प्र1.
स्वच्छ पानी से भरे दो गिलास लीजिए। एक में एक चम्मच शक्कर मिलाइए और दूसरे में एक चम्मच खाना पकाने का तेल मिलाइए। दोनों को चम्मच से अच्छी तरह मिलाइए और अवलोकन कीजिए। आपने क्या देखा? कौन-सा जल स्वच्छ दिखाई देता है?
उत्तर
आप यह देखेंगे: शक्कर पूरी तरह गायब हो जाती है और वह गिलास सादे जल जैसा स्वच्छ दिखता है। तेल बिलकुल नहीं मिलता — वह छोटी-छोटी पीली बूँदों में टूटता है और फिर ऊपर आकर चमकीली परत बना लेता है। शक्कर वाला गिलास स्वच्छ दिखाई देता है।
इसे कैसे करें:
- दो स्वच्छ गिलास लीजिए। दोनों में लगभग तीन-चौथाई तक स्वच्छ जल भरिए और पास-पास रखिए।
- पहले गिलास में एक चम्मच शक्कर डालिए।
- दूसरे गिलास में एक चम्मच खाना पकाने का तेल डालिए।
- स्वच्छ चम्मच से दोनों को लगभग आधे मिनट तक अच्छी तरह मिलाइए।
- अब दोनों गिलासों को दो मिनट स्थिर रहने दीजिए और प्रकाश की ओर करके बगल से देखिए।
| मैं क्या देखता हूँ | गिलास 1 — शक्कर | गिलास 2 — तेल |
|---|---|---|
| मिलाते समय | सफेद कण छोटे-से-छोटे होते जाते हैं | तेल अनेक छोटी गोल बूँदों में टूट जाता है |
| मिलाने के तुरंत बाद | एक भी कण शेष नहीं | नन्हीं बूँदें पूरे जल में फैली हैं, जल धुँधला दिखता है |
| दो मिनट बाद | जल पूरी तरह स्वच्छ है | सारी बूँदें ऊपर आकर चमकीली परत बना चुकी हैं |
| क्या कुछ दिखाई देता है? | नहीं — पर एक बूँद चखिए, वह मीठी है; अर्थात् शक्कर उसी में है | हाँ — तेल ऊपर तैरता स्पष्ट दिखाई देता है |
| कौन-सा स्वच्छ दिखता है? | शक्कर वाला गिलास | स्वच्छ नहीं — ऊपर तेल दिखाई देता है |
ऐसा क्यों होता है: शक्कर जल में घुल जाती है। इसका अर्थ है कि उसके नन्हे कण टूटकर पूरे जल में इतने समान रूप से फैल जाते हैं कि आँखें उन्हें देख ही नहीं पातीं। तेल घुलता नहीं। तेल जल से हल्का भी है, इसलिए मिलाने के बाद उसकी सब बूँदें धीरे-धीरे ऊपर उठकर आपस में जुड़ जाती हैं। शक्कर जल में छिपी है; तेल केवल जल पर बैठा है।
अध्याय यह प्रयोग क्यों कराता है: एक चेतावनी सिद्ध करने के लिए — स्वच्छ दिखना और स्वच्छ होना एक बात नहीं है। हानिकारक रसायन और साबुन का पानी शक्कर की ही तरह घुल जाते हैं। वे दिखते नहीं, पर होते हैं, और सजीवों को हानि पहुँचा सकते हैं।