कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 गतिविधि 3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
एक पारदर्शी थैली लीजिए। चित्र में दर्शाई गई आकृतियों के अनुसार इस थैली पर मार्कर पेन से सूर्य, बादल, वृक्ष और तीर के चिह्न बनाइए। इस थैली को रंगीन जल से एक-तिहाई भर लीजिए। थैली को कसकर बंद कर दें जिससे कोई रिसाव न हो। इसे सूर्य के प्रकाश में रखिए। कुछ घंटों के पश्चात थैली के अंदर होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन कीजिए।
पृष्ठ 7 पर गतिविधि 3 के साथ दिया गया चित्र — बंद थैली, जिस पर मार्कर से सूर्य, बादल, वृक्ष और तीर के चिह्न बने हैं और जिसका निचला एक-तिहाई भाग रंगीन जल से भरा है।
उत्तर

आप क्या देखेंगे: थैली का जल गरम हो जाता है; थैली के ऊपरी खाली भाग के भीतर नन्हीं बूँदें बन जाती हैं; बूँदें बड़ी होकर आपस में जुड़ती हैं, दीवार पर फिसलती हैं और रंगीन जल में वापस गिर जाती हैं। थैली बंद है, इसलिए जल बाहर नहीं जाता — वही जल बार-बार घूमता रहता है।

कैसे कीजिए:

  1. एक पारदर्शी ज़िप वाली थैली लीजिए।
  2. मार्कर से एक ऊपरी कोने में सूर्य, उसके पास बादल, नीचे एक वृक्ष तथा एक ओर ऊपर जाते और दूसरी ओर नीचे आते तीर बनाइए।
  3. लगभग एक कप जल में नीले रंग या खाद्य रंजक की कुछ बूँदें मिलाइए। रंग से जल स्पष्ट दिखाई देता है।
  4. थैली को इस रंगीन जल से एक-तिहाई भरिए।
  5. हवा निकालकर थैली कसकर बंद कीजिए। एक बार उलटकर देख लीजिए कि रिसाव तो नहीं है।
  6. इसे टेप से धूप वाली खिड़की पर चिपका दीजिए, जल नीचे की ओर रहे।
  7. तीन-चार घंटे बाद लौटकर थैली के ऊपरी आधे भाग को ध्यान से देखिए।
समयआप क्या देखेंगे
1 घंटे बादथैली गरम लगती है। ऊपरी भाग हल्का धुँधला दिखता है।
2–3 घंटे बादऊपरी भाग के भीतर अनेक नन्हीं पारदर्शी बूँदें जमी दिखती हैं।
4 घंटे बादकुछ बूँदें जुड़कर बड़ी हो जाती हैं, फिसलकर नीचे रंगीन जल में गिर जाती हैं।
रंगीन जल का स्तरआरंभ जैसा ही रहता है — बंद थैली से कुछ भी बाहर नहीं गया।
ऐसा क्यों होता है: सूर्य का प्रकाश रंगीन जल को गर्म करता है। उसका कुछ भाग वाष्पित होकर जलवाष्प बनता है और थैली के खाली भाग में ऊपर उठ जाता है। ऊपर की पॉलीथीन जल से ठंडी है, इसलिए वाष्प उससे टकराकर संघनित हो जाती है और नन्हीं बूँदें बन जाती हैं। भारी होने पर बूँदें नीचे लुढ़क आती हैं। यही वाष्पन, संघनन और वर्षा है — आपकी हथेली पर।
एक बात पर ध्यान दीजिए: पॉलीथीन पर बनी बूँदें रंगहीन हैं, नीली नहीं। रंग जल में ही रह गया। इसी प्रकार महासागर का नमक पीछे रह जाता है और बरसने वाला जल मीठा होता है।
प्र2.
‘मेरा अवलोकन — मैं चकित हूँ — इसका कारण है…’ तालिका को पूरा कीजिए। (पहली पंक्ति दी गई है: जल गर्म हो गया है / जल कैसे गर्म हो गया? / सूर्य का प्रकाश; दूसरी पंक्ति: थैली के अंदर जलकण बन गए हैं।)
मेरा अवलोकनमैं चकित हूँइसका कारण है…
जल गर्म हो गया है।जल कैसे गर्म हो गया?सूर्य का प्रकाश
थैली के अंदर जलकण बन गए हैं।  
   
पृष्ठ 7 पर गतिविधि 3 के साथ छपी तालिका, ठीक वैसी ही जैसी पुस्तक में है — पहली पंक्ति भरी हुई है, शेष रिक्त हैं।
उत्तर

पूरी की गई तालिका यह रही। पहली पंक्ति पुस्तक ने दी है; शेष थैली में वास्तव में जो होता है, उसी से भरी गई हैं।

मेरा अवलोकनमैं चकित हूँइसका कारण है…
जल गर्म हो गया है।जल कैसे गर्म हो गया?सूर्य का प्रकाश
थैली के अंदर जलकण बन गए हैं।जल तो मैंने नीचे डाला था, वह थैली के ऊपर कैसे पहुँच गया?गरम जल जलवाष्प बनकर ऊपर उठ गया। ऊपर की पॉलीथीन ठंडी है, इसलिए वाष्प ठंडी होकर बूँदों में बदल गई। इसे संघनन कहते हैं।
बूँदें बड़ी होकर दीवार से फिसलती हैं और जल में वापस गिर जाती हैं।बूँदें ऊपर टिकी क्यों नहीं रहतीं?छोटी बूँदें जुड़कर बड़ी और भारी हो जाती हैं और भारी बूँदें नीचे फिसल जाती हैं। आकाश में यही होता है और उसे हम वर्षा कहते हैं।
रंगीन जल का स्तर लगभग वैसा ही रहता है।जल गया कहाँ और लौटा कहाँ से?थैली बंद है। जल ने केवल रूप बदला — द्रव से वाष्प और फिर वाष्प से द्रव। थैली से कुछ भी बाहर नहीं गया।
पॉलीथीन पर बनी बूँदें नीली नहीं, रंगहीन हैं।रंग जल के साथ ऊपर क्यों नहीं गया?वाष्प केवल जल बनता है। रंग पीछे रह गया, ठीक वैसे ही जैसे समुद्री जल के वाष्पित होने पर नमक पीछे रह जाता है।
बड़ा विचार: यह थैली पृथ्वी का छोटा-सा नमूना है। रंगीन जल सागर है, धूप वाली खिड़की सूर्य है, ऊपर बनी धुंध और बूँदें बादल हैं और नीचे लुढ़कती बूँदें वर्षा हैं। थैली बंद है, इसलिए स्पष्ट दिखता है कि जल कभी समाप्त नहीं होता — वह केवल यात्रा करता है और रूप बदलता है।
क्या यह उपयोगी रहा?