष्ठ संख्या छपी ही नहीं है, इसलिए वह असल में पृष्ठ 172 बनता है।
प्र2.
“एक हमारी धरती सबकी / जिसकी मिट्टी में जन्मे हम, / मिली एक ही धूप हमें है / सींचे गए एक जल से हम।” इन पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

सरल अर्थ: हम सबकी धरती एक ही है। हम सब इसी मिट्टी में जन्मे हैं। हम सब पर एक ही सूरज की धूप पड़ती है। हम सब एक ही जल से सींचे गए हैं।

कवि क्या चित्र बना रहा है: कवि हमें बगीचे के पौधे मान रहा है। एक ही क्यारी की मिट्टी, एक ही धूप और एक ही पानी — फिर भेद कैसा?

कविता की बातउसका अर्थ
एक धरतीहम सबका देश एक है
एक धूपसूरज सबको बराबर मिलता है
एक जलनदियों का पानी सबके लिए है
सीख: जब सब कुछ एक ही है, तो हमें आपस में मिलकर रहना चाहिए।
प्र3.
“रंग-रंग के रूप हमारे / अलग-अलग है क्यारी-क्यारी, / लेकिन हम सबसे मिलकर ही / है उपवन की शोभा सारी।” कवि यहाँ क्या समझाना चाहता है?
उत्तर

कवि समझाना चाहता है कि हमारा अलग-अलग होना ही हमारी सुंदरता है

सरल अर्थ: हम सबके रंग और रूप अलग-अलग हैं। हम अलग-अलग क्यारियों में खिले हैं। फिर भी बगीचे की सारी शोभा हम सबके मिलने से ही बनती है।

कैसे समझें: एक ही रंग के फूलों वाला बगीचा जल्दी बोर कर देता है। लाल, पीले, सफ़ेद — सब रंग साथ हों तो बगीचा सुंदर लगता है। हमारे देश में भी भाषा, पहनावा और खान-पान अलग-अलग है, पर सब मिलकर ही देश सुंदर बनता है।
संकेत: कविता के साथ छपे चित्र को देखिए। उसमें अलग-अलग पहनावे वाले छह बच्चे हाथ में हाथ डालकर चल रहे हैं। चित्र भी यही बात कह रहा है।
प्र4.
“सूरज एक हमारा, जिसकी / किरणें उर की कली खिलातीं” — इस कविता का पाठ ‘हमारा आदित्य’ से क्या संबंध है?
उत्तर

दोनों में सूरज की बात है, पर तरीका अलग है।

पाठ ‘हमारा आदित्य’कविता ‘हम सब सुमन एक उपवन के’
सूरज क्या हैएक तारा, जो बहुत गरम हैसबका साझा सूरज, जो सबके मन खिलाता है
बात कैसे कही गईबातचीत (संवाद) के रूप मेंकविता के रूप में
मुख्य बातसूर्य के रहस्य और आदित्य-एल 1आपस में मिलकर रहना

पंक्ति का सरल अर्थ: सूरज हम सबका एक ही है। उसकी किरणें हमारे हृदय (उर) की कली को खिला देती हैं, यानी मन को खुश कर देती हैं।

संबंध: पाठ बताता है कि सूरज सबको प्रकाश और गरमी देता है। कविता उसी बात को आगे बढ़ाती है — सूरज किसी एक का नहीं, सबका है। वह किसी में भेद नहीं करता, इसलिए हमें भी भेद नहीं करना चाहिए।
प्र5.
“काँटों में खिलकर हम सबने / हँस-हँसकर है जीना सीखा” — इससे हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर

सीख यह है कि कठिनाइयों के बीच भी हँसते हुए जीना चाहिए

सरल अर्थ: फूल काँटों के बीच खिलता है, फिर भी मुरझाता नहीं। वह हँसता हुआ खिला रहता है। हमें भी वैसे ही रहना चाहिए।

आगे कवि कहता है —

“एक सूत्र में बँधकर हमने
हार गले का बनना सीखा।”

इसका अर्थ है — अलग-अलग फूल एक धागे में बँधकर सुंदर माला बन जाते हैं। इसी तरह हम सब मिलकर रहें तो देश की शोभा बनते हैं।

दो सीखें एक साथ: पहली — दुख में भी हिम्मत मत हारो। दूसरी — अकेले रहने से अच्छा है मिलकर रहना। अकेला फूल केवल फूल है; बहुत फूल मिलें तो माला बन जाती है।
संकेत: ‘सूत्र’ का अर्थ है धागा। माला बनाने के लिए धागा चाहिए ही होता है।
प्र6.
इस कविता के कवि कौन हैं? कविता में से तुक मिलने वाले (तुकांत) शब्दों के कोई तीन जोड़े छाँटकर लिखिए।
उत्तर

इस कविता के कवि हैं — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी। उनका नाम कविता के अंत में छपा है।

तुक मिलने वाले शब्दों के जोड़े —

जोड़ाकविता की पंक्तियाँ
क्यारी – सारी“अलग-अलग है क्यारी-क्यारी” / “है उपवन की शोभा सारी”
खिलातीं – नहलाती“किरणें उर की कली खिलातीं” / “जिसकी हम सबको नहलाती”
सीखा – सीखा“हँस-हँसकर है जीना सीखा” / “हार गले का बनना सीखा”
पवन के – गगन के – गुंजन केहर अंतरा इन्हीं जैसे शब्दों पर समाप्त होता है
तुक क्या होती है: जब दो पंक्तियों के अंतिम शब्दों की आवाज़ मिलती-जुलती हो, तो उसे तुक कहते हैं। तुक के कारण कविता गाने जैसी लगती है और जल्दी याद हो जाती है।
ध्यान दीजिए: हर अंतरा “…एक पवन के”, “…एक गगन के”, “…मीठे गुंजन के”, “…धनी-निर्धन के” पर खत्म होता है। ये सब कविता की पहली पंक्ति “हम सब सुमन एक उपवन के” से तुक मिलाते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?