कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 2 गतिविधि 4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे दिए गए दो चित्रों को देखिए। कौन-सी नदी स्वच्छ दिख रही है और क्यों?
उत्तर

पहले चित्र वाली नदी — जिस पर लिखा है ‘स्वच्छ जल युक्त नदी’ — ही स्वच्छ और स्वस्थ है।

दोनों चित्रों की बिंदुवार तुलना कीजिए।

क्या देखेंचित्र 1 — स्वच्छ जल युक्त नदीचित्र 2 — हरित आवरण युक्त नदी
जल की सतहखुला नीला जल, उस पर लहरें दिखती हैंलगभग पूरी सतह मोटी हरी चादर से ढकी; बीच-बीच में केवल छोटे-छोटे जल के टुकड़े दिखते हैं
जल का रंगगहरा नीला और स्वच्छपूरा हरा, मानो नदी पर घास बिछा दी गई हो
क्या सूर्य का प्रकाश भीतर जा सकता है?हाँनहीं — हरा आवरण उसे रोक देता है
क्या वायु जल तक पहुँच सकती है?हाँ, पूरी सतह खुली हैप्राय: नहीं — सतह पौधों से बंद है
तटदोनों ओर हरे वृक्षवृक्ष तो हैं, पर नदी स्वयं हरे आवरण के नीचे छिप गई है
स्वस्थ?हाँनहीं
खुली सतह का अर्थ स्वस्थ नदी क्यों है: मछलियाँ और अन्य जलीय जंतु जल में घुली हुई वायु से श्वास लेते हैं। यह वायु खुली सतह से ही भीतर जाती है। जल के भीतर के पौधों को सूर्य का प्रकाश चाहिए। सतह खुली हो तो वायु और प्रकाश दोनों भीतर पहुँचते हैं और नीचे का जीवन स्वस्थ रहता है। मोटी हरी चादर दोनों को रोक देती है — इसीलिए हरा रंग सामान्यत: स्वास्थ्य का रंग होने पर भी यहाँ संकट का संकेत है।
प्र2.
जल में इतने सारे पौधे कैसे उग जाते हैं?
उत्तर

क्योंकि खेतों का उर्वरक बहकर नदी में पहुँच जाता है और उर्वरक पौधों का भोजन है। इतना अधिक भोजन मिलने पर जलीय पौधे सामान्य से कहीं तेज़ी से बढ़ते हैं और बढ़ते-बढ़ते पूरी सतह ढँक लेते हैं।

यह क्रम से इस प्रकार होता है:

  1. किसान फसल की वृद्धि के लिए खेत में उर्वरक डालता है।
  2. वर्षा होती है या खेत की सिंचाई होती है।
  3. कुछ उर्वरक उस जल में घुलकर खेत से बहकर नाली या धारा में चला जाता है।
  4. धारा उसे नदी में ले आती है।
  5. नदी में पहले से रह रहे छोटे-छोटे पौधों को अब बहुत अधिक भोजन मिल जाता है।
  6. वे बहुत तेजी से बढ़ते और फैलते हैं और पूरी सतह को ढँक लेते हैं — यही अध्याय का ‘हरित आवरण’ है।
अतिरिक्त भोजन उपहार क्यों नहीं, समस्या क्यों है: खेत में थोड़ा उर्वरक अच्छा है, क्योंकि फसल काटकर हटा ली जाती है। नदी में पौधों को हटाने वाला कोई नहीं है। वे एक के ऊपर एक बढ़ते ही चले जाते हैं। नालियों का जल और साबुन वाला जल भी यही करते हैं, क्योंकि वे भी पौधों का भोजन नदी में ले जाते हैं।
इसे कैसे रोकें: उर्वरक उतना ही डालें जितना फसल को सचमुच चाहिए; खेत और नदी के बीच घास या वृक्षों की एक पट्टी छोड़ दें जो बहाव को रोक ले; और नालियों का जल नदी में जाने से पहले साफ किया जाए।
प्र3.
आपके विचार से नदी में बहुत से पौधों के उग जाने से क्या होगा?
उत्तर

हरा आवरण धीरे-धीरे नदी के भीतर के समस्त जीवन का दम घोंट देता है। मछलियों के लिए श्वास लेना कठिन हो जाता है और जल लोगों के पीने के लिए असुरक्षित हो जाता है। पृष्ठ 30 पर अध्याय यही कहता है।

घटनाओं की कड़ी इस प्रकार है:

  1. पौधे पूरी सतह पर मोटी चादर की तरह फैल जाते हैं।
  2. सूर्य का प्रकाश नीचे के जल तक नहीं पहुँच पाता, इसलिए जल के भीतर उगने वाले पौधे मर जाते हैं।
  3. ऊपर से वायु जल में नहीं मिल पाती, क्योंकि सतह बंद है।
  4. मरे हुए पौधे गलते हैं और गलने की क्रिया जल में बची-खुची वायु भी समाप्त कर देती है।
  5. मछलियाँ और अन्य जलीय जंतु श्वास नहीं ले पाते। अनेक मर जाते हैं।
  6. जल से दुर्गंध आने लगती है और वह पीने योग्य नहीं रहता।
  7. नावें सरलता से नहीं चल पातीं और आवरण के नीचे ठहरे जल में मच्छर पनपते हैं।
खुली सतह: वायु और प्रकाश भीतर जाते हैं हरित आवरण: दोनों रुक जाते हैं बाईं ओर मछलियाँ स्वस्थ हैं। दाईं ओर वायु और प्रकाश न मिलने से उनका दम घुटताहै।
एक ही नदी — एक बार खुली सतह के साथ और एक बार हरित आवरण के नीचे।
‘दम घुटना’ शब्द ही सही क्यों है: जल में रहने वाले हर सजीव को वायु चाहिए, ठीक जैसे आपको चाहिए। ऊपर के पौधे डिब्बे के ढक्कन की तरह काम करते हैं। कुछ भीतर नहीं जा पाता, इसलिए नीचे सब कुछ धीरे-धीरे वायु से वंचित हो जाता है। यहाँ नदी किसी विष से नहीं मरती — उसका दम घुटता है।
क्या किया जा सकता है: उर्वरक और नालियों का जल नदी में जाने से रोकिए; समय-समय पर हरी चादर हटाइए; और सतह का कुछ भाग सदा खुला रखिए ताकि वायु भीतर जा सके।
क्या यह उपयोगी रहा?