प्र1.
सरसों के दानों के संबंध में आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर
दाने उच्चतम बिंदु से लुढ़ककर नीचे के भागों की ओर चले गए। वे वहीं नहीं ठहरे जहाँ उड़ेले गए थे। वे मुड़े हुए कागज़ के वलनों और गड्ढों का अनुसरण करते हुए निचले हिस्सों में इकट्ठे हो गए।
तैयारी कैसे कीजिए:
- पुराने समाचार-पत्र का एक पृष्ठ लेकर उसे मरोड़कर गेंद बनाइए, फिर खोल लीजिए। अब उसमें अनेक वलन बन गए हैं।
- उसके ऊपर दूसरा पृष्ठ रखिए और थोड़ा दबाइए जिससे वलन हल्के ढाल बन जाएँ।
- एक किनारा थोड़ा उठाइए जिससे कोई एक भाग स्पष्ट रूप से सबसे ऊँचा हो।
- उस उच्चतम बिंदु पर एक प्याले से सरसों के दाने धीरे-धीरे उड़ेलिए।
- देखिए दाने कहाँ जाते हैं। कागज़ को हिलाइए मत।
| मैंने क्या देखा | अवलोकन |
|---|---|
| दानों की दिशा | सदा ऊँचे भाग से निचले भाग की ओर — कभी ऊपर की ओर नहीं। |
| उनका मार्ग | सीधा नहीं। वे वलनों की खाँचों और मोड़ों के साथ-साथ चले। |
| वे कहाँ रुके | निचले गड्ढों में, जहाँ छोटे-छोटे ढेर बन गए। |
| चाल | तीव्र ढाल पर तेज़, हल्के ढाल पर धीमी। |
ऐसा क्यों होता है: दानों में भार है, इसलिए वे जिस निचले स्थान तक पहुँच सकते हैं वहीं तक लुढ़कते हैं। कौन-सी राह खुली है, यह कागज़ की आकृति तय करती है। जल भी ठीक ऐसा ही करता है, इसीलिए यह गतिविधि नदी का अच्छा नमूना है।