कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 जल में जीवन के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
जल में रहने वाले विविध प्रकार के पौधों और जंतुओं को देखना अद्भुत है! ये स्थल पर रहने वाले जीवों से किस प्रकार अलग हैं?
उत्तर

ये इसलिए अलग हैं कि इनका शरीर स्थल के लिए नहीं, जल के लिए बना है। जल में रहने वाले जंतु को तैरना पड़ता है, जल के भीतर साँस लेनी पड़ती है और बहते जल में स्वयं को सँभालना पड़ता है। इसलिए उसके पास मीनपक्ष, गलफड़े और चिकना नुकीला शरीर होता है। स्थल के जंतु को चलना और वायु में साँस लेनी होती है, इसलिए उसके पास पैर और फेफड़े होते हैं।

पृष्ठ 14–15 के तालाब के चित्र को देखिए और तुलना कीजिए।

  • गति कैसे करते हैं। मछली मीनपक्ष और पूँछ से; मेंढक जालयुक्त पिछले पैरों से; बगुला लंबे पतले पैरों से उथले जल में चलकर। स्थल पर हिरण या कुत्ता चार पैरों से दौड़ता है।
  • श्वास कैसे लेते हैं। अधिकांश मछलियाँ जल में घुली वायु गलफड़ों से लेती हैं। स्थल के जंतु नाक से वायु लेकर फेफड़ों तक पहुँचाते हैं।
  • शरीर की आकृति। मछली दोनों सिरों पर नुकीली और चिकनी होती है, इसलिए जल में सरलता से फिसलती है। स्थल के जंतु को ऐसी आकृति की आवश्यकता नहीं।
  • शरीर का आवरण। मछलियों पर गीले, फिसलनदार शल्क होते हैं। स्थल के जंतुओं पर सूखी त्वचा, बाल या पंख होते हैं।
  • पौधे भी। जलीय पौधों के तने कोमल होते हैं जो जल के साथ झुक जाते हैं और पत्तियाँ चौड़ी होकर तैरती हैं। स्थल के पौधों के तने कठोर होते हैं जो हवा के सामने सीधे खड़े रहते हैं।
ऐसा क्यों: जल किसी भी चलती वस्तु पर वायु से कहीं अधिक धक्का लगाता है। चिकना, नुकीला शरीर और चपटे मीनपक्ष इसी धक्के से निपटते हैं। साथ ही जल के भीतर खुली वायु नहीं मिलती, इसलिए वहाँ रहने वाले जंतु को जल में घुली थोड़ी-सी वायु लेनी पड़ती है — यही काम गलफड़े करते हैं।
प्र2.
अपने साथियों के साथ स्थल पर रहने वाले जंतुओं और जल में रहने वाले जंतुओं की विशेषताओं पर चर्चा कीजिए और आगे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (दी गई पंक्ति: ‘ये जल में श्वास नहीं ले सकते हैं।’ / ‘इनमें तैरने के लिए मीनपक्ष होते हैं।’)
स्थल पर रहने वाले जंतुजल में रहने वाले जंतु
ये जल में श्वास नहीं ले सकते हैं।इनमें तैरने के लिए मीनपक्ष (गलफड़े) होते हैं।
  
  
  
  
  
पृष्ठ 15 पर छपी तालिका, ठीक वैसी ही जैसी पुस्तक में है — एक पंक्ति भरी हुई, पाँच पंक्तियाँ रिक्त।
उत्तर

पूरी की गई तालिका यह रही। पहली पंक्ति पुस्तक ने दी है।

स्थल पर रहने वाले जंतुजल में रहने वाले जंतु
ये जल में श्वास नहीं ले सकते हैं।इनमें तैरने के लिए मीनपक्ष होते हैं।
नाक से वायु लेकर फेफड़ों से श्वास लेते हैं।अधिकांश जल के भीतर गलफड़ों से श्वास लेते हैं।
चलने, दौड़ने या उड़ने के लिए पैर या पंख होते हैं।जल को पीछे धकेलने के लिए मीनपक्ष और मज़बूत पूँछ होती है।
शरीर पर बाल, पंख या सूखे शल्क होते हैं।शरीर चिकना और फिसलनदार होता है, प्राय: गीले शल्कों वाला।
शरीर की आकृति चिकनी हो, यह आवश्यक नहीं।शरीर दोनों सिरों पर नुकीला होता है जिससे जल में सरलता से फिसल सके।
अंडे स्थल पर देते हैं या बच्चे स्थल पर जन्म लेते हैं।अनेक जंतु जल में ही कोमल अंडे देते हैं।

उदाहरण जो आप जोड़ सकते हैं: स्थल पर — गाय, कुत्ता, मुर्गी, हिरण, हाथी। जल में — मछली, मीठे पानी का कछुआ, जलीय सर्प, जलीय बिच्छू।

शब्दों पर ध्यान दीजिए: मीनपक्ष वे चपटे अंग हैं जिनसे मछली तैरती है, और गलफड़े वे अंग हैं जिनसे वह जल में श्वास लेती है। दोनों अलग-अलग काम करते हैं।
कुछ दोनों जगह रहते हैं। कमल के पत्ते पर बैठा मेंढक छोटी अवस्था में टैडपोल बनकर तालाब में मछली की तरह श्वास लेता है और बड़ा होकर स्थल पर कूदता है और वायु में श्वास लेता है। भारत की आर्द्रभूमियों में मिलने वाली मत्स्य बिल्ली (फिशिंग कैट) के पंजे आंशिक रूप से जालयुक्त होते हैं और वह मछली पकड़ने के लिए गोता लगाती है, पर रहती स्थल पर ही है।
क्या यह उपयोगी रहा?