प्र1.
अपने माता-पिता और अपने बड़ों से पूछिए कि जब वे आपकी आयु के थे तो घर के आस-पास के जल-निकायों की स्थिति कैसी थी? आज इन जल-निकायों की स्थिति कैसी है?
उत्तर
यह कार्य कैसे करें:
- किसी एक बड़े को चुनिए — दादा-दादी, माता-पिता या कोई पुराना पड़ोसी जो बहुत समय से यहीं रह रहा हो।
- पूछिए कि जब वे दस वर्ष के थे तब आपके घर के आस-पास कौन-कौन से जल-निकाय थे — नदी, तालाब, बावड़ी, पोखर, नहर, गाँव का कुआँ।
- ये पाँच प्रश्न पूछिए और उत्तर कॉपी में लिखिए:
- जल कैसा दिखता था? क्या तली दिखाई देती थी?
- लोग उसका उपयोग किन कामों में करते थे — पीने, नहाने, धोने, पशुओं या फसलों के लिए?
- उसमें क्या रहता था — मछली, कछुए, मेंढक, पक्षी?
- क्या वर्षभर उसमें जल रहता था?
- क्या कोई उसमें अपशिष्ट डालता था? उसकी देखभाल कौन करता था?
- अब उसी जल-निकाय को स्वयं जाकर देखिए और आज के लिए वही पाँच प्रश्न भरिए।
- दो स्तंभों की तालिका बनाइए — तब और अब। तुलना कीजिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
| प्रश्न | तब (लगभग 40 वर्ष पहले) | अब |
|---|---|---|
| जल कैसा दिखता था | स्वच्छ; तली दिखाई देती थी | हरा या मटमैला; प्राय: दुर्गंध आती है |
| किन कामों में आता था | पीने, नहाने, पशुओं और फसलों के लिए | अधिकतर पशुओं और धुलाई के लिए; पीता कोई नहीं |
| जल में जीवन | बहुत मछलियाँ, मेंढक, कछुए, पक्षी | मछलियाँ कम; कुछ पक्षी; मच्छर अधिक |
| वर्षभर जल | ग्रीष्म में भी जल रहता था | ग्रीष्म में सूख जाता है या बहुत कम रह जाता है |
| अपशिष्ट | बहुत कम; लोग उसे स्वच्छ रखते थे | प्लास्टिक, नालियों का जल, कभी-कभी मलबा |
| देखभाल कौन करता था | पूरा गाँव मिलकर | प्राय: कोई नहीं |
नमूना उत्तर: “मेरी दादी बताती हैं कि जब वे मेरी आयु की थीं तो हमारी गली के पीछे वाला तालाब वर्षभर स्वच्छ जल से भरा रहता था। एक कोने पर स्त्रियाँ कपड़े धोती थीं, दूसरे कोने पर पशु जल पीते थे और बच्चे छोटी मछलियाँ पकड़ते थे। हर वर्ष वर्षा से पहले पूरा गाँव मिलकर तालाब की सफाई करता था। आज तालाब का एक भाग पाटकर मकान बना दिए गए हैं, दूसरी ओर एक नाला गिरता है और जल हरा तथा दुर्गंधयुक्त है। मछलियाँ नहीं हैं। मई में वह लगभग सूख जाता है। दादी कहती हैं कि यह अचानक नहीं हुआ — हर वर्ष थोड़ा-थोड़ा बिगड़ता गया, क्योंकि सबने सोचा कि इसकी देखभाल किसी और का काम है।”
इस तुलना से क्या सीखते हैं: जल-निकाय एक दिन में नहीं मरते। वे धीरे-धीरे मरते हैं — एक नाला, एक पाटा हुआ कोना, एक ट्रॉली मलबा — एक-एक करके। अच्छी बात यह है कि उन्हें उसी प्रकार, थोड़ा-थोड़ा करके, लौटाया भी जा सकता है — बशर्ते लोग फिर से उनकी देखभाल करने का निश्चय कर लें।