कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 2 गतिविधि 2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
उन वस्तुओं की एक सूची बनाइए जिन्हें हम घर या विद्यालय में कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं। यदि इन वस्तुओं को किसी नदी या तालाब में फेंका जाता है तो इनमें से प्रत्येक वस्तु किस प्रकार आस-पास रहने वाले और इस जल का उपयोग करने वाले प्राणियों, पादपों और व्यक्तियों को हानि पहुँचाती है?
उत्तर

इसे कैसे करें:

  1. दो दिन तक घर और विद्यालय में कचरे के डिब्बे में जो कुछ जाए, उसे लिखते जाइए। कचरे को छूना नहीं है — केवल देखकर लिखिए।
  2. सूची को तीन समूहों में बाँटिए — गलने वाली वस्तुएँ (रसोई का कचरा), न गलने वाली वस्तुएँ (प्लास्टिक, काँच, धातु) और हानिकारक वस्तुएँ (सेल, दवाइयाँ, टूटे बल्ब, बची हुई पेंट)।
  3. हर वस्तु के बारे में तीन प्रश्न पूछिए — यह तैरेगी या डूबेगी? यह गलती है या नहीं? यह जल में घुलती है या नहीं?
  4. फिर उससे होने वाली हानि लिखिए। नीचे भरी हुई तालिका बताती है कि पूरा उत्तर कैसा होता है।
कचरे के डिब्बे में जाने वाली वस्तुनदी या तालाब में जाने पर वह क्या हानि करेगी
प्लास्टिक के रैपर, थैलियाँ, बोतलेंवर्षों तक नहीं गलतीं। तैरकर जल को ढँक लेती हैं। मछलियाँ, कछुए और गायें इन्हें निगल लेती हैं और उनका पेट अवरुद्ध हो जाता है। ये नालियाँ भी रोक देती हैं जिससे बाढ़ आती है।
रसोई का कचरा — छिलके, बचा भोजनगलते समय जल में घुली हुई वायु समाप्त कर देते हैं, जिससे मछलियों को श्वास लेना कठिन हो जाता है। जल से दुर्गंध आने लगती है और मक्खियाँ तथा चूहे बढ़ते हैं।
काँच के टुकड़े, टूटे बल्बडूब जाते हैं और सदा नुकीले बने रहते हैं। उथले जल में चलने वाले लोगों, पशुओं और पक्षियों के पैर कट जाते हैं।
पुराने सेल, दवाइयाँ, पेंट, कीटनाशक के डिब्बेसबसे अधिक हानिकारक। इनसे निकले रसायन जल में घुल जाते हैं और दिखाई नहीं देते। ये मछलियों को विषाक्त कर देते हैं और यह जल पीने वाले लोग बीमार पड़ जाते हैं।
साबुन का जल, धुलाई चूर्ण, फर्श परिमार्जकपूरी तरह घुल जाते हैं, इसलिए जल स्वच्छ दिखता है पर होता नहीं। ये मछलियों को हानि पहुँचाते हैं और पौधों को असामान्य रूप से बढ़ा देते हैं।
कागज़, गत्ता, पुरानी कॉपियाँजल सोखकर डूब जाते हैं और धीरे-धीरे गलते हैं। जल गँदला हो जाता है और तली के पौधे ढँक जाते हैं।
कपड़ा, रबर की चप्पल, थर्मोकोलगलते नहीं। मोड़ों और पुलों के पास जमा होकर जल का प्रवाह रोक देते हैं।
धातु के डिब्बे और कनस्तरडूबते हैं, जंग खाते हैं और नुकीले किनारे छोड़ जाते हैं। जंग जल की गुणवत्ता बिगाड़ती है।
पूजा-सामग्री — फूल, वस्त्र, तेल, राखएक साथ बहुत मात्रा में आती है। फूल गलकर वायु समाप्त करते हैं और तेल सतह पर परत बनाकर वायु को जल में जाने से रोक देता है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी अपशिष्टइनमें रोगाणु होते हैं। जल छूने योग्य भी नहीं रहता और नदी की सफाई करने वालों के लिए यह खतरनाक है।
इस गतिविधि का मूल विचार: घर के कूड़ेदान की एक तली होती है। नदी की कोई तली नहीं होती। नदी में डाली गई हर वस्तु या तो उसी में रह जाती है या बहकर किसी और तक पहुँच जाती है। आपके हाथ से निकला अपशिष्ट कहीं आगे किसी जंतु या व्यक्ति के जल में पहुँचता है। इसीलिए अध्याय की नदी कहती है — “काश! मैं उन्हें बता सकती कि वे मुझे स्वच्छ रखने में सहायता करें।”
इसके स्थान पर क्या करें: घर में दो कूड़ेदान रखिए — गीला कचरा (छिलके, भोजन) और सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज़, धातु)। गीले कचरे से खाद बन सकती है और सूखा कचरा पुनर्चक्रण के लिए दिया जा सकता है। सेल और दवाइयाँ इन दोनों में नहीं, अलग संग्रह-स्थान पर जानी चाहिए।
क्या यह उपयोगी रहा?