प्र1.
अपने माता-पिता/शिक्षकों की सहायता से पता लगाइए कि आपके यहाँ तालिका में दी गईं साग-तरकारियों को क्या कहा जाता है। इनके अतिरिक्त अन्य साग-तरकारियों के भी प्रचलित तथा स्थानीय नाम लिखिए—
| साग-तरकारी का प्रचलित नाम | आपका प्रदेश/क्षेत्र | स्थानीय नाम |
|---|---|---|
| प्याज | महाराष्ट्र | कांदा |
| कद्दू | ………………… | ………………… |
| तोरई | ………………… | ………………… |
| टिंडा | ………………… | ………………… |
| फूलगोभी | ………………… | ………………… |
| भिंडी | ………………… | ………………… |
| करेला | ………………… | ………………… |
| ………………… | ………………… | ………………… |
| ………………… | ………………… | ………………… |
उत्तर
यह खोजबीन का काम है। उत्तर आपके अपने प्रदेश का होगा, इसलिए हर बच्चे का उत्तर अलग होगा।
कैसे करें —
- घर में माँ, पिताजी या दादी से पूछिए कि ये सब्जियाँ आपके यहाँ किस नाम से बिकती हैं।
- ‘आपका प्रदेश/क्षेत्र’ वाले खाने में अपने प्रदेश का नाम लिखिए।
- अंतिम दो खाली पंक्तियों में अपने मन से दो और साग-तरकारियाँ जोड़िए।
- सब्जी मंडी जाकर भी नाम सुनिए और लिखिए।
नमूना उत्तर — नीचे एक भरी हुई तालिका दी गई है। आप इसे देखकर अपनी तालिका बना सकते हैं।
| साग-तरकारी का प्रचलित नाम | आपका प्रदेश/क्षेत्र | स्थानीय नाम |
|---|---|---|
| प्याज | महाराष्ट्र | कांदा |
| कद्दू | बिहार | कोंहड़ा |
| तोरई | बिहार | नेनुआ |
| टिंडा | पंजाब | टिंडा |
| फूलगोभी | बंगाल | फुलकपि |
| भिंडी | तमिलनाडु | वेंडैक्काय |
| करेला | गुजरात | करेलुं |
| बैंगन | महाराष्ट्र | वांगे |
| आलू | बंगाल | आलु |
ऐसा क्यों होता है: एक ही सब्जी के नाम जगह-जगह बदल जाते हैं,
क्योंकि हर प्रदेश की अपनी भाषा होती है। जैसे प्याज को महाराष्ट्र में कांदा कहते हैं।
कविता में आया ‘नेनुआ’ भी तोरई का ही एक नाम है।
संकेत: ऊपर की तालिका केवल एक नमूना है। अपने प्रदेश के सही नाम
अपने घरवालों से पूछकर ही लिखिए।