प्र1.
जल में रहने वाले विविध प्रकार के पौधों और जंतुओं को देखना अद्भुत है! ये स्थल पर रहने वाले जीवों से किस प्रकार अलग हैं?
उत्तर
ये इसलिए अलग हैं कि इनका शरीर स्थल के लिए नहीं, जल के लिए बना है। जल में रहने वाले जंतु को तैरना पड़ता है, जल के भीतर साँस लेनी पड़ती है और बहते जल में स्वयं को सँभालना पड़ता है। इसलिए उसके पास मीनपक्ष, गलफड़े और चिकना नुकीला शरीर होता है। स्थल के जंतु को चलना और वायु में साँस लेनी होती है, इसलिए उसके पास पैर और फेफड़े होते हैं।
पृष्ठ 14–15 के तालाब के चित्र को देखिए और तुलना कीजिए।
- गति कैसे करते हैं। मछली मीनपक्ष और पूँछ से; मेंढक जालयुक्त पिछले पैरों से; बगुला लंबे पतले पैरों से उथले जल में चलकर। स्थल पर हिरण या कुत्ता चार पैरों से दौड़ता है।
- श्वास कैसे लेते हैं। अधिकांश मछलियाँ जल में घुली वायु गलफड़ों से लेती हैं। स्थल के जंतु नाक से वायु लेकर फेफड़ों तक पहुँचाते हैं।
- शरीर की आकृति। मछली दोनों सिरों पर नुकीली और चिकनी होती है, इसलिए जल में सरलता से फिसलती है। स्थल के जंतु को ऐसी आकृति की आवश्यकता नहीं।
- शरीर का आवरण। मछलियों पर गीले, फिसलनदार शल्क होते हैं। स्थल के जंतुओं पर सूखी त्वचा, बाल या पंख होते हैं।
- पौधे भी। जलीय पौधों के तने कोमल होते हैं जो जल के साथ झुक जाते हैं और पत्तियाँ चौड़ी होकर तैरती हैं। स्थल के पौधों के तने कठोर होते हैं जो हवा के सामने सीधे खड़े रहते हैं।
ऐसा क्यों: जल किसी भी चलती वस्तु पर वायु से कहीं अधिक धक्का लगाता है। चिकना, नुकीला शरीर और चपटे मीनपक्ष इसी धक्के से निपटते हैं। साथ ही जल के भीतर खुली वायु नहीं मिलती, इसलिए वहाँ रहने वाले जंतु को जल में घुली थोड़ी-सी वायु लेनी पड़ती है — यही काम गलफड़े करते हैं।