कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आपने कभी सोचा है कि नदियाँ कैसे बहती हैं?
उत्तर

नदी ढाल पर नीचे की ओर बहती है। वह प्राय: ऊँचे पहाड़ों से आरंभ होती है — पिघलती बर्फ, हिमनद या किसी स्रोत से — और फिर नीची से नीची भूमि की ओर बहती हुई अंत में सागर तक पहुँच जाती है।

यह यात्रा चरण दर चरण ऐसी होती है —

  1. पहाड़ पर ऊँचाई पर वर्षा होती है या बर्फ पिघलती है।
  2. जल ढाल पर टिक नहीं सकता, इसलिए नीचे की ओर बहने लगता है।
  3. अनेक छोटी धाराएँ मिलकर एक जल-धारा बनाती हैं।
  4. अनेक जल-धाराएँ मिलकर नदी बनाती हैं।
  5. नदी भूमि के निचले भागों का अनुसरण करती है — पहाड़ी पर चढ़ने के स्थान पर उसके चारों ओर घूम जाती है।
  6. जहाँ भूमि समतल और नीची है, वहाँ जल फैल जाता है और धीमा हो जाता है। जहाँ बड़ा गड्ढा होता है, वहाँ जल एकत्र होकर झील बना लेता है।
  7. अपनी यात्रा के अंत में वह सागर में जा गिरती है।
नीचे की ओर ही क्यों: जल में भार होता है और भार सदैव नीचे की ओर खींचता है। इसलिए जल स्वयं कभी ऊपर की ओर नहीं बह सकता। यही एक सरल नियम संसार की हर नदी का मार्ग तय कर देता है।
जल भूमि को भी आकार देता है: बहते समय नदी अपने साथ रेत, मिट्टी और छोटे पत्थर बहा ले जाती है। सैकड़ों वर्षों में यह चट्टानों को घिसकर घाटियाँ बना देती है और समतल मैदानों में मिट्टी बिछा देती है। इस प्रकार भूमि नदी को और नदी धीरे-धीरे भूमि को आकार देती है।
क्या यह उपयोगी रहा?