कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए— (i) महासागरीय जल (ii) बर्फ (iii) वाष्प (iv) वर्षा जल — के साथ — (क) जल का ठोस रूप (ख) जल का वाष्प रूप (ग) पीने के लिए अनुपयुक्त (घ) पेय जल
उत्तर
स्तंभ कउत्तरस्तंभ खक्यों
(i) महासागरीय जल(ग)पीने के लिए अनुपयुक्तइसमें बहुत नमक है, इसलिए हम इसे पी नहीं सकते।
(ii) बर्फ(क)जल का ठोस रूपबर्फ जमा हुआ जल है — कठोर और अपनी आकृति बनाए रखने वाला।
(iii) वाष्प(ख)जल का वाष्प रूपवाष्प वह जल है जो ताप पाकर गैस बन गया है।
(iv) वर्षा जल(घ)पेय जलवाष्प केवल जल की बनती है, नमक पीछे रह जाता है, इसलिए वर्षा का जल मीठा होता है।
(i) → (ग)    (ii) → (क)    (iii) → (ख)    (iv) → (घ)
जाँचने का सरल तरीका: (ii) और (iii) जल के रूप की बात करते हैं — ठोस और वाष्प। (i) और (iv) इस बात की कि हम उस जल का उपयोग कर सकते हैं या नहीं — नहीं और हाँ।
प्र2.
आपके विचार से पृथ्वी पर पाया जाने वाला अधिकांश जल पीने हेतु अथवा कृषि हेतु उपयोग में क्यों नहीं लाया जा सकता है?
उत्तर

क्योंकि पृथ्वी का अधिकांश जल खारा समुद्री जल है, और खारा जल न पीने के काम आता है, न फसल उगाने के।

पृष्ठ 4 के चित्र को याद कीजिए।

  1. 200 मिलीलीटर का गिलास पृथ्वी के संपूर्ण जल का प्रतीक है।
  2. उसमें मीठा जल केवल 5 मिलीलीटर है — एक चम्मच।
  3. शेष 195 मिलीलीटर खारा महासागरीय जल है।
  4. और वह एक चम्मच भी पूरा सुलभ नहीं है। उसका बड़ा भाग हिमनदों और हिमटोपों में बर्फ बनकर बंद है और बहुत सारा भूमि के बहुत नीचे भूमिगत जल के रूप में है।
जल कहाँ हैक्या हम इसे पी या इससे खेती कर सकते हैं?क्यों नहीं
महासागर और समुद्रनहींबहुत खारा। शरीर को हानि पहुँचाता है और फसल सुखा देता है।
हिमनद, हिमटोप, हिमसीधे नहींयह ठोस बर्फ है और बहुत ठंडे, दूर के स्थानों पर है।
गहरा भूमिगत जलकुछ ही भागयह भूमि के बहुत नीचे है, कुएँ या पंप के बिना नहीं मिलता।
नदी, तालाब, झील, वर्षाहाँयही हमारा वास्तविक भंडार है — और यह बहुत ही छोटा भाग है।
नमक ही समस्या क्यों है: खारा जल शरीर को जल देने के बजाय उससे जल खींच लेता है। इसे पीने पर प्यास और बढ़ जाती है। खेत में डालने पर पौधे सूख जाते हैं और मृदा खराब हो जाती है। इसीलिए जो थोड़ा-सा मीठा जल हमारे पास है, उसे कभी व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
प्र3.
ऐसा क्यों है कि जलीय निकायों के आस-पास बड़ी संख्या में सजीव प्रजातियाँ निवास करती हैं?
उत्तर

क्योंकि जल उन्हें जीवित रहने के लिए आवश्यक सब कुछ देता है — पीने का जल, भोजन, रहने का स्थान और बच्चों को पालने की सुरक्षित जगह। कोई भी सजीव जल के बिना जीवित नहीं रह सकता, इसलिए जीवन वहीं इकट्ठा होता है जहाँ जल है।

  • पीने का जल। हर जंतु को जल पीना पड़ता है। पास में तालाब या नदी हो तो दूर जाना नहीं पड़ता।
  • भोजन। जहाँ जल है वहाँ पौधे अच्छे उगते हैं, और जहाँ पौधे हैं वहाँ कीट, पक्षी और जंतु खाने आते हैं। तालाब स्वयं मछलियों, मेंढकों और कीटों से भरा रहता है।
  • घर। मछलियाँ, कछुए, जलीय सर्प और जलीय बिच्छू जल के भीतर रहते हैं। किनारे के नरकुल और कमल के पत्ते पक्षियों को घोंसले की और नन्हे जीवों को छिपने की जगह देते हैं।
  • ठंडी वायु। जल-निकाय के पास की वायु अधिक ठंडी और सुखद रहती है, विशेषकर गर्मियों में।
  • मनुष्यों के लिए। गाँव और नगर नदियों के किनारे बसते हैं, क्योंकि लोगों को पीने, खेती, पशुओं, धुलाई और नाव से यात्रा — सबके लिए जल चाहिए।
इतनी विविधता एक साथ क्यों: एक जल-निकाय छोटे-से क्षेत्र में अनेक अलग-अलग रहने के स्थान देता है — खुला जल, कीचड़ भरा संस्तर, नरकुल भरा किनारा, जल की सतह और तट। हर स्थान किसी अलग जीव के अनुकूल है, इसलिए बहुत सारे प्रकार के सजीव साथ-साथ रह पाते हैं।
भारत के दो उदाहरण: जम्मू-कश्मीर की वुलर झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे जल की झीलों में से एक है और बाढ़ रोकने में भी सहायक है। मणिपुर का केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है; इसके तैरते द्वीपों को फुमदी कहते हैं और वहाँ दुर्लभ संगाई हिरण रहता है।
प्र4.
यदि आपके क्षेत्र में दो वर्ष तक वर्षा नहीं हो तो क्या होगा?
उत्तर

जल का भीषण संकट खड़ा हो जाएगा — सूखा पड़ जाएगा। कुएँ और तालाब सूख जाएँगे, फसलें नष्ट हो जाएँगी और लोग तथा पशु दोनों कष्ट भोगेंगे।

क्रम से क्या होगा —

  1. पहले कुछ महीने। तालाब और छोटी धाराएँ सूख जाएँगी। मृदा कठोर होकर फट जाएगी।
  2. उसके बाद। भूमिगत जल का पुनर्भरण नहीं हो रहा, इसलिए उसका स्तर गिरने लगेगा। हैंडपंप हवा खींचने लगेंगे। कुएँ सूख जाएँगे।
  3. खेतों में। फसलें सूखकर नष्ट हो जाएँगी। किसानों को न उपज मिलेगी, न आय।
  4. भोजन और मूल्य। अनाज और सब्ज़ियाँ कम पड़ जाएँगी, इसलिए महँगी हो जाएँगी।
  5. पशु। गाय-भैंसों को न घास मिलेगी, न जल। वन्य जंतु क्षेत्र छोड़ देंगे या मर जाएँगे।
  6. लोग। परिवारों को जल लाने के लिए दूर-दूर तक चलना पड़ेगा। टैंकरों से जल मँगाना पड़ेगा। कुछ लोग काम की खोज में गाँव छोड़ भी सकते हैं।
  7. स्वास्थ्य। जो थोड़ा जल बचेगा वह प्राय: गंदा होगा, और गंदे जल से बीमारियाँ फैलती हैं।
सब कुछ प्रभावित क्यों होता है: हमारे संपूर्ण मीठे जल की शुरुआत वर्षा से ही होती है। वर्षा नदियाँ और तालाब भरती है और वर्षा ही रिसकर भूमिगत जल बनती है। वर्षा रुक जाए तो ये सब भंडार धीरे-धीरे खाली हो जाते हैं, क्योंकि हम जल निकालते रहते हैं और उसे भरने वाला कुछ नहीं होता।
ऐसे समय में क्या सहायक है: वर्षा होते समय जल को टंकियों और जोहड़ों में संचित करना, तालाबों और झीलों को स्वच्छ तथा भरा रखना, कम जल माँगने वाली फसलें उगाना और हर टपकते नल तथा पाइप की मरम्मत कराना। महाराष्ट्र का हिवरे बाज़ार गाँव वर्षा जल संचयन और जल-संभर प्रबंधन से ही अपने जल-संकट से उबरा।
प्र5.
आपके अनुसार शहर की तुलना में वन में वर्षा जल का क्या होता है?
उत्तर

वन में अधिकांश वर्षा जल भूमि में रिस जाता है। शहर में अधिकांश जल पक्की सतहों से बहकर नालियों में चला जाता है।

वर्षा जल का क्या होता हैवन मेंशहर में
पहले कहाँ गिरता हैपत्तियों और शाखाओं पर, जो उसकी गति धीमी कर देती हैंछतों, सड़कों और पक्के आँगनों पर
क्या वह भूमि में जा सकता है?हाँ — मृदा मुलायम है, सूखी पत्तियों से ढकी है और जड़ों की राहों से भरी हैप्राय: नहीं — सीमेंट और तारकोल में कोई रिक्त स्थान नहीं
जल की गतिधीमी। वह चुपचाप नीचे रिसता है।बहुत तेज़। वह चादर की तरह बहकर नालियों में गिरता है।
भूमिगत जलअच्छी तरह पुनर्भरित होता हैलगभग पुनर्भरित नहीं होता
मृदाजड़ें उसे थामे रखती हैंखुली मृदा कम है, और जो है वह बहकर चली जाती है
क्या परेशानी होती हैबहुत कमसड़कों पर जल-भराव, नालियों का जाम, अचानक शहरी बाढ़
वन यह काम बेहतर क्यों करता है: वन परतों में काम करता है। पत्तियाँ बूँदों की चोट रोक लेती हैं जिससे मृदा पर तेज़ प्रहार नहीं पड़ता। भूमि पर गिरी सूखी पत्तियाँ स्पंज की तरह काम करती हैं। जड़ें नीचे की ओर हज़ारों छोटी राहें बना देती हैं। इसलिए जल धीरे-धीरे और लगातार भीतर जाता है और भूमि के नीचे संचित हो जाता है। शहर ने यह सब हटाकर एक कठोर, बंद परत बिछा दी है, और बंद परत से जल आर-पार नहीं जा सकता।
शहर क्या कर सकता है: वृक्षों के चारों ओर खुली मृदा छोड़ना, जोड़ों वाली पेवर टाइलें लगाना, शोषक गर्त बनाना, और छत का वर्षा जल नाली में भेजने के बजाय टंकी या पुनर्भरण गड्ढे तक पहुँचाना।
प्र6.
क्या आप एक ऐसे घर या विद्यालय की आकृति बना सकते हैं जिसमें जल का विवेकपूर्वक संरक्षण हो? इसमें क्या-क्या सम्मिलित होगा?
उत्तर

हाँ। जल-विवेकी भवन तीन काम करता है: वह अपने ऊपर गिरी वर्षा को पकड़ता है, प्रतिदिन कम जल खर्च करता है, और जहाँ सुरक्षित हो वहाँ जल का दुबारा उपयोग करता है।

नमूना उत्तर — मेरा जल-विवेकी विद्यालय

1. वर्षा पकड़िए

  • हर छत के किनारे परनाला, जो एक ही पाइप में मिले।
  • ज़मीन पर एक बड़ी ढकी हुई टंकी, जिसके मुँह पर जाली, बजरी और रेत का सरल छन्ना लगा हो।
  • टंकी के पास एक पुनर्भरण गड्ढा। टंकी भर जाने पर अतिरिक्त जल इसी गड्ढे में जाकर नीचे रिस जाए और भूमिगत जल बन जाए।
  • विद्यालय के मैदान में एक छोटा तालाब, जो वर्षा जल रोके और उसे रिसने दे।

2. कम खर्च कीजिए

  • स्वयं बंद हो जाने वाले पुश-टैप, जिससे कोई नल खुला न रह जाए।
  • हर कक्षा से एक मॉनीटर सप्ताह में एक बार सभी नल और पाइप जाँचे और उसी दिन रिसाव की सूचना दे।
  • कम जल वाले या दो-बटन वाले फ्लश।
  • ऊपर की टंकी पर जल-स्तर सूचक, जिससे वह कभी न छलके।
  • बेसिन के पास मग रखें और धुलाई के लिए पाइप के स्थान पर बाल्टी का उपयोग करें।

3. जल का दुबारा उपयोग

  • दिन के अंत में बोतलों में बचा जल नाली में नहीं, गमलों में डालें।
  • आर.ओ. मशीन से निकलने वाला जल इकट्ठा करके फ़र्श धोने और बगीचा सींचने में लगाएँ।
  • रसोई-बगीचे को सुबह-सुबह टपक (ड्रिप) पाइप से बूँद-बूँद सींचें।

4. भूमि खुली रखिए

  • पूरा परिसर पक्का करने के बजाय घास, मृदा और वृक्ष रखें जिससे वर्षा रिस सके।
  • चलने के रास्तों पर जोड़ों वाली पेवर टाइलें लगाएँ।

5. सबको बताइए

  • हर नल पर चित्रित सूचना — “मुझे कसकर बंद कीजिए”।
  • सूचना-पट्ट पर एक चार्ट, जिसमें लिखा हो कि इस महीने विद्यालय ने कितने लीटर जल बचाया।
ये उपाय काम क्यों करते हैं: वर्षा जल संचयन उस जल को रोक लेता है जो अन्यथा नाली में बह जाता। पुनर्भरण गड्ढा जल को वहीं लौटा देता है जहाँ से वह आया था। पुश-टैप और रिसाव की जाँच उस चुपचाप होने वाली रोज़ की बरबादी को रोकते हैं जो सबसे अधिक होती है। और एक बार और उपयोग करने का अर्थ है कि हर लीटर एक के स्थान पर दो काम करता है।
चित्र बनाइए: भवन का एक सरल बगल का दृश्य बनाइए। छत दिखाइए, छत से पाइप तक तीर, पाइप से टंकी तक, टंकी से पुनर्भरण गड्ढे तक तीर, और तालाब तथा वृक्षों का नामांकन कीजिए। चित्र सुंदर होने से अधिक महत्वपूर्ण है नामांकन स्पष्ट होना।
प्र7.
आइए, हम कागज के टुकड़े को मोड़कर एक मछली बनाएँ। (चरण 1 से चरण 6 चित्रों में दिए गए हैं।)
उत्तर

कागज़ का एक वर्गाकार टुकड़ा लीजिए — कोई भी रंग चलेगा। कठोर, समतल मेज़ पर मोड़िए और हर मोड़ को अँगूठे के नाखून से अच्छी तरह दबाइए। पृष्ठ 20 के चित्रों के अनुसार छह चरण ये हैं —

  1. चरण 1 — आधा मोड़िए। नीचे का किनारा उठाकर ऊपर के किनारे से मिलाइए। मोड़ दबाइए और फिर खोल दीजिए। अब बीच में एक रेखा बन गई है।
  2. चरण 2 — चपटी पट्टी बनाइए। ऊपर का किनारा बीच की रेखा तक नीचे मोड़िए और नीचे का किनारा बीच की रेखा तक ऊपर मोड़िए। वर्ग अब दो परतों वाली लंबी पट्टी बन गया है।
  3. चरण 3 — बीच को खोलकर दबाइए। पट्टी के भीतर उँगली डालकर बीच का भाग फैलाइए, जिससे दोनों सिरे बाहर की ओर खुल जाएँ। अब कागज़ धनुष जैसा दिखता है — सिरों पर चौड़ा और बीच में सिकुड़ा हुआ।
  4. चरण 4 — एक सिरे से मीनपक्ष बनाइए। एक सिरे का कोना बाहर और ऊपर की ओर मोड़िए, जिससे एक त्रिभुज खड़ा हो जाए। यही त्रिभुज मछली की पीठ का मीनपक्ष बनेगा।
  5. चरण 5 — पूँछ बनाइए। दूसरे सिरे पर दोनों कोनों को बाहर की ओर मोड़िए, जिससे दो नुकीले सिरे बन जाएँ। इन्हें दबाकर चपटा कीजिए। अब यह करवट लेटी मछली जैसा दिखने लगा है।
  6. चरण 6 — मछली पूरी कीजिए। पूरी आकृति को इस प्रकार घुमाइए कि शरीर सीधा खड़ा हो, नुकीला सिरा पीछे रहे और चपटा सिरा आगे। एक बार फिर दबाकर चपटा कीजिए। अब आगे की ओर एक आँख और मुस्कुराता मुँह बना दीजिए। आपकी कागज़ की मछली तैयार है।
तैयार कागज़ की मछली
वर्गाकार शरीर, ऊपर एक मीनपक्ष, दो नुकीले सिरों की पूँछ और आपकी बनाई हुई आँख।
काम आने वाले सुझाव: आयत नहीं, वर्ग लीजिए — कागज़ का एक कोना आड़ा मोड़कर बची पट्टी काट दीजिए तो वर्ग बन जाएगा। अगला मोड़ बनाने से पहले पिछला मोड़ नाखून से दबा लीजिए। कोई चरण बिगड़ जाए तो कागज़ पूरा खोलकर चरण 1 से फिर आरंभ कीजिए; बने हुए मोड़ स्वयं राह दिखा देंगे।
अध्याय का अंत मछली से क्यों: अध्याय खिड़की पर गिरी एक बूँद से आरंभ हुआ था और जीवन से भरे तालाब पर समाप्त हुआ। कागज़ की यह मछली उसी तालाब की याद दिलाती है — और इस बात की भी कि उसकी हर मछली को स्वच्छ मीठा जल चाहिए, वही जल जो हम पीते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?