कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 गतिविधि 10 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कौन किसे खाता है? — एक नदी की आहार-श्रृंखला का खेल। विद्यार्थियों को कागज की पर्चियाँ वितरित कीजिए। प्रत्येक विद्यार्थी लिखेगा कि वह क्या बनना चाहता है (उदाहरण के लिए — छोटी मछली, बड़ी मछली, मेंढक, पक्षी, मनुष्य, मगरमच्छ, ऊदबिलाव इत्यादि)। विद्यार्थियों से कहिए कि वे विचार करें कि वे क्या खाते हैं और उन्हें कौन खाता है। एक रस्सी के द्वारा उन विद्यार्थियों को संबद्ध करें जो भोजन के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
उत्तर

खेल कैसे खेलें, चरण दर चरण:

  1. हर विद्यार्थी एक पर्ची लेकर नदी का कोई एक सजीव लिखे — जलीय पौधा, छोटी मछली, बड़ी मछली, मेंढक, व्याध पतंग, बगुला, किलकिला, जलीय सर्प, मगरमच्छ, ऊदबिलाव, मनुष्य। पर्ची अपनी कमीज़ पर लगा लीजिए।
  2. सब बड़ा गोल घेरा बनाकर खड़े हो जाइए।
  3. हर विद्यार्थी दो प्रश्न सोचे — मैं क्या खाता हूँ? और मुझे कौन खाता है?
  4. एक विद्यार्थी रस्सी का सिरा पकड़कर उसे उस साथी को दे, जिसे वह खाता है या जो उसे खाता है। वह साथी रस्सी पकड़कर आगे बढ़ा दे।
  5. इसी तरह तब तक चलिए जब तक सब रस्सी पकड़ न लें। अब घेरे के आर-पार रस्सी का एक जाल बन गया है — यही नदी की आहार-श्रृंखला है।
  6. अब परीक्षा। किसी एक से — मान लीजिए सभी छोटी मछलियों से — रस्सी छोड़ने को कहिए। देखिए कितनी और रस्सियाँ ढीली पड़ जाती हैं।

खेल में काम आने वाली नमूना आहार-श्रृंखलाएँ:

जलीय पौधे → छोटी मछली → बड़ी मछली → बगुला
जलीय पौधे → टैडपोल → मेंढक → जलीय सर्प → किलकिला
नन्हे जलीय कीट → व्याध पतंग → मेंढक → मगरमच्छ
जलीय पौधे → छोटी मछली → बड़ी मछली → मनुष्य
जलीय पौधे छोटी मछली बड़ी मछली बगुला हर तीर का अर्थ है “इसे खाया जाता है”। ऊर्जा तीरों के साथ आगे बढ़ती है।
नदी की एक सरल आहार-श्रृंखला। इसका हर जंतु अपने से पहले वाले पर निर्भर है।
यह खेल क्या सिखाता है: नदी में कोई भी सजीव अकेले अपना भोजन नहीं जुटाता। पौधे सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। छोटे जंतु पौधों को खाते हैं। बड़े जंतु छोटे जंतुओं को खाते हैं। इस प्रकार सूर्य की ऊर्जा पूरी श्रृंखला में यात्रा करती है। चूँकि श्रृंखलाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, इसलिए यह वास्तव में एक सीधी रेखा नहीं, बल्कि आहार-जाल है।
प्र2.
चर्चा कीजिए कि यदि श्रृंखला में से एक जंतु लुप्त हो जाए तो क्या होगा (उदाहरण के लिए यदि सभी मछलियाँ लुप्त हो जाएँ तो क्या होगा?)
उत्तर

यदि सारी मछलियाँ लुप्त हो जाएँ तो पूरी नदी का संतुलन बिगड़ जाएगा। कुछ जंतु भूखे रह जाएँगे, कुछ की संख्या बहुत बढ़ जाएगी और मनुष्यों का भोजन तथा रोज़गार छिन जाएगा।

श्रृंखला को दोनों ओर से देखिए।

किस पर असरक्या होगाक्यों
बगुला, किलकिला, मगरमच्छ, ऊदबिलाव, जलीय सर्पभूखे रहेंगे; दूसरे जल-निकाय की ओर चले जाएँगे या इनकी संख्या घट जाएगीमछली इनका मुख्य भोजन थी। अब खाने को कुछ बचा ही नहीं।
जलीय कीट, मच्छरों के लार्वा, टैडपोलइनकी संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ जाएगीमछलियाँ इन्हें खाती थीं। मछली न रहने पर इन्हें रोकने वाला कोई नहीं। अधिक मच्छर अर्थात् अधिक बीमारी।
जलीय पौधे और शैवालपूरे तालाब पर फैलकर उसे घोंट सकते हैंइन्हें चरने वाले नन्हे जीवों को मछलियाँ खाती थीं। मछली हटते ही पूरी कड़ी डगमगा जाती है।
मछली पकड़ने वाले लोगभोजन और जीविका दोनों खो देंगेमछुआरा परिवार सीधे नदी पर निर्भर हैं।
स्वयं जलअधिक गंदा हो जाएगामछलियाँ मरे हुए अंश खाकर जल स्वच्छ रखती हैं। उनके बिना जल दुर्गंधयुक्त और अस्वास्थ्यकर हो जाता है।

चर्चा के लिए नमूना उत्तर: “यदि सारी मछलियाँ लुप्त हो जाएँ तो मछली खाने वाले पक्षियों और जंतुओं के पास खाने को कुछ नहीं बचेगा, इसलिए वे नदी छोड़ देंगे या मर जाएँगे। साथ ही जिन कीटों को मछलियाँ खाती थीं, उनकी संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ जाएगी। मछुआरों का रोज़गार चला जाएगा। एक कड़ी टूटते ही पूरी श्रृंखला टूट जाती है — इसलिए एक जीव की रक्षा करना असल में सबकी रक्षा करना है।”

मछलियाँ लुप्त क्यों होती हैं? नदियों में कचरा और प्लास्टिक फेंकना, कारखानों और नालियों का गंदा जल बिना उपचार के छोड़ देना, और आवश्यकता से बहुत अधिक मछलियाँ पकड़ लेना। नदी को स्वच्छ रखना ही उसकी आहार-श्रृंखला को बचाए रखने का उपाय है।
क्या यह उपयोगी रहा?