कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 गतिविधि 6 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
सरसों के दानों के संबंध में आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर

दाने उच्चतम बिंदु से लुढ़ककर नीचे के भागों की ओर चले गए। वे वहीं नहीं ठहरे जहाँ उड़ेले गए थे। वे मुड़े हुए कागज़ के वलनों और गड्ढों का अनुसरण करते हुए निचले हिस्सों में इकट्ठे हो गए।

तैयारी कैसे कीजिए:

  1. पुराने समाचार-पत्र का एक पृष्ठ लेकर उसे मरोड़कर गेंद बनाइए, फिर खोल लीजिए। अब उसमें अनेक वलन बन गए हैं।
  2. उसके ऊपर दूसरा पृष्ठ रखिए और थोड़ा दबाइए जिससे वलन हल्के ढाल बन जाएँ।
  3. एक किनारा थोड़ा उठाइए जिससे कोई एक भाग स्पष्ट रूप से सबसे ऊँचा हो।
  4. उस उच्चतम बिंदु पर एक प्याले से सरसों के दाने धीरे-धीरे उड़ेलिए।
  5. देखिए दाने कहाँ जाते हैं। कागज़ को हिलाइए मत।
मैंने क्या देखाअवलोकन
दानों की दिशासदा ऊँचे भाग से निचले भाग की ओर — कभी ऊपर की ओर नहीं।
उनका मार्गसीधा नहीं। वे वलनों की खाँचों और मोड़ों के साथ-साथ चले।
वे कहाँ रुकेनिचले गड्ढों में, जहाँ छोटे-छोटे ढेर बन गए।
चालतीव्र ढाल पर तेज़, हल्के ढाल पर धीमी।
ऐसा क्यों होता है: दानों में भार है, इसलिए वे जिस निचले स्थान तक पहुँच सकते हैं वहीं तक लुढ़कते हैं। कौन-सी राह खुली है, यह कागज़ की आकृति तय करती है। जल भी ठीक ऐसा ही करता है, इसीलिए यह गतिविधि नदी का अच्छा नमूना है।
प्र2.
क्या ये दाने सीधी रेखा में गति कर रहे हैं या ये विभिन्न दिशाओं में फैल रहे हैं?
उत्तर

ये विभिन्न दिशाओं में फैल रहे हैं। ये एक सीधी रेखा में नहीं चलते।

दानों की धारा कई छोटी धाराओं में बँट जाती है। कुछ बाईं ओर जाते हैं, कुछ दाईं ओर, कुछ बीच से नीचे उतरते हैं। हर छोटी धारा उसी खाँच का अनुसरण करती है जिसमें वह गिरी।

उच्चतम बिंदु दाने गड्ढों में इकट्ठे होते हैं अलग-अलग वलन दानों को अलग-अलग दिशाओं में भेज देते हैं।
आरंभ एक ही बिंदु से, पर मार्ग अनेक — क्योंकि कागज़ के वलन राह तय करते हैं।
वे फैलते क्यों हैं: मुड़ा हुआ कागज़ एक समान ढाल नहीं है। उसमें अनेक छोटी उभरी कटकें और अनेक छोटी घाटियाँ हैं। दाना उभरी कटक को पार नहीं कर सकता, इसलिए उसे उसी घाटी में चलना पड़ता है जिसमें वह गिरा। नदियाँ भी यही करती हैं। इसीलिए एक ही पर्वत पर पास-पास जन्मी नदियाँ देश के दो अलग-अलग सागरों तक पहुँच सकती हैं।
प्र3.
क्या दाने कुछ क्षेत्रों में एकत्रित हो रहे हैं? क्या ये दाने इस प्रकार एकत्रित हो रहे हैं जिस प्रकार झीलों एवं नदियों इत्यादि में पानी एकत्रित होता है?
उत्तर

हाँ। दाने कागज़ के निचले गड्ढों में एकत्र हो रहे हैं — ठीक वैसे ही जैसे जल तालाबों और झीलों में एकत्र होता है।

कागज़ परप्रकृति में
लंबी खाँच जिसमें दाने बहते चले जाते हैंनदी या जल-धारा
गड्ढा जहाँ दाने ढेर बनकर रुक जाते हैंतालाब या झील
तीव्र ढाल जहाँ दाने तेज़ी से गिरते हैंजलप्रपात या तेज़ पहाड़ी धारा
उभरी कटक जिसे दाने पार नहीं कर पातेदो नदियों को अलग करने वाली पहाड़ी या पर्वत श्रृंखला
कागज़ के किनारे से बाहर गिरते दानेसागर में मिलती नदी
वे इकट्ठे क्यों होते हैं: गड्ढे के आगे कोई और नीचा स्थान नहीं होता। एक बार उसमें आ जाने पर दाना रुक जाता है। जल भी यही करता है। यदि गड्ढे की तली कठोर हो और जल रिसकर नीचे न जा सके, तो जल वहीं ठहर जाता है और तालाब या झील बन जाती है।
पुस्तक के अपने शब्दों में नियम: जल अपने मार्ग में आने वाली भू-संरचनाओं की आकृति के अनुसार बहता, रुकता अथवा मुड़ता है — और जल का प्रवाह भू-आकृतियों को भी परिवर्तित कर सकता है।
क्या यह उपयोगी रहा?