कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 गतिविधि 4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
एक पारदर्शी गिलास लीजिए। इसे मृदा से आधा भर लीजिए। अब इस मृदा में एक चम्मच से धीरे-धीरे जल डालिए। ध्यानपूर्वक देखिए कि क्या होता है।
उत्तर

आप क्या देखेंगे: जल ऊपर नहीं ठहरता। वह मृदा में समा जाता है, मृदा ऊपर से नीचे की ओर गहरी और गीली होती जाती है, और कुछ देर बाद गिलास की तली में जल इकट्ठा हो जाता है। यदि जल डालते रहें तो मृदा और नहीं सोख पाती और जल सतह पर खड़ा होने लगता है।

कैसे कीजिए:

  1. पारदर्शी गिलास या कटी हुई प्लास्टिक की बोतल लीजिए, जिससे किनारे से भीतर दिखाई दे।
  2. उसे सूखी बगीचे की मृदा से आधा भरिए। मृदा को दबाइए मत।
  3. एक चम्मच जल लेकर मृदा के बीचोंबीच धीरे-धीरे डालिए।
  4. सतह भी देखिए और गिलास के किनारे से भीतर की मृदा भी देखिए।
  5. एक और चम्मच डालिए, रुकिए, फिर एक और — कुल छह से आठ चम्मच।
चरणअवलोकन
पहला चम्मचजल ऊपर से लगभग तुरंत गायब हो जाता है। छोटा-सा गहरा गीला धब्बा बनता है।
अगले कुछ चम्मचगहरी गीली रेखा मृदा में धीरे-धीरे नीचे खिसकती है। नन्हे बुलबुले ऊपर आते हैं।
कई चम्मच के बादगीली मृदा के नीचे, गिलास की तली में स्वच्छ जल इकट्ठा होने लगता है।
डालते रहने परमृदा भर जाती है। अब जल सतह पर खड़ा रहता है और भीतर नहीं जाता — यह भारी वर्षा के बाद जल-भराव जैसा है।
1. धीरे-धीरे जल डालिए 2. वह मृदा में रिसता है 3. तली में इकट्ठा होता है वर्षा में खेत के नीचे भी यही होता है — यही संचित जल भूमिगत जल है।
मृदा से भरा गिलास हमारे पैरों के नीचे की भूमि का छोटा नमूना है।
ऐसा क्यों होता है: मृदा दिखने में ठोस लगती है, किंतु वह असंख्य छोटे कणों से बनी है और उनके बीच नन्हे रिक्त स्थान होते हैं जिनमें वायु भरी रहती है। जल डालने पर वह वायु को बाहर धकेल देता है — इसीलिए बुलबुले उठते हैं — और स्वयं उन रिक्त स्थानों में बैठ जाता है। अपने भार के कारण जल एक रिक्त स्थान से दूसरे में उतरता जाता है, जब तक कोई ऐसी परत न मिले जिससे वह आगे न जा सके। वहीं वह एकत्र हो जाता है।
यही भूमिगत जल है। इसी प्रकार भूमि के नीचे गहराई में भंडारित होने वाला जल भूमिगत जल कहलाता है। कुएँ, बोरवेल, ट्यूबवेल और हैंडपंप इसी जल को ऊपर लाने के लिए बनाए जाते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?