प्र1.
1. एक कागज का टुकड़ा लीजिए और उस पर जल की एक बूँद डालिए। अवलोकन कीजिए।
उत्तर
आप क्या देखेंगे: बूँद गोल नहीं रहती। वह तुरंत फैलकर चपटा गीला धब्बा बन जाती है, कागज़ में समा जाती है और वह स्थान गहरा, मुलायम तथा आर-पार दिखने वाला हो जाता है। कागज़ उठाने पर गीला भाग झूल जाता है और रगड़ने पर सरलता से फट जाता है।
कैसे कीजिए:
- सादा, स्वच्छ कागज़ लीजिए — पुरानी कॉपी का पन्ना भी चलेगा।
- उँगली जल में डुबोकर कागज़ के बीच में एक बूँद गिराइए।
- धीरे-धीरे दस तक गिनिए और बूँद को देखिए।
- अब गीले स्थान को हल्के से छूकर देखिए कि कागज़ कैसा लगता है।
ऐसा क्यों होता है: कागज़ असंख्य नन्हे रेशों को दबाकर बनाया जाता है और उनके बीच नन्हे रिक्त स्थान रहते हैं। जल उन्हीं रिक्त स्थानों में घुसकर अगल-बगल और नीचे फैल जाता है। कागज़ जल को सोख लेता है, ठीक जैसे कपड़ा या स्पंज सोखता है।