प्र1.
गतिविधि 6 में दिए गए बाढ़ से सुरक्षा के सुझावों को पढ़िए और एक नाट्यरूप (रोल प्ले) का आयोजन कीजिए जिसमें आप गाँव के सरपंच अथवा शहर के नगर निगम पार्षद की भूमिका में हों। चर्चा कीजिए कि आप निम्नलिखित के लिए क्या कार्यवाही करेंगे— • बाढ़ से बचाव करने के लिए • बाढ़ के कारण होने वाली क्षति से बचाव करने के लिए • वृद्धजनों और विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों को सुरक्षित रखने के लिए • पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए
उत्तर
नाट्यरूप का आयोजन कैसे करें:
- एक विद्यार्थी सरपंच (या नगर निगम पार्षद) बने। बाकी विद्यार्थी भूमिकाएँ लें — किसान, दुकानदार, शिक्षक, चिकित्सक, एक वृद्धजन, एक व्हीलचेयर का उपयोग करने वाला व्यक्ति, पशुपालक और एक पुलिसकर्मी।
- कुर्सियाँ अर्धचंद्राकार लगाइए। यही ग्राम सभा या वार्ड की बैठक है।
- सरपंच बैठक आरंभ करे — “अगले महीने वर्षा आरंभ होगी। आज हम तय करेंगे कि हमारा गाँव क्या करेगा।”
- हर भूमिका एक मिनट में अपनी चिंता बताए।
- फिर सरपंच नीचे दिए चार शीर्षकों के अनुसार योजना घोषित करे और एक विद्यार्थी उसे बैठक की कार्यवाही के रूप में श्यामपट्ट पर लिखे।
सरपंच द्वारा घोषित योजना:
1. बाढ़ से बचाव करने के लिए
- वर्षा से पहले गाँव की हर नाली और पुलिया साफ कराई जाए, ताकि जल बहकर निकल सके।
- गाँव के तालाब और नहर से गाद निकाली जाए, जिससे वे अधिक जल रोक सकें।
- नदी के तट पर और खुली ढलानों पर वृक्ष लगाए जाएँ — वृक्ष वर्षा के जल को मंद करते हैं और मिट्टी को जल सोखने में सहायता देते हैं।
- नीची भूमि और जल के प्राकृतिक मार्ग पर निर्माण तथा मलबा डालना रोका जाए।
- नदी के तटबंध के कमज़ोर स्थान अभी ठीक कराए जाएँ, जुलाई में नहीं।
2. बाढ़ के कारण होने वाली क्षति से बचाव करने के लिए
- पंचायत भवन में रेत की बोरियाँ, रस्सियाँ, सीढ़ियाँ, टॉर्च और दो नावें तैयार रखी जाएँ।
- ऊँचाई पर बने विद्यालय को राहत केंद्र घोषित किया जाए; वहाँ चावल, पेयजल, ओ.आर.एस. और दवाइयाँ रखी जाएँ।
- चेतावनी की व्यवस्था हो — लाउडस्पीकर और ब्लॉक कार्यालय से जुड़ा एक समूह।
- हर परिवार से कहा जाए कि कागज़, अनाज और महत्वपूर्ण वस्तुएँ ऊपर की मंज़िल या ऊँची अलमारी में रखें।
- स्थान खाली करने का मार्ग तय और घोषित किया जाए तथा वर्षा से पहले एक अभ्यास कराया जाए।
3. वृद्धजनों और विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों को सुरक्षित रखने के लिए
- घर-घर जाकर उन सबकी सूची बनाई जाए जो स्वयं शीघ्र नहीं चल सकते।
- ऐसे प्रत्येक व्यक्ति के लिए पास रहने वाले दो सहायक नाम से तय किए जाएँ।
- उन्हें सबसे पहले निकाला जाए, जल बढ़ने से पहले — अंतिम क्षण में नहीं।
- राहत केंद्र उन तक पहुँच योग्य बनाया जाए — ढलान (रैंप), भूतल का कक्ष, चलने योग्य शौचालय और कुर्सियाँ।
- उनकी नियमित दवाइयाँ, चश्मा, श्रवण यंत्र, छड़ी या व्हीलचेयर उनकी पेटी के साथ रखी जाए।
- चेतावनी एक से अधिक तरीकों से दी जाए — लाउडस्पीकर से, फोन से और द्वार खटखटाकर — ताकि जो सुन या देख नहीं सकता, वह छूट न जाए।
4. पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए
- जल आने से पहले सारे पशु खोल दिए जाएँ। बँधा हुआ पशु स्वयं को नहीं बचा सकता।
- एक ऊँचा सूखा खेत पशु-आश्रय के लिए तय किया जाए और वहाँ चारा तथा पीने का जल रखा जाए।
- हर पशु के गले में मालिक का नाम और फोन नंबर लिखी पट्टी बाँधी जाए।
- बाढ़ के बाद पशु-चिकित्सक को आश्रय पर बुलाया जाए, क्योंकि गीले और भीड़ भरे स्थान में पशु बीमार पड़ जाते हैं।
- कुत्ते, बकरी और मुर्गियाँ पीछे न छोड़ें; उन्हें साथ ले जाएँ या खुला छोड़ दें।
नाट्यरूप भाषण से अधिक उपयोगी क्यों है: जब आपको स्वयं सरपंच बनकर बोलना पड़ता है, तब पता चलता है कि योजना तभी काम की है जब उसमें यह लिखा हो कि कौन, क्या और कब करेगा। “हम वृद्धजनों की सहायता करेंगे” योजना नहीं है। “लाउडस्पीकर बजते ही रमेश और सीता दादी को विद्यालय ले जाएँगे” — यह योजना है।
बैठक के अंत में यह कहिए: बाढ़ का सबसे अच्छा काम सूखे महीनों में होता है। जब जल द्वार पर आ जाए, तब केवल भागा जा सकता है, तैयारी नहीं की जा सकती।