मेरा अवलोकन: बर्फ धीरे-धीरे अपनी आकृति खोकर द्रव जल में बदल जाती है। टुकड़े छोटे और गोल होते जाते हैं, उनके नीचे जल इकट्ठा हो जाता है और अंत में बर्फ बचती ही नहीं — केवल ठंडा जल रह जाता है। पात्र के बाहर भी नन्हीं बूँदें बन जाती हैं।
कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 परिवर्तनों का अवलोकन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
परिवर्तनों का अवलोकन — गतिविधि: बर्फ का पिघलना। अपना अवलोकन लिखिए।
उत्तर
बर्फ (ठोस) → जल (द्रव) — इसे गलन (पिघलना) कहते हैं
ऐसा क्यों होता है: कमरे की वायु बर्फ से गरम है। ताप गरम वायु से ठंडी बर्फ में चला जाता है। यही ताप बर्फ को उसकी कठोर, स्थिर आकृति से मुक्त कर देता है और वह द्रव जल बनकर बहने लगती है।
स्वयं जाँचिए: सारी बर्फ पिघल जाने पर जल का स्तर चिह्नित कीजिए। उसे फिर जमाइए, बर्फ वापस मिल जाएगी। कुछ भी नष्ट नहीं होता — केवल रूप बदलता है।
प्र2.
परिवर्तनों का अवलोकन — गतिविधि: जल का उबलना। अपना अवलोकन लिखिए।
उत्तर
मेरा अवलोकन: पात्र की तली में बुलबुले बनते हैं और ऊपर आते हैं। जल हिलता है और आवाज़ करता है। पात्र के ऊपर सफ़ेद भाप उठती है। पात्र को आँच पर रखे रहने दें तो जल का स्तर धीरे-धीरे घट जाता है।
जल (द्रव) → जलवाष्प (गैस) — इसे वाष्पन कहते हैं
ऐसा क्यों होता है: आँच का ताप जल को इतनी ऊर्जा देता है कि वह अदृश्य गैस बनकर वायु में उड़ सके। बुलबुले जल के भीतर ही बनी वाष्प हैं। पात्र से थोड़ा ऊपर यह वाष्प ठंडी वायु से मिलकर बहुत नन्हीं बूँदें बना लेती है — वही सफ़ेद भाप हमें दिखाई देती है।
किसी बड़े के साथ कीजिए: भाप से कुछ ऊँचाई पर स्टील की सूखी प्लेट कुछ क्षण रखिए। उस पर बूँदें बन जाएँगी। वाष्प फिर जल बन गई।
प्र3.
परिवर्तनों का अवलोकन — गतिविधि: तीन दिन तक जल को सूर्य के प्रकाश में रखना। अपना अवलोकन लिखिए।
उत्तर
मेरा अवलोकन: गिलास में जल का स्तर हर दिन थोड़ा-थोड़ा घटता जाता है। तीसरे दिन तक गिलास का ऊपरी भाग खाली दिखाई देने लगता है। न कुछ गिरा, न कुछ रिसा — जल वायु में चला गया।
इसे व्यवस्थित ढंग से कीजिए —
- एक गिलास जल से भरिए और मार्कर या टेप से जल का स्तर चिह्नित कीजिए।
- उसे धूप वाले ऐसे स्थान पर रखिए जहाँ कोई हिलाए नहीं।
- तीन दिन तक प्रतिदिन उसी समय स्तर पर निशान लगाइए।
| दिन | मुझे क्या दिखा | नमूना जल-स्तर |
|---|---|---|
| पहला दिन (आरंभ) | गिलास निशान तक भरा हुआ | 200 मिलीलीटर |
| दूसरा दिन | स्तर निशान से थोड़ा नीचे | लगभग 185 मिलीलीटर |
| तीसरा दिन | स्तर और नीचे | लगभग 170 मिलीलीटर |
आपके गिलास में मात्रा भिन्न हो सकती है। गरम, शुष्क और हवादार दिन में जल अधिक उड़ता है, ठंडे व बादल वाले दिन में कम।
ऐसा क्यों होता है: वाष्प बनने के लिए जल का उबलना आवश्यक नहीं है। सूर्य का ताप ही पर्याप्त है। थोड़ा-थोड़ा करके ऊपरी सतह का जल वाष्प बनकर वायु में मिल जाता है। इस धीमे परिवर्तन को वाष्पन कहते हैं। यही जल-चक्र का पहला चरण है।
तीनों पंक्तियों की तुलना कीजिए: पिघलने में थोड़ा ताप लगा। उबलने में बहुत ताप लगा और काम तेज़ी से हुआ। धूप में ताप हल्का था, इसलिए तीन दिन लगे। परिवर्तन एक ही है — केवल गति अलग है।