कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आफरीन पूछती है, “तुम्हें क्या लगता है कि ये जल कहाँ से आता है और फिर कहाँ चला जाता है?”
उत्तर

वर्षा बादलों से आती है, और बादल उस जल से बनते हैं जो महासागरों, नदियों और झीलों से ऊपर उठा था। वर्षा के बाद यह जल फिर से भूमि में, नदियों में और सागर में लौट जाता है। जल इसी प्रकार निरंतर घूमता रहता है।

एक बूँद के साथ-साथ चलिए।

  1. सूर्य सागर, नदियों और तालाबों के जल को गर्म करता है।
  2. उस जल का कुछ भाग जलवाष्प — गैस के रूप में अदृश्य जल — बनकर वायु में ऊपर उठ जाता है।
  3. ऊपर वायु ठंडी होती है। वाष्प ठंडी होकर बहुत नन्हीं बूँदें बनाती है। ऐसी लाखों बूँदें मिलकर बादल बनाती हैं।
  4. जब बूँदें बड़ी और भारी हो जाती हैं तो नीचे गिर जाती हैं। यही आफरीन की खिड़की पर पड़ रही वर्षा है।
  5. वर्षा का जल नालियों, तालाबों और नदियों में बहता है। कुछ जल मृदा में रिस जाता है। नदियाँ शेष जल को सागर तक पहुँचा देती हैं।
  6. सूर्य उसे फिर गर्म करता है और पूरी यात्रा दोबारा आरंभ हो जाती है।
सूर्य सागर, नदी, तालाब जलवाष्प ऊपर उठती है बादल बनते हैं वर्षा होती है जल लौटकर आता है
वही जल गोल-गोल घूमता है — सागर से आकाश, आकाश से भूमि, भूमि से सागर। यही जल-चक्र है।
ऐसा क्यों होता है: ताप जल को वाष्प बनाकर ऊपर भेजता है और ठंडक वाष्प को फिर बूँदों में बदल देती है। ताप सूर्य से मिलता है और ठंडक आकाश से, इसलिए जल कभी रुकता नहीं।
क्या आप जानते हैं? पृथ्वी नया जल नहीं बनाती। आज आपकी खिड़की पर गिरी बूँद कभी किसी नदी में रही होगी, कभी किसी बादल में, या कभी किसी के गिलास में भी।
क्या यह उपयोगी रहा?