कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 गतिविधि 2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
स्टील का एक गिलास लीजिए। इसमें बर्फ के कुछ टुकड़े डालिए। गिलास पर दिखाई देने वाले जलकणों को देखिए। (क) ये जलकण कहाँ से आए?
उत्तर

ये जलकण गिलास के चारों ओर की वायु से आए हैं। वायु में जलवाष्प रहती है जो हमें दिखाई नहीं देती। ठंडा गिलास उस वाष्प को ठंडा कर देता है और वह गिलास के बाहर नन्हीं बूँदों में बदल जाती है।

चरण दर चरण कीजिए और देखिए।

  1. स्टील का सूखा गिलास लीजिए। पोंछकर देख लीजिए — बाहर से बिलकुल सूखा है।
  2. उसमें बर्फ के चार-पाँच टुकड़े डालिए।
  3. दो मिनट प्रतीक्षा कीजिए। उसे छुइए मत।
  4. अब गिलास के बाहर देखिए। वह नन्हीं बूँदों से भर गया है। छूने पर उँगली गीली हो जाती है।
अंदर बर्फ के टुकड़े बूँदें यहाँ बनती हैं — गिलास के बाहर वायु की जलवाष्प गिलास में कोई छेद नहीं है। जल बाहर से आया है, अंदर से नहीं।
अदृश्य जलवाष्प ठंडे गिलास से टकराकर ठंडी होती है और दिखाई देने वाली बूँदें बन जाती है।
ऐसा क्यों होता है: गरम वायु अपने साथ जलवाष्प रख सकती है, ठंडी वायु उतनी नहीं रख पाती। जब कमरे की गरम वायु अत्यंत ठंडे स्टील से टकराती है तो वह तुरंत ठंडी हो जाती है और उसकी जलवाष्प फिर से द्रव जल बन जाती है। वाष्प के जल में बदलने की इस क्रिया को संघनन कहते हैं।
स्वयं जाँचिए: पास में एक और गिलास रखिए जिसमें सामान्य ताप का जल हो। वह बाहर से सूखा ही रहेगा। केवल ठंडा गिलास गीला होता है — अर्थात् बूँदें वायु से आ रही हैं, स्टील से रिसकर नहीं।
प्र2.
(ख) बर्फ के टुकड़ों को कुछ समय के लिए गिलास में ही छोड़ देने पर उनका क्या होगा?
उत्तर

बर्फ के टुकड़े पिघल जाएँगे। वे धीरे-धीरे द्रव जल में बदल जाएँगे और कुछ समय बाद गिलास में बर्फ के स्थान पर जल होगा।

आप क्रम से यह देखेंगे —

  1. पहले टुकड़ों के नुकीले कोने गोल और चिकने हो जाते हैं।
  2. फिर टुकड़े छोटे होने लगते हैं और नीचे थोड़ा जल इकट्ठा हो जाता है।
  3. टुकड़े उसी जल में तैरते रहते हैं और घटते जाते हैं।
  4. अंत में बर्फ बचती ही नहीं — केवल ठंडा जल रह जाता है।
बर्फ (ठोस) + कमरे का ताप → जल (द्रव)
ऐसा क्यों होता है: कमरा बर्फ से गरम है। ताप सदैव गरम वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर जाता है। इसलिए वायु और गिलास का ताप बर्फ में चला जाता है और बर्फ पिघल जाती है — अर्थात् ठोस रूप से द्रव रूप में बदल जाती है। जल वही रहता है, केवल उसका रूप बदलता है।
यह भी कीजिए: एक टुकड़ा छाया में और एक धूप में प्लेट पर रखिए। धूप वाला टुकड़ा बहुत जल्दी पिघलेगा, क्योंकि उसे ताप शीघ्रता से मिलता है।
प्र3.
(ग) यदि हम जल को गर्म करें तो उसका क्या होगा?
उत्तर

जल गरम होगा, फिर उबलने लगेगा और भाप अर्थात् जलवाष्प में बदल जाएगा। पात्र में जल धीरे-धीरे कम होता जाएगा।

चूल्हे पर रखे पात्र को देखिए।

  1. जल पहले गुनगुना, फिर गरम होता है।
  2. तली से छोटे-छोटे बुलबुले उठने लगते हैं।
  3. शीघ्र ही पूरा जल तेज़ी से बुलबुले छोड़ने लगता है। यही उबलना है।
  4. पात्र के ऊपर सफ़ेद धुँधली भाप उठती दिखाई देती है — यह वही जलवाष्प है जो वायु में थोड़ी ठंडी हो गई है।
  5. चूल्हा जलता रहे तो पात्र में जल का स्तर घटता जाता है, क्योंकि जल लगातार वाष्प बनकर उड़ रहा है।
जल (द्रव) + ताप → जलवाष्प (गैस)
ऐसा क्यों होता है: ताप जल को इतनी ऊर्जा दे देता है कि वह पात्र छोड़कर गैस के रूप में वायु में उड़ जाए। इसके लिए उबलना आवश्यक नहीं है — गीले कपड़े धूप में इसी तरह सूखते हैं, बस बहुत धीरे-धीरे। उबलना केवल बहुत तेज़ वाष्पन है।
सावधानी: भाप उबलते जल से भी अधिक गरम होती है और बुरी तरह जला सकती है। उबलते पात्र को दूर से और किसी बड़े के साथ ही देखिए।
प्र4.
उपर्युक्त गतिविधि में आप जल के कौन-से रूपों को देखते हैं?
उत्तर

जल के तीनों रूप — ठोस, द्रव और वाष्प।

रूपइस गतिविधि में कहाँ दिखाक्या बदला
ठोसस्टील के गिलास में डाले गए बर्फ के टुकड़ेजल जमकर कठोर हो गया
द्रवगिलास के अंदर पिघला हुआ जल और बाहर बनी बूँदेंबर्फ पिघली; वाष्प संघनित हुई
वाष्प (गैस)वायु का अदृश्य जल जिससे बूँदें बनीं; उबलते पात्र के ऊपर की भापजल गरम होकर गैस बनकर उठा
ठोस द्रव वाष्प
ताप इसे दाईं ओर ले जाता है, ठंडक बाईं ओर लौटा लाती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह छोटी-सी गतिविधि पूरे अध्याय का मूल विचार दिखा देती है। जल अपना रूप बदल सकता है और फिर लौट भी सकता है। प्रकृति यही काम बहुत बड़े पैमाने पर करती है और उसे हम जल-चक्र कहते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?